Sunday, November 30, 2014

धर्म के साथ-साथ पहनावे पर भी टिप्पणी

बॉलिवुड ऐक्टर गौहर खान को एक रिऐलिटी शो की रिकॉर्डिंग के दौरान मौजूद एक दर्शक ने थप्पड़ मार दिया और उनके धर्म के साथ-साथ उनके पहनावे पर भी टिप्पणी की। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने बाद में उस युवक को दबोच कर पुलिस के हवाले कर दिया। 
रविवार देर शाम गोरेगांव स्थित फिल्म सीटी में एक रिऐलिटी शो के रिकॉर्डिंग के दौरान शो की महिला एंकर गौहर खान के साथ एक युवक ने छेड़खानी और मारपीट की। आरोपी युवक का नाम मोहम्मद अकिल मलिक (24 साल) बताया जा रहा है।

जोन-12 के डीसीपी पंजाबराव उगले ने बताया कि गौहर खान द्वारा आरे पुलिस स्टेशन में की गई शिकायत के मुताबिक, रविवार की शाम स्टूडियो नंबर-9 में एक रिऐलिटी शो की रिकॉर्डिंग हो रही थी। इस दौरान मंच पर गौहर खान प्रोग्राम पेश कर रही कि अचानक दर्शकों में से एक व्यक्ति (अकिल मलिक) मंच पर आया और उसने उन्हें थप्पड़ मारा।
पुलिस के अनुसार आरोपी अकिल मलिक गौहर खान के शॉर्ट ड्रेस से खफा था और इससे नाराज होकर उसने ऐसा कदम उठाया। यहां तक की थप्पर मारने के बाद मलिक ने गौहर से पूछा भी कि एक मुस्लिम होकर भी ऐसे कपड़े पहनने और गंदे गानों पर डांस करने में तुम्हें शर्म नहीं आती। 
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस दौरान आरोपी ने गौहर खान के साथ छेड़खानी करने की भी कोशिश की। पूरे मामले की आरे पुलिस जांच करने में जुटी है। गौहर खान बिग बॉस 7 (2013) की विजेता रह चुकी हैं।

Saturday, November 29, 2014

शिवसेना उपमुख्यमंत्री, गृह मंत्रालय, 6 कैबिनेट और 4 राज्यमंत्री पद और 8 महामंडलों का अध्यक्ष पद से कम पर राजी नहीं

बीजेपी और शिवसेना नेताओं के बीच शुक्रवार को शुरू हुई 'मातोश्री वार्ता' का पहला दौर बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। शिवसेना अब भी उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री पद की अपनी मांग छोड़ने को तैयार नहीं है। जबकि बीजेपी ने इसके मुआवजे के रूप में केंद्र में एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री पद का ऑफर दिया है।
बीजेपी के वार्ताकार केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रकांत पाटील के साथ शाम 6 बजे चर्चा के लिए 'मातोश्री' पहुंचे और यह वार्ता 40 मिनट तक चली। जब वे भीतर जा रहे थे, तो उनके चेहरे खिले हुए थे, लेकिन जब वे बाहर निकले तो मुस्कान गायब थी। वार्ता बेनतीजा रहने से उदास बीजेपी के दोनों नेता बिना कोई बात किए ही निकल गए।
चर्चा में शामिल उद्धव ठाकरे और सुभाष देसाई ने बीजेपी वार्ताकारों से साफ तौर पर कहा कि शिवसेना उपमुख्यमंत्री, गृह मंत्रालय, पीडब्ल्यूडी मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय के साथ 6 कैबिनेट और 4 राज्यमंत्री पद और 8 महामंडलों का अध्यक्ष पद से कम पर राजी नहीं है।
बीजेपी के वार्ताकारों ने यह कह कर बातचीत खत्म की, कि वह शनिवार को दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और महाराष्ट्र बीजेपी के नेताओं के साथ इस बारे में चर्चा कर फैसला लेंगे।
वैसे तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को भी शनिवार को मुंबई आना था, लेकिन खबर है कि दांत में दर्द के कारण उनका कार्यक्रम टल गया है। इसलिए बहुत संभव है कि अब इस बारे में फैसला सोमवार तक ही हो पाएगा।
उद्धव ठाकरे के साथ 'मातोश्री वार्ता' पर जाने से पहले बीजेपी कोर कमिटी की बैठक राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे के घर पर हुई, जिसमें राज्य बीजेपी नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान को सारे अपडेट्स दिए। इसी तरह मीटिंग खत्म होने के बाद उद्धव ठाकरे ने महापौर बंगले पर शिवसेना नेताओं के साथ मीटिंग की और उन्हें चर्चा के बारे में अवगत कराया।

Wednesday, November 26, 2014

पुलिस को और भी सक्षम बनाने की दिशा में बहुत ही कम प्रयास

26/11 आतंकी हमले के बाद मुंबई पुलिस को तीसरी दुनिया की पुलिस से दुनिया की सबसे बेहतरीन पुलिस बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए थे जिससे वह 26/11 जैसे खतरों से निपटने में सक्षम बन सके। लेकिन पुलिस को और भी सक्षम बनाने की दिशा में बहुत ही कम प्रयास किए गए हैं।
बधवार पार्क लैंडिंग पॉइंट, जहां से 10 पाकिस्तानी बंदूकधारी मुंबई में घुसे थे, वहां अब चौबीसों घंटे सुरक्षा रहती है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, 'शहर के सभी 19 लैंडिंग पॉइंट्स को सुरक्षा प्रदान की गई है।' 26/11 के बाद से पुलिस को 20 नई पट्रोलिंग बोट्स (नौकाएं) दी गई थीं, हालांकि ये बुलेटप्रूफ या फाइटर बोट्स नहीं हैं।
एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि 2008 में हुए 26/11 के आतंकी हमले के बाद राज्य सरकार ने 29 हाई टेक 'बुलेटप्रूफ' स्पीडबोट्स का ऑर्डर दिया था। लेकिन टेस्ट से साबित हो गया कि वे बुलेटप्रूफ नहीं हैं। सिटी पुलिस ने 2010 में अमेरिकी प्रेजिडेंट बराक ओबामा के मुंबई दौरे से पहले इनमें से एक बोट की क्षमता की जांच की थी। जब एसएलआर (सेल्फ लोडिंग रायफल) से गोली चलाई गई तो उसने स्पीडबोड की बॉडी को भेद दिया। इसके बाद पुलिस ने तुरंत ही इन बोट्स के सप्लायर को पांच कंसाइनमेंट को वापस लेने का आदेश दिया। 
अधिकारी ने कहा, 'सरकार ने एक प्राइवेट फर्म से बोट्स के लिए 150 करोड़ के करार पर हस्ताक्षर किए थे, जिनमें से प्रत्येक बोट की कीमत 5 करोड़ रुपये थी। यह करार 10 पाकिस्तानी आतंकियों के समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसने और आंतकी हमला किए जाने के बाद किया गया था। इस फर्म ने लेवल III (यूएस नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जस्टिस स्पेसीफिकेशन के आधार पर) की बोट्स दिए जाने का वादा किया था और दावा किया था कि एके-47 की गोली भी इसे नहीं भेद पाएगी। हमने कंपनी से कहा कि वे अपनी बोट्स को वापस ले लें।'
मुंबई तटीय पुलिस राज्य की 720 किलोमीटर लंबी तटीय सीमा में से 124 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करती है। शहर की पुलिस ने 2009 में चार बुलेटप्रूफ बोट्स खरीदीं थी, जिनके नाम कोएना, भीमा, कावेरी और पुरना हैं। इन बोट्स के ऑडर आंतकी हमले के पहले दिए गए थे। 2011 में तटीय पुलिस ने 10 नॉन बुलेटप्रूफ बोट्स खरीदे। केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र को 28 बोट्स दिए।
अभी माहिम में एक तटीय पुलिस स्टेशन काम कर रहा है। केंद्र सरकार बोरिवली में एक और पुलिस स्टेशन खोलना चाहती है। पुलिस डिपार्टमेंट ने ऑफिशल बोट्स की लैंडिंग के लिए चार जेटीज बनाने का प्रस्ताव रखा है। अधिकारी ने कहा, 'तटीय स्टेशन की पांच और पुलिस चौकियां बनाए जाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया गया है।'
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इंडियन नेवी, एयर फोर्स, कोस्ट गार्ड और राज्य की एजेंसियों के 30 से ज्यादा जहाज और सबमरीन को पश्चिमी तटीय क्षेत्र में तैनात किया गया है। साथ ही यह भी कहा कि नेवी की सुरक्षा पहले से ज्यादा मजबूत है।
26/11
के बाद रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) ने छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस लगाया है। आरपीएफ (सीआर) के सीनियर डिविजनल सिक्यॉरिटी कमिश्नर आलोक वोहरा ने कहा, 'हमने 1466 क्लोज सर्किट कैमरे, 14 हैवी ड्यूटी एक्सरे बैगेज स्कैनर्स, तीन पोर्टेबल बैगेज स्कैनर्स, 85 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर्स, 426 हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर्स, 37 कैनीज (उनमें से 6 ट्रैकर्स) और 180 जवानों को हमारे टीम में शामिल किया है।'

मैं सच जानता हूं। कसाब पर काम्टे ने नहीं , मैंने गोलियां चलाईं- अरुण जाधव

छह साल पहले 26/11 की रात गिरगांव में हुए एनकाउंटर में अबू इस्माइल मारा गया था और अजमल कसाब घायल हो गया था। पर गिरगांव से पहले कामा अस्पताल से लगी रंग भवन लेन में भी कसाब को कई गोलियां लगी थीं। अब तक ये कहानियां चल रही थीं कि वे गोलियां तब के अडिशनल सीपी अशोक काम्टे की एके-47 से निकली थीं , पर 26/11 के हीरो अरुण जाधव ने मंगलवार को एनबीटी से दावा किया कि कसाब को गोलियां काम्टे ने नहीं , खुद उन्होंने मारी थीं। अरुण जाधव का दावा है कि यह बात उन्होंने 26/11 की जांच के लिए बनी राम प्रधान कमिटी के सामने भी कही थी।
26/11
को दस आतंकवादी बधवार पार्क के रास्ते मुंबई में घुसे थे और फिर दो - दो के ग्रुप में पांच अलग - अलग जगह घुस गए थे। अजमल कसाब और अबू इस्माइल वाला ग्रुप टैक्सी से मुंबई सीएसटी पहुंचा था। सीएसटी में दर्जनों लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी के बाद दोनों आतंकवादी रेलवे के पिछले पुल से बाहर आते हुए कामा अस्पताल के अंदर पीछे वाले गेट से घुस गए थे। तब के अडिशनल सीपी सदानंद दाते के नेतृत्व में फौरन एक टीम सीढियों के सहारे कामा अस्पताल के ऊपर तक पहुंच रही थी कि तभी गोलीबारी व हैंडग्रेनेड से किए हमले में पीएसआई प्रकाश मोरे और कांस्टेबल विजय खांडेकर की मौत हो गई, जबकि खुद दाते व उनका एक सिपाही तिलेकर उसमें घायल हो गया था। तिलेकर किसी तरह कामा अस्पताल के पीछे वाले गेट से बाहर आने में सफल रहा और फिर बकौल अरुण जाधव विजय सालसकर को यह बात बताई, जो अपनी क्राइम ब्रांच की टीम के साथ बाहर खड़े थे। अशोक काम्टे और तब के एटीएस चीफ हेमंत करकरे अलग - अलग रास्तों से अपनी - अपनी टीम के साथ कामा अस्पताल के पीछे वाले गेट तक पहुंचे थे। उस वक्त तक पायधुनी पुलिस के एसीपी भी क्वॉलिस पुलिस गाड़ी से वहां पहुंच चुके थे।
घायल तिलेकर को अस्पताल पहुंचाने का निर्देश देने के बाद सालसकर, काम्टे व करकरे के बीच जो मंत्रणा हुई, उसमें यह फैसला किया गया कि कामा अस्पताल में सीढ़ियों पर फंसे सदानंद दाते को बचाने के लिए आगे वाले गेट यानी मुख्य सड़क वाले द्वार से कामा अस्पताल के अंदर घुसा जाए। उसी के तहत पायधुनी के एसीपी की क्वॉलिस गाड़ी में सबसे आगे काम्टे बैठे, फिर ड्राइविंग सीट पर सालसकर, जबकि बीच की रो में हेमंत करकरे। सबसे पीछे वाली जगह पर कुल चार लोग बैठे। इनमें अरुण जाधव, पायधुनी के एसीपी का ड्राइवर भोसले, एसीपी का ऑपरेटर योगेश पाटील व अशोक काम्टे का ऑपरेटर जयवंत पाटील शामिल था।
क्वॉलिस गाड़ी में बैठने से पहले की जो प्लानिंग थी, उसके मुताबिक इस टीम को कामा अस्पताल से लगी रंग भवन वाली लेन से मेन रोड पर आना था और फिर मुख्य गेट से कामा अस्पताल में घुसकर कसाब व इस्माइल को पकड़ना था, पर जैसे ही इस पुलिस टीम की यह गाड़ी कामा अस्पताल के पीछे वाले गेट से थोड़ी मूव ही हुई, कि उसी वक्त वायरलेस से मैसेज आया कि दो आतंकवादी रंगभवन वाली लेन में एक लालबत्ती वाली गाड़ी के पीछे छिपे हुए हैं। यह लालबत्ती की गाड़ी तब के मेडिकल एजुकेशन सेक्रेटरी भूषण गंगवानी की थी , जिसमें ड्राइवर मारूति फड बैठा हुआ था, जिसकी बाद में एक अंगुली ही चली गई थी। अरुण जाधव का कहना है कि इस लालबत्ती की गाड़ी से काफी पहले की दूरी पर कसाब व इस्माइल कुछ गमलों के पीछे छिपे बैठे थे, जिसका हम लोगों को अंदाज नहीं था, जबकि इन दोनों आतंकवादियों ने हमें दूर से देख लिया था, इसलिए हम कुछ रियेक्ट करते, उससे पहले ही उन्होंने हम पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। जवाब में इस क्वॉलिस जीप से भी गोलियां चलीं, जिसमें कसाब घायल हो गया। पिछले छह सालों से मीडिया में इस तरह की खबरें चलीं कि क्वॉलिस गाड़ी से चली गोलियां दरअसल अशोक काम्टे की एके-47 से निकली थीं, पर अरुण जाधव का कहना है कि मैं उस वारदात का अकेला विटनेस हूं , मैं सच जानता हूं। कसाब पर काम्टे ने नहीं , मैंने गोलियां चलाईं। मैंने अपनी कार्बाइन से तीन गोलियां चलाईं, जिसमें दो कसाब को लगीं भी। मुझे भी पांच गोलियां मारी गईं। जाधव ने कहा कि सबूत के तौर पर उस दिन के रंग भवन के कारतूसों को देखा जा सकता है कि ये कारतूस काम्टे की एके-47 के हैं या मेरी कार्बाइन के।
पायधुनी के एसीपी की इस क्वॉलिस जीप में कुल सात पुलिसकर्मी थे। वारदात के वक्त चार लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। उस वक्त जो खबरें आईं, उसके मुताबिक विजय सालसकर करीब आधा घंटे तक जिंदा रहे और सड़क पर पड़े रहे, पर चूंकि उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका , इसलिए समय पर इलाज न मिलने के कारण बाद में उनकी मौत हो गई। हालांकि अरुण जाधव को इस बारे में कुछ पता नहीं है, इसलिए इस बारे में उन्होंने एनबीटी से कुछ बोला भी नहीं। पर अरुण जाधव ने इतना जरूर कहा कि जब गोलीबारी हुई , तो पीछे की सीट पर बैठे हम चार लोग एक दूसरे पर गिर पड़े। उसी वक्त कसाब व इस्माइल जब रंग भवन लेन से पुलिस की क्वॉलिस गाड़ी को ड्राइव कर बाहर निकल रहे थे, उसी वक्त ऑपरेटर योगेश पाटील के मोबाइल की घंटी बज गई, इस पर एक आतंकवादी ने फौरन योगेश को गोली मार दी । दोनों आतंकवादी पुलिस की गाड़ी को फिर विधानभवन के बाहर छोड़ कर वहां एक बिजनेसमैन की स्कोडा गाड़ी में जबरन घुस कर उसकी गाड़ी को ले भागे थे। उसी के बाद अरुण जाधव ने क्वॉलिस गाड़ी में लगे वायरलेस से पुलिस कंट्रोल रूम को दोनों आतंकवादियों के स्कोडा से भागने की सूचना दे दी। इसके बाद पूरे शहर में नाकाबंदी कर दी गई। इसी में गिरगांव में हुए एनकाउंटर के बाद अबू इस्माइल मारा गया, जबकि कसाब जिंदा पकड़ा गया।

Monday, November 24, 2014

कांग्रेस नेता मुरली देवड़ा का निधन

राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता मुरली देवड़ा का निधन हो गया है। 77 साल के मुरली कैंसर से जूझ रहे थे। रात करीब साढ़े 3 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। अंतिम दर्शन के लिए उनका पार्थिव शरीर दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच मुंबई के कांग्रेस कार्यालय में रखा जाएगा। इसके बाद 2 से तीन बजे के बीच कांग्रेस दफ्तर से चंदनवाड़ी सोनापुर तक अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और वहीं पर दोपहर तीन बजे उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।
मुरली देवड़ा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख प्रकट किया है। पीएम ने पूर्व केंद्रीय मंत्री को एक समर्पित नेता बताया और कहा कि पार्टी लाइन से हटकर वह अन्य नेताओं के बीच भी चर्चित रहे। पीएम ने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि दिवंगत कांग्रेस नेता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दिल्ली से कांग्रेस के कौन-कौन से नेता जाएंगे। 

मूल रूप से राजस्थान के सीकर से संबंध रखने वाले मुरली देवड़ा का जन्म साल 1937 में मुंबई में हुआ था। यहीं से उन्होंने बीए की और समाज सेवा से जुड़ गए। उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 1968 में पार्षद बनकर हुई। 1977 में वह शिवसेना के समर्थन से मुंबई के मेयर चुने गए। 
इसके बाद 1980 में मुरली देवड़ा ने साउथ मुंबई सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा और हार का मुंह देखना पड़ा, मगर इसके बाद हुए चुनावों में उन्होंने जीत हासिल की। 1982 में वह कांग्रेस के टिकट पर महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य बने। 1985, 1989 और 1991 में वह लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन 1996 और 1999 में उन्हें फिर हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने इस सीट से अपने बेटे मिलिंद देवड़ा को उतारा और 2004 में मिलिंद सांसद चुने गए। 
गांधी परिवार के करीबी समझने जाने वाले मुरली इसके बाद दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए। यूपीए की सरकार में उन्होंने पेट्रोलियम और कॉर्पोरेट अफेयर्स जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल था।

Friday, November 21, 2014

मुंबई में मेट्रो का जाल बिछाने की तैयारी

मुंबई में मेट्रो का जाल बिछाने की तैयारी हो रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुए एमएमआरडीए की बैठक में 2 नए मेट्रो रूट को मंजूरी दी गई। दहिसर-चारकोप-बांद्रा-मानखुर्द मेट्रो (मेट्रो-2) और वडाला-घाटकोपर-ठाणे-कासारवडावली (मेट्रो-5) को हरी झंडी दी गई।
45,000
करोड़ रुपये के इन दोनों मेट्रो प्रॉजेक्टों का काम राज्य सरकार की मेट्रो रेल विकास कॉर्पोरेशन (एमआरवीसी) के तहत 2021 तक करने का लक्ष्य है। एमएमआरडीए अब इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेगी। फिर इसे कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। इन प्रॉजेक्टों में 50 पर्सेंट लोन इंटरनैशनल एजेंसी से लिया जाएगा। 20 पर्सेंट केंद्र और 30 पर्सेंट राज्य व एमएमआरडीए मिलकर देंगे। 

मेट्रो-2 दहिसर-चारकोप-बांद्रा-मानखुर्द 26,605 करोड़ रुपये लागत 40 किमी. की दूरी 36 स्टेशन 
मेट्रो-5 वडाला-घाटकोपर-ठाणे-कासारवडावली 19,097 करोड़ रुपये लागत 32 किमी. की दूरी 30 स्टेशन 
मेट्रो-2 दहिसर तक मेट्रो-2 का काम शुरू होने से लोगों को काफी राहत मिलेगी। इसके काम को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। वैसे इसका काम 2009 में ही दिया गया था, लेकिन मंजूरी न मिलने के कारण इस पर कोई खास पहल नहीं हो पाई। कुछ दिनों पहले ही पिछला कॉन्ट्रैक्ट रद कर दिया गया। चारकोप-बांद्रा-मानखुर्द तक के इस प्रॉजेक्ट को दहिसर तक बढ़ाया गया है। पहले एलिवेटेड चलने वाली मेट्रो को अब पूरी तरह से अंडरग्राउंड बनाया जाएगा। 
मेट्रो-5 जोड़ेगी ठाणे को मेट्रो-5 वडाला से ठाणे होकर कासारवडावली तक जाएगी। इससे मुंबई की ठाणे के साथ कनेक्टिविटी काफी मजबूत होगी। इसका काफी हिस्सा अंडरग्राउंड होगा। हालांकि कुछ हिस्सा एलिवेटेड भी होगा। यह एलबीएस मार्ग से गुजरेगी, जहां काम करना बड़ी चुनौती है।

Tuesday, November 18, 2014

तमाम स्कूलों व कॉलेजों के बाहर नशीले मादक पदार्थों की बिक्री किए जाने का सनसनीखेज आरोप

एनसीपी विधायक जीतेन्द्र आह्वाड ने ठाणे शहर, कलवा तथा मुंब्रा स्थित तमाम स्कूलों व कॉलेजों के बाहर नशीले मादक पदार्थों की बिक्री किए जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। आह्वाड के मुताबिक, ड्रग माफिया एमडी और बुक सांकेतिक नाम से पहचाने जाने वाले नशीले पदार्थ को पहले छात्रों को मुफ्त में देते हैं और फिर एक बार लत लग जाने पर उनसे ऊंचे दाम वसूलते हैं। ठाणे शहर में सोमवार दोपहर हुई प्रेस सम्मेलन में आह्वाड ने इस बात का खुलासा किया।

आह्वाड ने आरोप लगाया कि इस तरह के सफेद पावडर का नशीले पदार्थ के रूप में उपयोग होने के बावजूद इसको मादक पदार्थ की श्रेणी में नहीं रखा गया है, जिससे पुलिस द्वारा इसको बेचे जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती है। इस तरह के नशीले पदार्थ को स्कूल और कॉलेज के छात्र कोल्डड्रिंक में मिला कर या नाक से सूंघ कर सेवन करते हैं।
आह्वाड के अनुसार, छात्रों को इस पावडर की आदत लग जाने पर ड्रग माफिया 60 रुपये का पावडर छात्रों को 600 से डेढ़ हजार रुपये में बेचते हैं। आह्वाड ने राज्य सरकार से एमडी और बुक सांकेतिक नाम से पहचाने जाने वाले पावडर को नशीले पदार्थ की श्रेणी में शामिल करने की मांग की है, ताकि पुलिस इस तरह के पावडर की बिक्री करने वाले ड्रग माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सके। बता दें कि एमडी और बुक सांकेतिक नाम से पहचाने जाने वाले नशीले पदार्थ का उपयोग रेव पार्टियों में भी होता है।