Thursday, July 29, 2010
( MNS) की मांग महाराष्ट्र सरकार ने ठुकरा दी
( MNS) की मांग महाराष्ट्र सरकार ने ठुकरा दी
( MNS) की मांग महाराष्ट्र सरकार ने ठुकरा दी
( MNS) की मांग महाराष्ट्र सरकार ने ठुकरा दी
Monday, July 26, 2010
तेज बरसात से मुंबईकरों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया
पिछले दो दिनों से महानगर में जारी तेज बरसात से मुंबईकरों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। एक ओर लोकल ट्रेनों की सेवाओं पर असर पड़ा, तो दूसरी ओर बेस्ट की बसों को अपना मार्ग बदलना पड़ा। कस्तूरबा अस्पताल की बिल्डिंग का प्लास्टर गिरने से दो नर्सें घायल हो गईं। हवाई सेवाओं पर भी तेज बारिश का असर पड़ा। इस दौरान महानगर में कई जगहों पर दीवारें और पेड़ गिरने की खबरें हैं। विक्रोली में रेलवे कलवर्ट के जाम होने से आम आदमी को परेशानी झेलनी पड़ी। शनिवार को सबसे ज्यादा बारिश पूर्व उपनगर दर्ज की गई। देवनार में सबसे ज्यादा 120 एमएम और कुर्ला में 114 एमएम और मुलुंड में 104 एमएम बारिश दर्ज की गई। शहर विभाग में धारावी में 95 एमएम और वडाला में 89 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई जबकि पश्चिम उपनगर में कुल मिलाकर औसतन 65 एमएम बारिश हुई। सबसे ज्यादा बारिश बांदा में हुई जहां कुल 104 एमएम और बीकेसी में 83 एमएम बारिश दर्ज की गई। पानी निकासी के लिए 40 मोटर पंप चलाने पड़े। भगवती अस्पताल में दुर्घटना: आमतौर पर किसी तरह के हादसे होने पर लोगों को अस्पताल में उपचार के लिए लाया जाता है मगर शनिवार को तो भगवती अस्पताल के उस इमारत का प्लास्टर गिर पड़ा जिसे महज छह महीने पहले की काम किया गया था। इस घटना में 35 वर्षीय योजना कदम और 48 साल की मिनल नाईक घायल हो गई। मुलुंड में बिल्डिंग के दिवार गिरने का मामला सामने आया। दादर पूर्व में एक निर्माणधीन बिल्डिंग का कुछ हिस्सा गिर पड़ा। पानी जाम: तेज बरसात के कारण महानगर के अनेक इलाकों में पानी भर गया। हिंद माता, सायन रोड नंबर 24, कुर्ला स्टेशन रोड, पाइप रोड, आकाश गली, काजूपाड़ा, एलबीएस मार्ग व अन्य इलाकों में पानी भर गया। चेम्बूर में ठक्कर बप्पा कॉलोनी, कस्तूरबा सोसायटी में पानी भर गया। पानी निकासी के लिए महानगर के कुल 195 मोटर पंपों में से 30 पंप चलाने पड़े। लोकल गाडि़यां: तेज बारिश के कारण लोकल गाडि़यों पर भी असर पड़ा। हालांकि, रेल अधिकारियों दावा करते रहे कि उनकी गाडि़यां सही समय पर चलती रही कोई परेशानी नहीं हुई। पश्चिम रेल में कांदिवली और बोरिवली स्टेशनों के बीच पाइंट फेल हो गया जिससे एक आधे घंटे के लिए वह उस रूट का बंद भी करना पड़ा। इसका असल लोकल गाडि़यों पर पड़ा। हार्बर में चुना भट्टी रेल स्टेशन पर पानी भरने से लोकल सेवाओं पर असर पड़ा। मेन लाइन में विक्रोली रेल स्टेशन पर पानी भरने की समस्या जरूरी हुई। बसों के बदले गए रूट: तेज बरसात के कारण पानी भर जाने से हिंदमाता से गुजरने वाली बेस्ट की बसो का आवागमन दो बार रोकना पड़ा। सायन के रोड नंबर 24 पर पानी भर जाने से यातायात पर असर पड़ा। रेलवे कलवर्ट जाम, घरों में घुसा पानी: विक्रोली रेलवे स्टेशन पर रेलवे कलवर्ट जाम पड़ने से पश्चिम की ओर जमा पानी पूर्व की ओर निकासी नहीं हो पा रहा था जिससे स्टेशन के आसपास के इलाकों में चार फुट तक पानी भर गया। रेलवे स्टेशन के करीब बसी चालियों के 15 घरों में पानी घुस गया। भाडुंप एस वार्ड के सब-इंजिनियर सुनील सिंह व उनके सहयोगी मोटर पंप लगाकर पानी की निकासी का काम करते रहे। देर शाम एक तरफ पानी की निकासी होती रही, तो दूसरी ओर जाम कलवर्ट को साफ करने के लिए उसकी खोजबीन जारी रहा।
Thursday, July 22, 2010
साइन बोर्ड एक महीने के अंदर मराठी में
शिवसेना के एक विधायक ने मंगलवार को विधान परिषद में मांग की कि राज्य में सभी बैंकों को अपने साइन बोर्ड एक महीने के अंदर मराठी में लिखना चाहिए। दिवाकर राउते ने सदन में कहा, 'सभी बैंकों के नाम एक महीने के अंदर मराठी भाषा में लिखे जाने चाहिए। उनके नाम मराठी भाषा में अनूदित होने चाहिए, अन्यथा शिवसेना इसके खिलाफ प्रदर्शन करेगी।' वह राज्य सरकार द्वारा हाल में स्थापित मराठी विभाग पर चर्चा में भाग ले रहे थे। उन्होंने मांग की कि हाउसिंग निकाय म्हाडा द्वारा जारी फार्म भी मराठी भाषा में उपलब्ध किए जाने चाहिए।
Friday, July 16, 2010
मुंबई के आईवीएफ क्लिनिकों से कहा है कि वे उनके वाणिज्य दूतावासों से संपर्क किए बिना उनके नागरिकों को किराये की कोख की सुविधा न दें।
मुंबई समेत देश भर में धड़ल्ले से सरोगेसी का धंधा जोरों पर है, लेकिन न तो सरकार और न ही न्यायपालिका इस पर कोई लगाम कस सकी। जन्मे शिशु की नागरिकता को लेकर कई बार संबंधित देशों ने बवाल मचाया, कई बार एथिक्स पर भी सवाल उठे, लेकिन करोड़ों के चोखे धंधे पर जरा भी आंच न आई। हमने भले ही कोई कदम नहीं उठाया, लेकिन आठ यूरोपीय देशों ने शहर के इस तेजी से बढ़ते बिजनेस को रोकने की पहल की है। उन्होंने मुंबई के आईवीएफ क्लिनिकों से कहा है कि वे उनके वाणिज्य दूतावासों से संपर्क किए बिना उनके नागरिकों को किराये की कोख की सुविधा न दें। क्लिनिकों से कहा गया है कि वे इलाज से पहले विदेशी नागरिकों से अपने वाणिज्य दूतावासों से संपर्क करने को कहें। जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, चेक गणराज्य, इटली, नीदरलैंड, बेल्जियम और स्पेन ने मुंबई में दस से अधिक आईवीएफ केंद्रों को अधिसूचित किया है कि वे उनके देशों के नागरिकों को सरोगेसी इलाज की सुविधा न दें। वाणिज्य दूतावासों ने कहा है कि उनके देश में किराये पर कोख लेना अवैध है। मामला कितना गंभीर है, यह इस बात से ही समझा जा सकता है कि भारत में किराये की कोख का बाजार 1000 से लेकर 5000 करोड़ रुपये के बीच है। कई बार महिलाओं को परिवार या पति द्वारा मजबूर किए जाने के मामले भी सामने आए हैं। कुछ लाखों रुपयों के लालच में कई महिलाएं एक से अधिक बार भी कोख किराए पर देती पाई गई हैं। इसके अलावा, कई बार सरोगेट मदर को वायदे से कम रकम दिए जाने जैसे धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए। जिन क्लिनिकों को वाणिज्य दूतावासों का पत्र मिला है उनमें अधिकांश ने इस कदम का स्वागत किया है। प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. अंजलि मालपानी का कहना है, 'किराये की कोख को लेकर कई नैतिक मुद्दे अभी तक स्पष्ट नहीं हैं। लेकिन हमने एहतियात लेना शुरू कर दिया है कि नये शिशुओं को उनके देशों में समस्या का सामना न करना पड़े और डॉक्टरों को इस पहलू से वाकिफ होना चाहिए।' लीलावती और हीरानंदानी अस्पतालों के डॉक्टरों ने भी इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा यह पत्र हमारे भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण है। सरोगेसी के कानूनी विशेषज्ञ अमित खरकानिस के अनुसार भारत में इस बारे में एक ठोस कानून की तात्कालिक आवश्यकता है और केंद्र को युद्धस्तर पर इस मुद्दे को उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'आठ देशों द्वारा लिया गया निर्णय पूरी तरह शिशुओं के भविष्य के हित में है। भारत को भी सरोगेसी को इंडस्ट्री के रूप में अनुमति नहीं देनी चाहिए। लिहाजा नियमन की तात्कालिक जरूरत है।'
