Tuesday, September 29, 2015

सोचा खुदकुशी कर लूं - राधे मां

मुंबई पुलिस का समन मिलने के बाद राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर खुदकुशी कर लेना चाहती थीं। उन्होंने मिड डे के साथ एक विशेष साक्षात्कार में इस बात का खुलासा किया और अपनी पिछली जिंदगी और मौजूदा विवादों पर अपनी बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि बहुत से लोग उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रस्तुत है मिड डे के संवाददाता शिवा देवनाथ को दिए इस साक्षात्कार के अंश...
आप सुखविंदर कौर से राधे मां कैसे बनीं?
17 साल की उम्र में मेरी शादी कर दी गई। शादी के बाद मेरे पति मुझे छोड़कर विदेश चले गए। दो बेटों और ससुराल वालों की देखभाल के लिए मैंने सिलाई का काम शुरू किया। बचपन से मुझे संगीत से लगाव रहा और मैं इसमें डूब जाती थी। यह देखकर मेरे ससुराल वालों को लगा कि मेरे अंदर कोई शक्ति है। वे मुझे मेरे गुरु के पास ले गए जिन्हें मुझमें दिव्यशक्ति दिखाई थी। उन्होंने मुझे राधे मां का नाम दिया।
क्या आपने कभी भगवान होने का दावा किया?
मैंने भगवान होने का कभी दावा नहीं किया लेकिन लोग मुझमें भगवान देखते हैं।
लोगों का आरोप है कि आसानी से पैसा कमाने के लिए आप राधे मां बनीं?
मैंने कभी किसी को अपने पास आने के लिए नहीं कहा। मैंने कभी किसी को कुछ देने के लिए बाध्य नहीं किया।
लोगों का आरोप है कि आपने 400 करोड़ रुपये कमाए हैं। इस बारे में क्या कहेंगी?
अगर मैं 400 करोड़ की मालकिन हूं तो उनसे कहिए कि मुझे 10 करोड़ दे दें और बाकी वे ले जाएं। मेरे पास केवल दो करोड़ हैं जिनमें दिल्ली में मेरी संपत्ति और गहने शामिल हैं। इन्हें मैंने 25 वर्षों में कमाए हैं।
डॉली बिंद्रा ने आपके खिलाफ आरोप लगाए हैं। इस पर क्या कहेंगी?
डॉली बिंद्रा ने अपनी पारिवारिक और वित्तीय समस्याओं को लेकर मुझे पत्र लिखा था। मैंने उससे ईश्वर में विश्वास करने को कहा था। मुझे भक्तों से जो मिलता था, वह डॉली मुझसे मांगती थी और मैं उसे दे देती थी। उसने मेरे भक्त संजीव गुप्ता से साढ़े पांच लाख रुपये कर्ज लिए लेकिन उसे लौटाने के बजाय मुझ पर आरोप लगाने लगी।
कब पता चला कि आपके खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज कराए गए हैं?

पुलिस का समन मिलने पर मेरे एक भक्त ने इसकी जानकारी दी। यह सुनकर मैं अवाक रह गई कि मैंने ऐसा क्या गलत किया। मैंने सोचा खुदकुशी कर लूं।

Thursday, September 24, 2015

12 लोगों में से आठ के लिए अभियोजन पक्ष ने सजा-ए-मौत मांगी

सन्‌ 2006 के मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाकों में दोषी करार दिए गए 12 लोगों में से आठ के लिए अभियोजन पक्ष ने सजा-ए-मौत मांगी है। मकोका की विशेष अदालत में 30 सितंबर को बाकी चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने की तकरीर की गई है।
विशेष सरकारी वकील राजा ठाकरे ने मंगलवार को कोर्ट में इस मामले में दोषी करार दिए गए 12 लोगों को मौत का सौदागर करार देते हुए इनमें से आठ के लिए मौत की सजा सुनाने की दरख्वास्त की। जिन दोषियों के लिए मौत की सजा मांगी गई है, उनके नाम हैं- कमाल अहमद अंसारी, डॉ.तनवीर अहमद अंसारी, मोहम्मद फैजल शेख, एहतेशाम सिद्दिकी, शेख आलम शेख, मोहम्मद साजिद अंसारी, नावेद हुसैन खान और आसिफ खान हैं।
जिन चार दोषियों के लिए उम्रकैद मांगी गई है उनके नाम हैं- मोहम्मद माजिद शेख, मुज्जमिल शेख, सोहेल शेख और जमीर अहमद शेख हैं। हालांकि सरकारी वकील ठाकरे ने अदालत में दलील दी है कि इन चारों दोषियों को सजा में कमी करके उम्रकैद तो दी जाए लेकिन उनकी उम्रकैद की अवधि साठ साल से कम नहीं होनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इसी माह में जज यतिन शिन्दे ने इस मामले में एक को बरी करते हुए 12 आरोपियों को दोषी करार दिया था। 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों की प्रथम श्रेणी की बोगियों में कई बम धमाके हुए थे। इस आतंकी वारदात में कम से कम 189 लोग मारे गए थे और 800 से अधिक घायल हुए थे।

Wednesday, September 23, 2015

देशद्रोह पर जारी महाराष्ट्र सरकार के परिपत्र पर रोक

बांबे हाई कोर्ट ने देशद्रोह पर जारी महाराष्ट्र सरकार के परिपत्र पर रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि कोर्ट में जवाब दाखिल करने तक वह उक्त परिपत्र का क्रियान्वयन न करें। महाराष्ट्र सरकार ने गत 27 अगस्त को देशद्रोह से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए लागू करने के बारे में पुलिस को दिशानिर्देश संबंधी परिपत्र जारी किया था। जिसके बाद इस परिपत्र की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर की गई हैं।
मंगलवार को यह आदेश जस्टिस वीएम कनाडे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। इसमें से एक याचिका मशहूर कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी और तीन अन्य द्वारा दायर की गई है, जबकि दूसरी याचिका एडवोकेट नरेंद्र शर्मा ने दायर की है।

अदालत ने सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 20 अक्टूबर तक का समय दिया है। गौरतलब है कि परिपत्र में कहा गया है कि नेताओं व निर्वाचित प्रतिनिधियों की शब्दों, बोलने, लिखने या प्रतीकों के जरिये आलोचना करने वाले के खिलाफ देशद्रोह की धारा लगाई जा सकती है। याचिकाकर्ताओं ने परिपत्र को संविधान विरोधी करार देते हुए आरोप लगाया कि इससे मौलिक अधिकारों का हनन होता है।

Monday, September 21, 2015

नौकर नहलाने का वादा कर उसके साथ कुकर्म किया करता था

सात साल के मासूम ने टीवी पर एक क्राइम शो देखा, जो यौन शोषण से जुड़ा एक मामला था। इस शो को देखने के बाद उस मासूम ने जब एक खुलासा किया तब उसके माता-पिता हैरान रह गए। बच्चे ने बताया कि उनका नाबालिग नौकर, जिसकी उम्र 17 साल है, ने उसके साथ तीन माह तक कुकर्म किया। पुलिस ने रविवार को आरोपी नौकर को पुणे से उसके पैतृक निवास से गिरफ्तार कर लिया है।
बीते शुक्रवार को एक क्राइम शो में दिखाया गया था कि कैसे एक नौकर एक बच्चे को अपनी हवस का शिकार बनाता है और उसके साथ कुकर्म करता है। इस शो को देखने के बाद पीड़ित बच्चे ने अपने माता-पिता को बताया कि उसके साथ वही सब कुछ उनके नौकर ने किया है जैसा शो में दिखाया गया।
पीड़ित बच्चे ने बताया कि उसका घरेलू नौकर नहलाने का वादा कर उसके साथ कुकर्म किया करता था। उक्त आरोपी नौकर ने तकरीबन तीन माह तक उसके साथ ऐसा किया। बच्चे के साथ कुकर्म के बाद आरोपी उसे चॉकलेट देता था और किसी से कुछ भी नहीं बताने के लिए कहता था। आरोपी तीन माह तक उनके यहां काम करता रहा था और तीन माह पहले ही नौकरी छोड़कर अपने घर पुणे चला गया था।
उसी दिन बच्चे के परिजनों ने आरोपी नौकर के खिलाफ बांगुर नगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। अपनी शिकायत में परिजनों ने कहा है कि पति-पत्नी दोनों ही नौकरी करते हैं इसलिए उन्होंने तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले अपने बेटे की देखभाल के लिए 17 वर्षीय नौकर को रखा था।

शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच ने रविवार को आरोपी को पुणे से गिरफ्तार कर लिया और उसे बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के सुपुर्द कर दिया। आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) और पॉक्सो की धारा 3 4 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

Friday, September 18, 2015

समानता एवं सामाजिक न्याय वर्ष

महाराष्ट्र सरकार ने 2015-16 को 'समानता एवं सामाजिक न्याय वर्ष' के रूप में मनाने का फैसला लिया है। इसके तहत बाबा साहेब अंबेडकर से जुड़े स्थलों को पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित करने और मुंबई, पुणे और नागपुर में अनुसूचित जाति की कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल की सुविधा मुहैया कराने की योजना है। ये सभी कदम न्याय वर्ष की प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं।
राज्य के वित्त एवं योजना मंत्री सुधीर मुंगांतिवार ने ने कहा, 'अंबेडकर की 125वीं जयंती मनाने के लिए 2015-16 को समानता एवं सामाजिक न्याय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसपर 125 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला लिया गया है।' विधानसभा के मानसून सत्र में 125 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांग पेश की गई।

मंत्री ने कहा कि अंबेडकर, महात्मा फुले, अन्नाभाउ साठे और छत्रपति साहू महाराज के लेख और भाषणों को बाबा साहेब अंबेडकर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से प्रकाशित कराया जाएगा।

Tuesday, September 15, 2015

वीर सावरकर के लिए भारत रत्‍न सम्‍मान की मांग

शिव सेना ने स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर के लिए भारत रत्‍न सम्‍मान की मांग की है। इसके लिए शिव सेना के नेता संजय राउत ने प्रधानमंत्री को एक पत्र भी लिखा है। अपने पत्र में राउत ने प्रधानमंत्री को लिखा है कि 'सावरकर एक हिंदू राष्‍ट्र के कट्टर समर्थक थे और पूर्व की सरकारों ने उन्‍हें नजरअंदाज किया है।'
उन्‍होंने आगे लिखा है कि 'ब्रिटिश अदालत ने सावरकर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और अंदमान की सेल्‍यूलर जेल में डाल दिया था। वहां उन्‍हें प्रताड़ि‍त किया गया और उनके साथ काफी बुरा व्‍यवहार हुआ लेकिन वो देशभक्‍त बने रहे।'

पत्र में आगे लिखा है कि, 'पिछली सरकारों ने जानबूझकर वीर सावरकर के महान बलिदान को नजरअंदाज किया। वो हिंदू राष्‍ट्र के समर्थक थे और इसलिए पूर्व की सरकारों ने उनसे बदला लेने की कोशिश की। मुझे पूरा भरोसा है कि आपकी सरकार वीर सावरकर को भारत रत्‍न से सम्‍मानित करेगी जो कि हमारे देश की जनता की मांग भी है।'

Friday, September 11, 2015

पराग ठाणे के उपनगर भायंदर का निवासी था

नौ साल से कोमा में पड़े पराग सावंत ने बीती 7 जुलाई को हिंदुजा अस्पताल में आखिरी सांस ली थी। पराग 11 जुलाई, 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों में घायल हुआ था।
हिंदुजा अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. बीके मिश्रा के अनुसार धमाके में घायल होने के बाद पराग दो वर्ष तक गहरे कोमा की अवस्था में था। फिर उसकी स्थिति में कुछ सुधार हुआ और वह सामान्य निर्देशों का पालन करने लगा।
7 जुलाई मंगलवार सुबह 5.30 बजे नर्स ने उसे सामान्य अवस्था में देखा था। लेकिन छह बजे उसका ऑक्सीजन स्तर गिरने लगा। डॉक्टरों ने उसे ऑक्सीजन देने की कोशिश की, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पराग ठाणे के उपनगर भायंदर का निवासी था।
वह अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और एक बेटी छोड़ गया है। पराग की बेटी का जन्म उसके घायल होने के बाद हुआ था। इसलिए वह कभी भी उसे देख नहीं पाया। पराग एक निजी कंपनी में काम करता था। सरकार द्वारा घोषित योजनाओं के तहत उसकी पत्नी प्रीति को रेलवे में नौकरी मिल गई थी।
11 जुलाई, 2006 को मुंबई के चर्चगेट स्टेशन से विरार की ओर जा रही लोकल ट्रेनों में 11 मिनट के अंदर अलग-अलग सात धमाके हुए थे। शाम को हुए इन धमाकों में 209 लोग मारे गए थे और करीब सात सौ लोग घायल हुए थे। ऐसी ही एक लोकल ट्रेन में पराग सावंत सवार था।

धमाके में बुरी तरह घायल होने के बाद उसे पहले भक्ति वेदांत अस्पताल में लाया गया था। बाद में उसे हिंदुजा अस्पताल लाया गया, जहां कोमा से निकालने के लिए कई बार उसका ऑपरेशन करना पड़ा था। बता दें कि नौ साल बाद भी ट्रेन विस्फोट कांड का मुकदमा ज्यों-का-त्यों पड़ा है।