Saturday, May 30, 2015

वसंत ढोबले शनिवार को पुलिस की नौकरी से रिटायर

फिल्म शोले के गब्बर की तरह तीन साल पहले मुंबई में एक डॉयलाग बहुत सुर्खियों में रहा था- बेटा सो जा, ढोबले आ जाएगा। मुंबई पुलिस का सबसे खौफनाक यह अधिकारी वसंत ढोबले शनिवार को पुलिस की नौकरी से रिटायर हो रहा है।
रिटायर होने से पहले ढोबले ने एनबीटी से कहा कि अपने 39 साल के पुलिस करियर में उन पर बहुत आरोप लगे, केस भी हुए, पर वह किसी से नहीं डरे। वह डरे, तो सिर्फ अपनी आत्मा से। डॉक्टर सत्यपाल सिंह जब मुंबई के पुलिस कमिश्नर बने थे, तो उन्होंने ढोबले के बारे में कहा था कि 'वह लार्जर देन लाइफ बन गया था, इसलिए उस पर किसी का नियंत्रण नहीं था।' ढोबले पर यह भी आरोप लगा था कि उन्होंने हमेशा कानून के दायरे से बाहर होकर काम किया। ढोबले भी इस बात से इनकार नहीं करते, पर उन्होंने इस संवाददाता से यह भी कहा कि 'भले ही मैंने कानून के दायरे से बाहर काम किया, पर ऐक्शन हमेशा कानून के दायरे में लिया।'
ढोबले कहते हैं, 'मैं 1976 बैच का पुलिस अधिकारी हूं। मुझ पर 118 केस हुए। पहला केस 1982 में दर्ज हुआ था और आखिरी केस से उन्हें 24 नवंबर, 2014 को मुक्ति मिली।' ढोबले के अनुसार, 'पुलिस हिरासत में हुई एक मौत के मामले में मुझे 1994 में गिरफ्तार कर लिया गया। मैं करीब एक सप्ताह तक आर्थर रोड जेल में भी रहा। मुझे उस दौरान नौकरी से भी निकाल दिया गया। पर मैं कभी डरा नहीं। उस केस में भी मैं सुप्रीम कोर्ट तक लड़ा और आखिरी में मुझे 1996 में वापस नौकरी में रख लिया। नौकरी में वापस आने के एक महीने बाद ही मैंने फिर एक बड़ी कार्रवाई की और आधा दर्जन बड़े आरोपियों पर एक साथ ऐक्शन लिया।'
ढोबले के बारे में कहा जाता है कि उन्हें अरुण पटनायक ने इंटरनैशनल शख्सियत बनाया और पूरी पावर दी। ढोबले ने उसी दौरान मुंबई के बीयर बारों में सबसे ज्यादा कार्रवाई की थी। पटनायक उन दिनों मुंबई के पुलिस कमिश्नर थे और ढोबले सिर्फ उन्हीं को रिपोर्ट करते थे। ढोबले पटनायक द्वारा उन्हें खुली पावर देने की बात को सिरे से खारिज करते हैं। उनके अनुसार, 'पटनायक ने उन्हें एक दिन अपने केबिन बुलाया और कहा कि जो भी चीज तुम्हें इलीगल लगे, उस पर तुम लीगल ऐक्शन लो। उसके बाद मैंने जो-जो भी कार्रवाई की, इन कार्रवाइयों पर मुझ पर जो-जो भी आरोप लगे, पटनायक ने उस बारे में मुझसे कभी भी पूछताछ नहीं की।' ढोबले पटनायक को रॉक स्टार मानते हैं, पर पटनायक के अलावा बतौर पुलिस कमिश्नर रिबेरो, राममूर्ति, आर डी त्यागी और रॉनी मेंडोसा की भी भरपूर तारीफ करते हैं। मेंडोसा के बारे में ढोबले कहते हैं, 'वह शख्स पुलिस कमिश्नर होते हुए भी बेहद सादगी भरा रहा। कई केसों में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की खोजबीन के लिए मेंडोसा अपनी गाड़ी से बत्ती उतरवा देते थे और फिर मुंबई के किसी भी टॉप वकील के यहां पहुंच जाते थे।' ढोबले कहते हैं कि 'मुझे पता नहीं क्या-क्या नाम दिए गए, किसी ने मुझे हॉकीमैन कहा, तो किसी ने स्टिक मैन, पर जो अवैध काम करते थे, उन्होंने ही मुझे ये नाम दिए। जो आम जनता है, वह जानती है कि मैं क्या हूं।' ढोबले ने इस संबंध में 1992 का उदाहरण दिया, जब वे गोरेगांव पुलिस स्टेशन में थे, तो लोग उनसे मदद मांगने के वास्ते घंटों इंतजार करते थे।

रिटायर होने के बाद हर किसी पुलिस अधिकारी को उन पुराने केसों के संबंध में कोर्ट जाना पड़ता है, जिनमें या तो वह जांच अधिकारी है या जिन केसों में वह परोक्ष या अपरोक्ष रूप से जुड़ा रहा। रिटायरमेंट के बाद किसी भी पुलिस अधिकारी के पास ऐसे केसों की संख्या 20 से 25 या अधिक से अधिक 100 तक ही होती है, पर ढोबले को रिटायरमेंट के बाद करीब 1000 ऐसे केसों में ट्रॉयल के दौरान अपनी गवाही देनी पड़ेगी। इस पृष्ठभूमि से ही समझा जा सकता है कि ढोबले ने अपने पुलिस करियर में कितने केसों में ऐक्शन लिए।

Thursday, May 28, 2015

शकील 43 दिन के बाद मंगलवार को कराची लौटा

पिछले कई तक पूरे देश में इस बात पर तो बहुत बहस हुई कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है या नहीं, पर इस दौरान दाऊद का खासमखास छोटा शकील पाकिस्तान के बाहर घूमता रहा, पर किसी भी जांच एजेंसी ने उसकी टोह तक लेने की कोशिश नहीं की।
एक विश्वस्त सूत्र ने बुधवार को एनबीटी से कहा कि शकील 43 दिन के बाद मंगलवार को कराची लौटा है। इस सूत्र के अनुसार, इन 43 दिनों में शकील ने कुछ वक्त ऑस्ट्रेलिया में और बाकी का समय अमेरिका में अपनी बेटी और उसके परिवार के साथ बिताया। शकील की बेटी जोया पेशे से डॉक्टर है। पिछले साल सितंबर में उसकी एक डॉक्टर के साथ ही पाकिस्तान में शादी हुई थी। शकील का दामाद मूल रूप से भारतीय है, पर वह अमेरिका में प्रैक्टिस करता है। शकील इसी वजह से अमेरिका गया हुआ था, पर अमेरिका में एफबीआई जैसी एजेंसी के होते हुए भी इंटरपोल उसे लोकेट नहीं कर पाई, मुंबई में काफी लोगों को आश्चर्य हो रहा है।
शकील के खिलाफ मुंबई में काफी केस दर्ज हैं। मुंबई में दाऊद का हफ्ता कारोबार मूल रूप से शकील या फहीम मचमच ही देखता है।

Wednesday, May 27, 2015

गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

कुर्ला के मुस्लिम युवक जीशान अली खान को नौकरी न देने के मामले में नया मोड़ आ गया है। डायमंड कंपनी हरिकृष्णा से जुड़े पांच लोगों ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। डीसीपी वीरेंद्र मिश्र ने एनबीटी को यह जानकारी दी।
जॉइंट सीपी देवेन भारती के अनुसार, कोर्ट गए इन पांच कर्मचारियों में दो डायरेक्टर्स हैं। इस कंपनी के खिलाफ पिछले सप्ताह कुर्ला के विनोबा भावे नगर में आईपीसी के सेक्शन 153 बी (1 बीसी) के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में यह केस बीकेसी पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया था। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद इस कंपनी के करीब आधा दर्जन लोगों से पूछताछ की थी। साथ ही कंपनी के सूरत स्थित कई डायरेक्टर्स को भी समन भेजा था। उसी के बाद अपनी गिरफ्तारी के डर में कंपनी से जुड़े पांच लोगों ने अग्रिम जमानत के लिए मंगलवार को कोर्ट में अप्लीकेशल दी। कोर्ट ने इस केस की अगली तारीख 1 जून निर्धारित की है और तब तक पुलिस को इन पांचों लोगों को गिरफ्तार न करने का आदेश दिया है।

जिन लोगों ने अग्रिम जमानत की अप्लीकेशन दी , उनमें वह HR ट्रेनी दीपिका टीके भी शामिल है , जिसने जीशान को यह ई-मेल भेजा था कि हमारी कंपनी में मुस्लिमों को जॉब नहीं दिया जाता। जमानत का आवेदन देने वालों में घनश्याम ढोलकिया और हंसमुख ढोलकिया डायरेक्टर्स हैं, जबकि महेंद्र देशमुख असोसिएट वाइस प्रेजिडेंट। पांचवें याचिकाकर्ता भास्कर जोशी हैं, जिनकी कंपनी में पोस्ट एडमिन मैनेजर की है। हालांकि शुरूआती पूछताछ में ई-मेल भेजने वाली HR की लड़की दीपिका ने जीशान को ई-मेल भेजने की जिम्मेदारी खुद पर ली थी और कहा था कि उस दिन उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था, इसलिए उससे यह गलती हो गई, पर बीकेसी पुलिस को उसके इस बयान पर कभी भी विश्वास नहीं हुआ। पुलिस को शक है कि शायद यह कंपनी का हिडन एजेंडा है, इसलिए पुलिस ने मुंबई स्थित HR अधिकारियों को ही नहीं, इसके सूरत स्थित कई डायरेक्टरों को पूछताछ के लिए मुंबई आने के वास्ते समन भेजा था। कंपनी के पांच लोगों को अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में जाना इसी के तहत देखा जा रहा है। एफआईआर में जो आईपीसी का सेक्शन लगाया गया है, यदि अपराध साबित हो गया, तो इसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।

Monday, May 25, 2015

सुपर किंग्स ने भी यू-टर्न लेते हुए लगातार दो गेंदों पर रोहित और सिमंस को पविलियन की राह दिखा दी

इंडियन प्रीमियर लीग के आठवें संस्करण के खिताबी मुकाबले में रविवार को इडेन गार्डन्स स्टेडियम में मुंबई इंडियंस ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली चेन्नै सुपर किंग्स को 41 रनों से हराकर दूसरी बार आईपीएल का खिताब अपने नाम किया।
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रनों का पीछा करने उतरी चेन्नै ने धीमी शुरुआत की और उसका पहला विकेट माइकल हसी के रूप में 22 के स्कोर पर गिरा। हसी ने सिर्फ 4 रन बनाए और मैकलेनगन का शिकार बने। दूसरे सलामी बल्लेबाज स्मिथ ने 57 रन बनाए। स्मिथ हरभजन सिंह का शिकार बने। उनके जाने के बाद कोई भी बल्लेबाज टिक कर नहीं खेल सका। सुरेश रैना ने कुछ अच्छे हाथ दिखाए, लेकिन वह भी 28 रन बनाकर भज्जी का दूसरा शिकार बने।
ब्रावो भी 9 के स्कोर पर चलते बने। वह फाइनल मैच में मैकलेनगन का दूसरा विकेट थे। कप्तान धोनी से चेन्नै के दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन उन्हें 18 के स्कोर पर लसिथ मलिंगा ने बोल्ड किया। डु प्लेसिस को विनय कुमार ने 1 ही रन बनाने दिया। इसके बाद पवन नेगी को मलिंगा ने 3 के स्कोर पर आउट कर दिया।
अश्विन के रूप में चेन्नै का आठवां विकेट गिरा। उन्होंने सिर्फ 2 रन बनाए और मैकलेनगन का तीसरा शिकार बने। रविंद्र जडेजा 11 और मोहित शर्मा 21 के स्कोर पर नॉट आउट रहे। चेन्नै निर्धारित 20 ओवरों में 161 रन ही बना सके और मुंबई ने 41 रनों से जीत हासिल की। मुंबई की ओर से मैकलेनगन ने 3, मलिंगा और हरभजन ने 2-2 और विनय कुमार ने 1 विकेट लिया।
इससे पहले टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवरों में मुंबई ने पांच विकेट गंवाकर 202 रन बनाए। सुपर किंग्स के तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने पहले ही ओवर में पार्थिव पटेल को खाता खोले बगैर पविलियन की राह दिखा आक्रामक शुरुआत दिलाई। हालांकि, इसके बाद कप्तान रोहित शर्मा (50) ने लेंडल सिमंस (68) के साथ दूसरे विकेट के लिए 10 से अधिक के औसत से 119 रनों की साझेदारी कर सुपर किंग्स पर करारा पलटवार किया और टीम को दमदार स्थिति में पहुंचा दिया। रोहित, सिमंस के क्रीज पर रहते मुंबई 12 ओवरों में 120 रन बना चुका था।
सुपर किंग्स ने भी यू-टर्न लेते हुए लगातार दो गेंदों पर रोहित और सिमंस को पविलियन की राह दिखा दी और विशालकाय स्कोर की ओर बढ़ रहे मुंबई पर थोड़ी लगाम जरूर लगा दी। रोहित 25 गेंदों पर छह चौके और दो छक्कों की मदद से हाफ सेंचुरी पूरा करने के तुरंत बाद अगली ही गेंद पर जडेजा के हाथों लपके गए। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सभी को चौंकाते हुए 13वें ओवर में आक्रमण पर स्मिथ को बुलाया। हालांकि स्मिथ ने कप्तान के फैसले को बिल्कुल सही ठहराते हुए पहली ही गेंद पर सिमंस का विकेट चटका दिया। सिमंस 45 गेंदों पर आठ चौके और तीन छक्के लगाकर क्लीन बोल्ड हो पविलियन लौटे।
लगातार दो विकेट गिरने के बावजूद रोहित और सिमंस ने आगामी बल्लेबाजों के लिए मजबूत आधार तैयार कर दिया था। अंबाती रायडू (नाबाद 36) और पोलर्ड (36) ने इस मजबूत आधार का भरपूर लाभ उठाते हुए चौथे विकेट के लिए 71 रनों की तेज साझेदार निभाई। स्मिथ के पास 18वें ओवर की पांचवीं गेंद पर इस साझेदारी को तोड़ने की सुनहरा मौका था लेकिन वह रायडू का एक आसान कैच छोड़ बैठे। पोलार्ड के 19वें ओवर की पांचवीं गेंद पर आउट होने के साथ यह साझेदारी टूटी।
मोहित की गेंद पर सुरेश रैना को कैच थमाने से पहले पोलार्ड ने 18 गेंदों का सामना कर दो चौके और तीन छक्के लगाए। हमेशा की तरह आखिरी ओवर लेकर आए ब्रावो ने हार्दिक पांड्या को खाता खोलने का भी मौका नहीं दिया। पांड्या का कैच भी रैना ने ही लिया। ब्रावो ने सुपर किंग्स के लिए सर्वाधिक दो विकेट लिए। इसके साथ ही उनके आईपीएल-8 में उन्होंने कुल 26 विकेट लिए।

Friday, May 22, 2015

बेरोजगार मंत्री

छह महीने पूरे होने पर महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार की एनसीपी ने जमकर खिंचाई की है। एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि इन छह महीने में शिवसेना कोटे के मंत्री बेरोजगार मंत्री बनकर रह गए। उनके पास कोई कामकाज ही नहीं है। शिवसेना के चार मंत्रियों के खाते से एक भी प्रस्ताव कैबिनेट के सामने नहीं आया। उन्होंने सवाल किया कि क्या बीजेपी के लोग शिवसेना मंत्रियों को काम नहीं करने दे रहे?
मलिक ने फडणवीस सरकार को महज ढिंढोरा पिटने वाली सरकार करार दिया। उन्होंने कहा कि छह महीने में बयानबाजी करने के अलावा सरकार ने कोई ठोस काम नहीं किया। मंत्री एक ही प्रस्ताव को कई तरह से पेश करके सिर्फ नंबर गिनाने में लगे हैं। सरकार के छह महीने के कामकाज का लेखा-जोखा रखते हुए मलिक ने कहा कि सरकार के 37 विभागों में से 17 विभाग से एक भी प्रस्ताव मंत्रिमंडल के सामने नहीं रखा गया। राज्य के छह मंत्री ऐसे हैं जिनके विभाग से एक भी प्रस्ताव कैबिनेट के सामने नहीं आ सका, जिसमें चार शिवसेना के मंत्री हैं।
जलसंसाधन मंत्री गिरीश महाजन, आदिवासी विकास मंत्री विष्णु सावरा, परिवहन मंत्री दिवाकर रावते, उद्योग मंत्री सुभाष देसाई, पीडब्लूडी मंत्री एकनाथ शिंदे और पर्यावरण मंत्री रामदास कदम के खाते से एक भी प्रस्ताव कैबिनेट के सामने नहीं आया। सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल की कुल 21 बैठकें हुई हैं। कैबिनेट की बैठकों की समीक्षा करने पर पता चलता है कि शिवसेना कोटे के मंत्रियों के पास कोई काम ही नहीं है। मलिक ने शिवसेना से से भी जवाब मांगा कि उनके मंत्रियों की इतनी बुरी हालत क्यों हुई?

Thursday, May 21, 2015

बेस्ट की बसों के यात्रियों की संख्या करीब ढाई लाख तक कम

बेस्ट प्रशासन ने आर्थिक स्थिति संवारने के लिए साल में दो बार बस के किराए में बढ़ोतरी की। एक अप्रैल से एक रुपये की बढ़ोतरी करने के बाद से एक मई तक यानी कि एक महीने में बेस्ट की बसों के यात्रियों की संख्या करीब ढाई लाख तक कम हुई है। फिलहाल बेस्ट बस यात्रियों की संख्या 29 लाख 50 हजार है, जबकि एक महीने पहले यह संख्या करीब 32 लाख थी।
बेस्ट समिति के सदस्य रवि राजा ने कहा कि बेस्ट में आपसी तालमेल की कमी है। बेस्ट परिवहन विभाग को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन के पास सही प्लानिंग नहीं है। इस कारण बेस्ट की आर्थिक स्थिति बदतर हो रही है। स्थिति सुधारने के लिए बेस्ट के सभी सदस्यों समेत अधिकारियों को मिलकर काम करने की जरूरत है।
बेस्ट समिति के सदस्य शिवजी सिंह ने कहा कि किराया बढ़ोतरी के बाद बस यात्रियों की संख्या में कमी आई है। इस कारण कई रूट की बसें बंद कर दी गईं। आर्थिक मजबूती के लिए रूट बढ़ाने की जरूरत है। बेस्ट को आर्थिक संकट से उबारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
बस के किराए में दो बार बढ़ोतरी होने से यात्रियों की संख्या में भारी कमी आई है। लेकिन जून से टैक्सी, रिक्शा के किराए में भी एक रुपये की बढ़ोतरी होने वाली है। इससे बस यात्रियों की संख्या फिर बढ़ सकती है।
बीजेपी ने बेस्ट प्रशासन के खिलाफ श्वेतपत्रिका निकालने की मांग की है। पार्टी के गटनेता मनोज कोटक के मुताबिक, बेस्ट के जनरल मैनेजर के लिए बेस्ट की आर्थिक स्थिति की पूरी जानकारी स्थायी समिति के समक्ष पेश करना अनिवार्य है। साथ ही बार-बार बीएमसी द्वारा बेस्ट को दी जा रही आर्थिक मदद का इस्तेमाल उन्होंने कहां, कब और कैसे किया, इसका लेखाजोखा भी दिया जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर प्रशासन को श्वेतपत्रिका जारी करनी चाहिए। कुछ नगरसेवकों ने बेस्ट को टोल मुक्त करने, विदेशों की तर्ज पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सब्सिडी देने, यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए किराया कम करने आदि की भी मांग की।

Wednesday, May 20, 2015

किसानों से 14 से 16 रुपये प्रति लीटर दूध

दूध की बढ़ती कीमतों से जहां आम जन के पसीने छूट रहे हैं, वहीं दूध विरतण कंपनियां किसानों से सस्ते रेट पर दूध खरीदकर उनका शोषण कर रही हैं। खरीदी-बिक्री के इस अंतर से दूध सप्लाई करने वाली कंपनियों की चांदी हो गई है।
मंगलवार को पशु संवर्धन, दूध विकास एवं मत्स्य व्यवसाय मंत्री एकनाथ खडसे ने राज्य की दूध वितरण कंपनियों से कहा कि वे किसानों से न्यूनतम 20 रुपये प्रति लीटर दूध खरीदें। ऐसा नहीं करने वाली वितरण कंपनियों पर फौजदारी कार्रवाई होगी। इस संबंध में सरकार जल्द ही अध्यादेश जारी करेगी। साथ ही उन्होंने वितरण कंपनियों से कहा कि वे जनता को 2 से 5 रुपये कम रेट पर दूध मुहैया कराएं।

दूध विरतण कंपनियां किसानों से 14 से 16 रुपये प्रति लीटर दूध खरीद रही हैं। वही दूध आम जन को 40 से 60 रुपये में दे रही हैं। खरीदी-बिक्री में इतना बड़े अंतर से सरकार और अधिकारी परेशान हैं। दूसरी तरफ, दूध के लालच में जानवर पालने वाले किसानों का बुरा हाल है। बड़ी संख्या में किसान इस व्यवसाय से ही छुटकारा पाने के लिए अपने पशुओं को बेचने लगे हैं। क्योंकि इतने कम रेट पर दूध बेचने से उनका हिसाब गड़बड़ा गया है। नागपुर और मुंबई के बजट सत्र में विरोध दलों ने इस मामले को जोरशोर से उठाया था। तब सरकार ने यह कहते हुए अपना पिंड छुड़ा लिया था कि वह दूध वितरण कंपनियों के साथ बैठक तक रास्ता निकालेगी।
एक समय था जब किसान कंपनियों को 30 से 35 रुपये प्रति लीटर दूध बेचती थी। उस वक्त पावडर बनाने वाली कंपनियों को केंद्र सरकार रियायत देती थी। अब केंद्र ने वह रियायत खत्म कर दी है। इससे दूध से पावडर बनाने का काम लगभग बंद हो गया, इसलिए इन कंपनियों ने किसानों से दूध खरीदना बंद कर दिया। इससे दूध की मांग घट गई। बताया जा रहा है कि दूध की मांग घटने से प्रतिदिन करीब 5 लाख लीटर दूध का अतिरिक्त उत्पादन हो रहा है।
मंगलवार को विधान परिषद के सभापति रामराजे नाईक-निंबालकर, विधान सभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे, अन्न व नागरी आपूर्ति मंत्री गिरीष बापट, विधान परिषदेचे विरोधी पक्षनेते धनंजय मुंडे और राज्य के दूध वितरण कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।