बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ( एमएनएस) के अध्यक्ष राज ठाकरे को निचली अदालत से
मिली जमानत को खारिज करते हुए उन्हें 29 जून को कल्याण के रेलवे कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया। पिछले साल अक्टूबर में रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा देने आए उत्तर भारतीय छात्रों की एमएनएस कार्यकर्ताओं द्वारा पिटाई के मामले में कोर्ट ने यह आदेश दिया है। सरकारी वकील अमित देसाई ने बताया कि हाई कोर्ट ने कल्याण मैजिस्ट्रेट कोर्ट से राज ठाकरे को मिली जमानत और कल्याण सेशन कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि रेलवे पुलिस ने राज ठाकरे की कस्टडी मांगी है, इसलिए उन्हें 29 जून को रेलवे मैजिस्ट्रेट के सामने सरेंडर करना होगा। डोंबीवली में एमएनएस कार्यकर्ताओं की हिंसा के सिलसिले में कल्याण पुलिस ने राज के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद पिछले साल 22 अक्टूबर को राज को कल्याण मैजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया था। मैजिस्ट्रेट ने उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन जीआरपी ने कल्याण कोर्ट से उनकी कस्टडी मांगी, क्योंकि वह राज को रेलवे कोर्ट में पेश करना चाहती थी। मैजिस्ट्रेट ने जीआरपी को राज की ट्रांजिट कस्टडी दे दी थी। इस मामले में राज ने अग्रिम जमानत हासिल कर ली थी। राज्य सरकार और जीआरपी ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि राज पहले से ही गिरफ्तार थे, इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती थी। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए राज की अग्रिम जमानत खारिज कर दी और 29 जून या उससे पहले कल्याण कोर्ट में पेश होने को कहा।
Tuesday, June 16, 2009
राज ठाकरे को मिली जमानत और कल्याण सेशन कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया।
Monday, June 15, 2009
राज ने पार्टी फंड में नकद रकम देने की अपील की
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के चीफ राज ठाकरे ने रविवार को अपने जन्मदिन पर पार्टी कार्यकर्ताओं से गिफ्ट या फूल नहीं लिए। राज ने इनकी जगह पार्टी फंड में नकद रकम देने की अपील की। एमएनएस के वाइस प्रेजिडंट वागीश सारस्वत ने बताया, 'पार्टी ने समर्थकों से लिखित अपील की है कि वे महंगे गिफ्ट और फूल देने से बचें। इनके मद में खर्च होने वाली रकम वे नकद तौर पर पार्टी को दें। इसका उपयोग महाराष्ट्र विधानसभा के आने वाले चुनाव में किया जाएगा। यह अपील आधिकारिक है और आने वाली नकदी का पूरा हिसाब-किताब रखा जाएगा।' रविवार को कार्यकर्ता बड़े जोश से राज ठाकरे को जन्मदिन की बधाई देने दादर स्थित उनके निवास पर पहुंचे थे। समर्थकों ने राज को नकदी से भरे छोटे-बड़े लिफाफे सौंपे। उन्हें एक तालाबंद बक्से में रख दिया गया। नकदी की कोई न्यूनतम सीमा नहीं तय की गई है।
Thursday, June 11, 2009
शहर में बढ़ती वाहनों की भीड़ को देखते हुए बाहरी वाहनों का प्रवेश शहर में एक हफ्ते के लिए रोका जाए,
अगर शहर से बाहर की कारों का यहां की सड़कों पर आगमन कम हो जाए, तो मुम्बईकरों को जहां बढ़ते प्रदूषण से राहत मिलेगी, वहीं यहां ट्रैफिक जाम की समस्या भी कुछ हद तक कम हो जाएगी। इस बाबत बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को ग्रेटर मुम्बई महानगर पालिका (एमसीजीएम) को आदेश दिया है कि रजिस्ट्रेशन नंबरों के आधार पर बाहर से आने वाली कारों का शहर में प्रवेश एक हफ्ते के लिए रोका जाए, ताकि वी. एम. लाल कमेटी की रिपोर्ट की प्रायोगिक तौर पर जांच की जा सके। बॉम्बे इन्वाइरन्मंटल ऐक्शन ग्रुप (एनजीओ) द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश बिलाल नाजकी और वी. के. ताहिलरमानी की खंडपीठ ने शहर में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर यह फैसला सुनाया। इस फैसले के तहत शहर में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए एक हफ्ते का डेमो कराया जाएगा, यदि इससे कुछ फर्क पड़ा, तो आगे भी इसे लागू किया जा सकता है। इसके अलावा कोर्ट ने वी. एम. कमेटी के दूसरे सुझावों पर गौर फरमाने को कहा है, जिसमें बाहरी वाहनों की भीड़ पर नियंत्रण के लिए टैक्स में भी बढ़ोतरी किए जाने की वकालत की गई है। याचिका में एनजीओ ने बढ़ते प्रदूषण के लिए वाहनों की भीड़ को जिम्मेदार ठहराते हुए शहर की सड़कों पर प्राइवेट वाहनों (खासतौर पर बाहर की निजी कारों) के आगमन पर लगाम कसने की अपील की है। अपील में बी. एम. लाल कमेटी द्वारा सुझाए गए प्रस्ताव को भी रखा गया है, जिसमें कहा गया है कि शहर में बढ़ती वाहनों की भीड़ को देखते हुए बाहरी वाहनों का प्रवेश शहर में एक हफ्ते के लिए रोका जाए, ताकि प्रदूषण व जाम की समस्या का सही सही आंकलन हो सके। इस तहत उन कारों की संख्या पर प्रकाश डाला गया है, जो रोजाना शहर की सीमा में दाखिल होती हैं। हालांकि, एमसीजीएम ने उक्त प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, लेकिन बुधवार को हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद अब शहर की सड़कों पर ऐसे वाहनों की उपलब्धता पर गौर किया जाना सुनिश्चित है। उक्त सुझावों पर परीक्षण करने के बाद नतीजों से एमसीजीएम द्वारा दो हफ्तों के भीतर न्यायालय को अवगत करा दिया जाएगा। जस्टिस नाजकी ने कहा कि इस तरह के सुझावों पर प्रायोगिक तौर पर ही सही प्रयास अवश्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दस फीसदी लोगों की वजह से 90 फीसदी लोग क्यों प्रदूषण का सामना करें। एनजीओ के मुताबिक यहां महज दस से पंद्रह फीसदी लोग ही आवागमन के लिए कार या बाइक का इस्तेमाल करते हैं। गौरतलब है कि हाल ही में कोर्ट ने सरकार से कहा था कि प्राइवेट वाहनों पर निर्भरता घटाने के मामले में सरकार क्या कर रही है। एक अन्य सुझाव में वी. एम. लाल कमिटी ने कहा था कि बाहर से शहर में दाखिल होने वाले वाहनों की भीड़ पर नियंत्रण के लिए टैक्स में भी बढ़ोतरी किया जाना चाहिए। इस पर सरकारी वकील ने एतराज जताते हुए अपनी दलील में कहा था कि शहर के पांच इंट्री प्वाइंट पर टैक्स वसूली के लिए कॉर्परशन के पास इतनी बड़ी संख्या में मैन पॉवर मौजूद नहीं है।
Sunday, June 7, 2009
खुद अनीस ने एक टीवी चैनल को फोन कर कहा कि मैं जिंदा हूं।
दाऊद के भाई अनीस के मर्डर की जो खबर शुक्रवार को मीडिया में दिन भर सुर्खियों में रही, वह बाद में फर्जी निकली। खुद अनीस ने एक टीवी चैनल को फोन कर कहा कि मैं जिंदा हूं। अनीस के मर्डर को लेकर कैसे भ्रम पैदा हुआ, इसको लेकर एक दिलचस्प कहानी पता चली है। क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार दरअसल गुरुवार रात करीब साढ़े ग्यारह बजे कराची के क्लिफटन पार्क में गोलीबारी हुई। कुछ ही मिनट बाद पाकिस्तान के जियो चैनल ने यह खबर चला दी। जब भारत में कुछ टीवी चैनलों के लोगों ने इस खबर को देखा, तो उनके कान खड़े हो गए। चूंकि क्लिफटन पार्क एरिया में दाऊद, अनीस का घर है, इसलिए कुछ लोग मानकर बैठे कि निश्चित तौर पर यह गोलीबारी दाऊद के परिवार पर की गई है। कुछ लोगों ने इसके बाद मुम्बई में कुछ पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और बाद में देर रात और शुक्रवार दिन भर अनीस पर गोलीबारी की खबर चला दी। संयोग से जिस वक्त क्लिफटन पार्क एरिया में गोलियां चलीं, अनीस एक पार्टी में था और जमकर दारू पी रहा था। बाद में वह सो गया और शनिवार को दोपहर बाद ही उठा। इसके बाद उसने जब अपने मरने की खबर टीवी पर देखी, तो एक टीवी चैनल को फोन किया और दावा किया कि, भाई, मैं तो अभी जिंदा हूं।
Wednesday, June 3, 2009
पर-प्रातींयों के लिए है लो-कास्ट हाउसिंग , इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
एमएमआरडीए द्वारा विरार में लो-कास्ट हाउसिंग के मद्देनजर तैयार किए जाने वाले प्रॉजेक्ट का शिवसेना ने विरोध किया है और कहा है कि वो इस प्रॉजेक्ट को कभी पूरा नहीं होने देगी। पार्टी ने कहा है कि यह एक तरह से मुम्बई में परप्रांतीयों को भरने की सरकार की साजिश है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा है कि विरार में एक ईंट नहीं बनने देंगे। गौरतलब है कि एमएमआरडीए ने रेंटल हाउसिंग के तहत विरार में 43,000 फ्लैटों को बनाने के एक महत्वपूर्ण प्रॉजेक्ट को लांच किया है, जिसमें उसी को किराए पर रहने को मिलेगा, जिनके पास 15 साल का डोमिसाइल सर्टिफिकेट होगा। उद्धव ठाकरे ने कहा है कि अब तक मुम्बई में मराठी लोगों के अधिकारों को छीना जा रहा था, अब .कांग्रेस उन्हें वसई, विरार और ठाणे से भी उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित करना चाहती है... जो हम कभी नहीं होने देंगे।
Tuesday, June 2, 2009
काजमी को महाराष्ट्र सरकार मेहनताने के रूप में प्रतिदिन ढाई हजार रुपए देगी।
मुंबई हमलों के मुख्य आरोपी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब के वकील अब्बास काजमी को महाराष्ट्र सरकार मेहनताने के रूप में प्रतिदिन ढाई हजार रुपए देगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मामले की सुनवाई हर हफ्ते सोमवार से शुक्रवार तक पांच दिन होगी। कसाब का बचाव करने के लिए फीस के रूप में काजमी को हर हफ्ते 12, 500 रुपए और हर महीने 50 हजार रुपए का भुगतान किया जाएगा। कानूनन, यदि कोई आरोपी वकील पाने में असफल रहता है तो ऐसी स्थिति में राज्य के कानूनी सहायता प्रकोष्ठ से उसके बचाव के लिए एक वकील नियुक्त किया जाता है। आमतौर पर अदालत उस वकील को पूरे मामले के लिए 900 रुपए देती है। नतीजतन, ऐसे आरोपियों के बचाव के लिए वकील आगे नहीं आना चाहते। कसाब मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष अदालत ने वरिष्ठ वकील काजमी को बचाव पक्ष का वकील नियुक्त किया और महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध किया कि उन्हें तर्कसंगत भुगतान किया जाए। अदालत के इस अनुरोध के मद्देनजर सरकार ने काजमी को फीस के रूप में ढाई हजार रुपए रोज देना तय किया।
Saturday, May 30, 2009
नालों की सफाई का काम अधूरा, बी एम सी को झेलनी पड सकती है दिक्कतें
With the monsoons ready to lash Mumbai, many citizens are worried that they will again have to undergo the annual misery of wading through flooded homes and streets only because the BMC failed to clean up choked drains and nullahs. People feel helpless in trying to get the municipality to act and find themselves stonewalled by red tape. The answer may lie in the use of a little known but powerful provision of the Criminal Procedure Code (CrPC), under which a common man can knock on the doors of the local magistrate and get a judicial order asking the municipality to do its job. Section 133 of the CrPC empowers a magistrate to pass an order for "removal of nuisance''. Thus, if citizens of a locality believe that constant dumping of debris in a nearby nullah or an obstruction to a drain is going to result in flooding and loss, then they can approach a magistrate under this section to get the BMC to put an end to such a nuisance. "It is a powerful provision in hands of the people,'' said advocate Pradeep Havnur. "It can be used to force the BMC to take action,'' he added. Lawyers pointed out that by resorting to this provision, citizens will not have to approach the Bombay high court by filing a writ or a Public Interest Litigation (PIL) every time they want the BMC to clean up a drain. On receiving a complaint, the magistrate is likely to order a preliminary inquiry and ask the BMC to submit a report on the citizens' grievances. Thereafter, he can also pass a conditional order asking the BMC to clean up the choked drain or nullah. In a landmark case decided by the Supreme Court, the municipal corporation of Ratlam, a town in Madhya Pradesh, was ordered to construct drains and toilets, provide proper sanitation and hygiene after residents filed a complaint under section 133 of the CrPC that the stench in their vicinity was unbearable. Interestingly, the term `nuisance' is not capable of an exact definition under the law and broadly means an act or omission which causes injury, danger or annoyance to common public. Thus, recently actress Kunika Lal used section 133 of CrPC to take action against vehicles that were parked illegally in her locality and were cause of trouble for motorists and residents alike
Subscribe to:
Posts (Atom)
