Wednesday, March 9, 2011

मुंबई पुलिस भी परेशान 'टैक्स चोर'पुणे के घोड़ा कारोबारी हसन अली खान के नखरों से

देश के सबसे बड़े 'टैक्स चोर'पुणे के घोड़ा कारोबारी हसन अली खान के नखरों से प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी) के अधिकारी और मुंबई पुलिस भी परेशान हो गई। ईडी ने मंगलवार को जब हसन अली से पूछताछ शुरू की तो उसने अचानक सीने-पेट में दर्द और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत शुरू कर दी। आनन-फानन में उसे पुलिस वैन से तुरंत जेजे हॉस्पिटल ले जाया गया। जेजे हॉस्पिटल के डीन डॉक्टर टीपी लहाने ने उसकी जांच की। हसन का ईसीजी और ब्लड प्रेशर टेस्ट किया गया और सब ठीक निकला। डॉक्टरों ने जैसे ही हसन को फिट घोषित किया, उसने एक नया ड्रामा शुरू कर दिया। हॉस्पिटल में हसन ने कहा कि उसे टॉइलेट जाना है। वॉर्ड बॉय ने हसन को इंडियन स्टाइल के टॉइलेंट में जाने को कहा, तो उसने वेस्टर्न स्टाइल की सीट की मांग कर दी। उसने कहा कि वह ठीक से चल-फिर नहीं पा रहा है। मेडिकल ऑफिसर ने बताया कि इसके बाद मैंने वॉर्ड बॉय से पॉट मंगाया, तो उसने उसे भी इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया। वॉर्ड बॉय ने उसे टॉइलेट में जाने को कहा तो उसने यह कहते हुए इनकार कर दिया किर वह केवल वेस्टर्न स्टाइल वाला टॉइलेट ही इस्तेमाल करता है। कस्टडी में भी हसन की यह हनक देखकर अधिकारी भी हैरान थे। हसन का यह तमाशा तब तक चलता रहा जब तक कि उसे दूसरी बिल्डिंग में एक महिला मेडिकल ऑफिसर के केबिन में नहीं ले जाया गया। जेजे अस्पताल में 5 घंटे तक हसन के इस ड्रामे से उसकी सुरक्षा में लगे पुलिवाले भी परेशान थे।

Monday, March 7, 2011

दिलीप कुमार की 72 वर्षीय बहन अख्तर आसिफ के नौकर-चाकर उनकी जूलरी और कैश लेकर चंपत

बॉलिवुड ऐक्टर दिलीप कुमार की 72 वर्षीय बहन अख्तर आसिफ के नौकर-चाकर उनकी जूलरी और कैश लेकर चंपत हो गए। आसिफ सुपरहिट फिल्म ' मुगल-ए-आजम ' बनाने वाले दिवंगत के . आसिफ की पत्नी हैं। आसिफ ने अपने नौकरों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके हेल्पर उनकी जूलरी और कैश ले गए हैं। आसिफ को ऐल्टशाइमर्ज रोग है। वह ठीक से चीजों को याद नहीं रख पाती हैं। जुहू स्थित फ्लैट में रहने वाली आसिफ ने रविवार को पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका ड्राइवर, उसकी पत्नी और एक दूसरी नौकरानी ने यह वारदात की। आसिफ का बंगला अमिताभ के बंगले का पास ही है। अख्तर के भाई असलम खान ने बताया कि ये नौकर कई समय से उनके लिए काम कर रहे थे। आसिफ ने घर के खर्चों के लिए उन्हें बेयरर चेक भी दिए हुए थे। आशंका है कि नौकरों ने इनका भी दुरुपयोग किया। आसिफ ने कहा कि नौकर करीब 12 लाख रुपये तक ले गए।

Wednesday, March 2, 2011

11 बड़े बंदरगाहों के प्रशासनिक परिवर्तन की तैयारी

केंद्र सरकार के अधीन देश के 11 बड़े बंदरगाहों के प्रशासनिक परिवर्तन की तैयारी चल रही है। इसमें उरण के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट का बंदरगाह भी शामिल है। अभी इन 11 बंदरगाहों में देश के मेजर पोर्ट ऐक्ट 1963 के अनुसार ट्रस्ट के तहत कामकाज चलता है। पर अब जल्द ही इस नियम में बदलाव लाने की योजना है। नए नियम के तहत इन बंदरगाहों का प्रशासनिक कामकाज ट्रस्ट के बदले कॉपोर्रेशन के तहत चलाया जाएगा। बंदरगाह के अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कॉर्पोरेशन बन जाने के बाद चेयरमैन का पद व्यवस्थापकीय संचालक में बदल जाएगा। इसी के साथ इस बंदरगाह का नाम भी 'जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट' (जेएनपीटी) से बदल कर 'जवाहरलाल नेहरू कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (जेएनपीसीएल) हो जाएगा। नए नाम और अधिकार मिल जाने के बाद बंदरगाह को आवश्यक निधि इकट्ठा करने का भी अधिकार मिल जाएगा। सूत्रों के अनुसार इसी मार्च में जेएनपीटी की ट्रस्ट प्रशासन के तहत अंतिम बैठक लेने के बाद ट्रस्ट कमेटी को रद्द कर दिया जा सकता है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो अप्रैल से उरण स्थित देश के इस सबसे बड़े बंदरगाह को देश के पहले कॉर्पोरेशन के रूप में बदल दिया जाएगा। हालांकि, केंद सरकार के इस निर्णय का बंदरगाह मजदूरों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। अभी तक ट्रस्ट प्रशासन के तहत अपनी समस्याओं के निबटारे के लिए मजदूरों की तरफ से दो ट्रस्टियों की नियुक्ति की जाती थी जो सभी मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ते थे और ट्रस्ट की नियमित बैठकों में उनका पक्ष रखते थे। पर कॉर्पोरेशन व्यवस्था के तहत मजदूरों को अपनी तरफ से ट्रस्टी नियुक्त करने का अधिकार खत्म हो जाएगा। मजदूरों का प्रतिनिधित्व करने वाले वर्तमान ट्रस्टी भूषन पाटील का कहना है कि पोर्ट ट्रस्ट को कॉर्पोरेशन में बदलने की प्रक्रिया इसके निजीकरण के दिशा का पहला कदम है और सरकार काफी समय से इस प्रयास में लगी हुई है जिसका सभी मजदूरों ने हमेशा से विरोध किया है। उनका कहना है कि बंदरगाह को ट्रस्ट से कॉर्पोरेशन में बदलने से मजदूरों, स्थानीय निवासियों और परियोजनाग्रस्तों के हितों का भारी नुकसान होगा।

Tuesday, March 1, 2011

शरद पवार ने राज्य में सारे स्थानीय चुनावों को अकेले लड़ने की घोषणा

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने राज्य में सारे स्थानीय चुनावों को अकेले लड़ने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि अब आगे से राज्य में सभी महानगर पालिकाओं, नगर पालिकाओं, जिला परिषदों, पंचायत समितियों, तथा ग्राम-पंचायतों में हम किसी से भी चुनावी गठबंधन नहीं करेंगे। ये सभी चुनाव हम अकेले लड़ेंगे। शरद पवार वाशी के नवी मुंबई स्पोर्ट्स एसोसिएशन के भव्य मैदान में आयोजित एनसीपी की राज्य पंचायत राज परिषद-2011 के कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों के रिपोर्ट-कार्ड तैयार किए जा रहे हैं। इस परिषद में उप मुख्यमंत्री अजीत पवार, गृह मंत्री आर. आर. पाटिल, ग्राम विकास मंत्री जयंत पाटिल, एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष मधुकर पिचड, ठाणे के पालक मंत्री गणेश नाईक, रायगड के पालक मंत्री सुनील तटकरे, गोविंदराव आदिक, लक्ष्मण राव ढोबले, वसंत डावखरे और अन्य सदस्यों समेत बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Monday, February 28, 2011

धार्मिक स्थलों पर फिर से तोड़क कार्रवाई शुरू

महानगर में गैरकानूनी रूप से बनाए गएJustify Full धार्मिक स्थलों पर फिर से तोड़क कार्रवाई शुरू की गई है । इस महीने में कुल 729 धार्मिक स्थल तोड़े जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इससे पहले भी बीएमसी ने धार्मिक स्थलों पर तोड़क कार्रवाई की थी, जिसका भारी विरोध भी हुआ था, मगर कोर्ट का ऑर्डर होने से विरोध करने के लिए खुलकर सामने नहीं आ सके। बीएमसी ने तोड़क कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट दी थी, जिसमें उन्होंने बाकी के बचे धार्मिक स्थलों पर भी तोड़क कार्रवाई का वादा किया था। अब, फिर से बीएमसी तोड़क कार्रवाई पर निकल पड़ी है। वैसे, यह कार्रवाई वार्ड स्तर पर की जा रही है। डेप्युटी म्यूनिसिपल कमिश्नर (स्पेशल) राजेंद्र भोसले ने बताया कि गैरकानूनी रूप से बनाए गए धार्मिक स्थलों का आठ महीने सर्वे कराया था। नोटिस जारी कर उनके कागजात भी मांगे थे। यह तोड़क कार्रवाई वार्ड के असिस्टेंट इंजिनियर (मेनटेंनेंस डिपार्टमेंट) के लोग करेंगे, मगर जहां पर उन्हें हमारी जरूरत पड़ेगी, उनकी मदद करेंगे। सड़क, फुटपाथ जैसे स्थानों पर जहां कही भी गैरकानूनी धार्मिक स्थल बनाए गए हैं, उन्हें तोड़ा जाएगा। मार्च महीने में तोड़क कार्रवाई पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

Friday, February 25, 2011

घोटाले की जांच के लिए गठित संसद की जेपीसी में शिवसेना शामिल नहीं होगी।

टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए गठित संसद की जेपीसी में शिवसेना शामिल नहीं होगी। पार्टी सूत्रों ने दावा किया कि पार्टी इस 'गड़बड़ झाले' में पड़ना नहीं चाहती। पार्टी का तर्क ये है कि संसदीय जांच समिति को 2-जी घोटाले के साथ ही कॉमनवेल्थ घोटाले, आदर्श घोटाले जैसे दूसरे घोटालों की भी जांच करनी चाहिए। उनके अनुसार, सिर्फ 2-जी घोटाले की जांच से काम पूरा नहीं होगा। पार्टी सूत्रों ने इस मामले में शिवसेना ने महाराष्ट्र में अपने साथी दल बीजेपी की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगाया है। बताया जा रहा है कि शिवसेना नेता ये पूछ रहे हैं कि विपक्ष सिर्फ 2-जी घोटाले की जांच पर कैसे मान गया? इस मामले में उसके और सत्ता पक्ष के बीच क्या सेटेलमेंट हुआ? इस 'गड़बड़ झाले' में शिवसेना नहीं पड़ना चाहती। इसलिए शिवसेना जेपीसी से दूर ही रहेगी। हालांकि बीजेपी ये दावा कर रही है कि चूंकि शिवसेना के राज्यसभा सदस्य राजकुमार धूत के भाई वेणुगोपाल धूत से 2-जी घोटाले को पूछताछ हुई है, इसलिए वे जेपीसी में शामिल नहीं होना चाहती। दोनों पार्टियों ने अधिकारिक तौर पर किसी तरह की टीका-टिप्पणी नहीं की है। लोकसभा और राज्यसभा के 30 सदस्यीय संसदीय जांच समिति में बीजेपी को कुल छह स्थान मिले थे। इसमें लोकसभा के पांच सदस्यों में से एक स्थान शिवसेना को देने की पेशकश की गई थी। बीजेपी ने लोकसभा के लिए जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा और हरिन पाठक और राज्यसभा से एस.एस. अहलुवालिया और रविशंकर प्रसाद को सदस्य बनाया था। शिवसेना के इनकार के बाद इस जगह गोपीनाथ मुंडे को सदस्य बनाया गया है।

Tuesday, February 22, 2011

फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद के बरी होने ने उसकी जांच पर फिर नए सिरे से सवाल


26/11 मामले में अजमल कसाब को बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा सोमवार को फांसी की सजा की पुष्टि से भले ही मुंबई क्राइम ब्रांच अपनी पीठ थपथपाए , लेकिन इस केस में फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद के बरी होने ने उसकी जांच पर फिर नए सिरे से सवाल उठा दिए हैं। फहीम और सबाउद्दीन को निचली अदालत ने भी बरी कर दिया था। दो - दो अदालतों के एक जैसे फैसले के बाद अब यह एकदम साफ हो गया है कि 26/11 को मुंबई में जिन जगहों पर दस आतंकवादियों ने फिदायीन हमला किया था , उन जगहों की रेकी फहीम या सबाउद्दीन ने नहीं , बल्कि डेविड हेडली ने लश्कर के कई आकाओं और तहव्वुर राना के कहने पर की थी। 26/11 से पांच दिन पहले तक राना मुंबई में ही था। लेकिन जब 26/11 का मुकदमा शुरू हुआ , तो हेडली और राना की साजिश का किसी को सुराग ही नहीं था। इसलिए मुकदमे के शुरुआती दौर में मुंबई क्राइम ब्रांच की कहानी को सच माना जाता रहा। अक्टूबर 2009 में हेडली और राना जब अमेरिका में गिरफ्तार हुए , उसी के बाद से तमाम लोगों का शक बढ़ गया कि फहीम और सबाउद्दीन को इस केस में गलत फंसाया गया है। इसकी मूल वजह यह थी कि दोनों ही आरोपी 26/11 के दिन ही नहीं , उससे सात महीने पहले से यूपी की जेल में बंद थे। मुकदमे के दौरान अपनी बात साबित करने के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच नुरुद्दीन नामक गवाह की गवाही पर निर्भर रही , जिसने दावा किया कि फहीम ने जब नेपाल में सबाउद्दीन को नक्शा सौंपा , उस समय वह वहां मौजूद था। मुंबई क्राइम ब्रांच का दावा था कि ये नक्शे फहीम ने उस वक्त मुंबई की रेकी के दौरान बनाए थे , जब वह यूपी की जेल में बंद नहीं था। पर फैसले के दौरान अदालत ने कहा था कि पुलिस ने इस बात के कोई सबूत नहीं दिए कि नुरुद्दीन नेपाल गया था। मुंबई क्राइम ब्रांच ने फहीम द्वारा बनाया नक्शा पेश करते हुए कहा था कि यह नक्शा गिरगांव एनकाउंटर में मारे गए अबू इस्माइल की जेब से मिला था। लेकिन 26/11 का फैसला सुनाते वक्त जज तहिलियानी ने कहा था कि एनकाउंटर के बाद इस्माइल खून से लथपथ हो गया था। उसके कपड़े भी सन गए थे। लेकिन क्राइम ब्रांच ने जो नक्शा सबूत के तौर पर पेश किया , उसमें न तो कोई खून का निशान था और न ही वह कटा - फटा था। जिरह के दौरान बचाव पक्ष द्वारा यही मुद्दा हाई कोर्ट में भी उठाया गया।