Monday, November 2, 2015

नीतियों के क्रियान्वयन में दिक्कत -नई सरकार के साथ पूर्णतया सहयोग नहीं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने सूबे के नौकरशाहों पर नई सरकार के साथ पूर्णतया सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इन्हीं कारणों से नीतियों के क्रियान्वयन में दिक्कत आ रही है। उन्होंने रविवार को यहां "मीट द प्रेस" कार्यक्रम में कहा, "पिछले कुछ समय से सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन में नौकरशाह बाधा बने हैं।
ऐसे में सरकार ने 800 नौकरशाहों के खिलाफ कार्रवाई की। अब वे सरकार के साथ काम कर रहे हैं। सूबे के करीब 70 फीसद वरिष्ठ नौकरशाहों ने अब अपने कार्य करने के ढंग में सुधार किया है, जबकि शेष अब भी उपेक्षापूर्ण रवैया अपना रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि कनिष्ठ नौकरशाहों में स्थिति बेहतर से अब भी दूर है। गत एक वर्ष से भाजपा-शिवसेना सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में करीब 50 फीसद (नौकरशाह) दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। यही वजह है कि राज्य सरकार ने 800 नौकरशाहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। इसमें उनका निलंबन और 50 अधिकारियों को बर्खास्त करना भी शामिल है।

Sunday, November 1, 2015

जींस और टी-शर्ट पहनने पर एक व्यक्ति ने अपनी 21 वर्षीय पत्नी की हत्या

जींस और टी-शर्ट पहनने पर एक व्यक्ति ने अपनी 21 वर्षीय पत्नी की कथित तौर पर हत्या कर दी। पुलिस ने शनिवार को बताया कि आरोपी की पहचान 24 वर्षीय रंजीत निषाद के रूप में हुई है, जो फिलहाल फरार चल रहा है।

पुलिस ने पड़ोसियों के हवाले से कहा है कि पिछले कुछ दिनों से जींस और टी-शर्ट पहनने को लेकर व्यक्ति का अपनी पत्नी पूजा के साथ विवाद चल रहा था। आरोपी ने कथित तौर पर महिला पर हमला किया और उसकी हत्या कर दी। घर बंद कर दिया और फरार हो गया। स्वारगेट पुलिस मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश कर रही है।

Friday, October 30, 2015

इस्लामिक स्टेट में शामिल होने गए युवकों की मदद करने वाले श्‍ाख्‍स की पहचान

इस्लामिक स्टेट में शामिल होने गए मुंबई के कल्याण इलाके के रहने वाले युवकों की मदद करने वाले श्‍ाख्‍स की पहचान कर ली गई है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, फिलहाल फरार चल रहा यह शख्‍स अबू बकर सिद्दीकी है।
बताया जा रहा है कि मुंबई के कल्याण इलाके का ही रहने वाले सिद्दिकी ने ही आरिफ के इराक जाने तक का खर्च भी उठाया, जहां पहुंचने के बाद वह आईएस में शामिल हो गया था।
सिद्दीकी ने ही इराक तक जाने के लिए आरिफ के पासपोर्ट और अन्य यात्रा दस्तावेजों की व्यव्स्था कराई थी। गौरतलब है कि आरिफ माजिद अपने दोस्तों फहाद शेख, शहीम टांकी और अमन टंडेल के साथ पिछले साल मई में इराक चला गया था।
सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी माजिद को नवंबर 2014 में तुर्की से पकड़ कर ले आए थे। हालांकि, उसके दोस्त टांकी के बारे में खबर आई थी, वह अमेरिकी सेना के हमले में मारा गया है।

बताया जा रहा है कि अबू बकर सिद्दीकी ने अफगानिस्तान के कारोबारी रहमान दौलती के जरिए माजिद और अन्य के यात्रा दस्तावेजों की व्यवस्था कराई थी। दौलती खुद दिसंबर में भारत छोड़कर चला गया था, जबकि सिद्दीकी के यात्रा दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।

Wednesday, October 28, 2015

छोटा राजन की सुरक्षा सरकार के लिए सिरदर्द

छोटा राजन की इंडोनिशिया में गिरफ्तारी के बाद बेहतर राजनयिक संबंधों के सहारे उसे वहां से देश निकाला दिलवाकर (डिपोर्ट) भारत लाना प्रत्यर्पण की तुलना में फायदे का सौदा हो सकता है। विदेश में रह रहे किसी भारतीय आरोपी को स्वदेश लाने के दो तरीके हो सकते हैं।
पहला कानूनी तौर पर उसे प्रत्यर्पित करवाकर (एक्स्ट्राडिशन) लाया जाए। दूसरा वह देश उसे गिरफ्तार कर उसे निर्वासित (डिपोर्ट) कर दे और भारतीय एजेंसी उसे यहां के हवाई अड्डे पर उतरते ही गिरफ्तार कर ले। प्रख्यात वकील उज्जवल निकम कहते हैं कि यदि निर्वासित करने वाले देश के साथ भारत के अच्छे संबंध हों, तो प्रत्यर्पण की तुलना में निर्वासन ज्यादा कारगर रहता है।
प्रत्यर्पण में एक तो लंबी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। दूसरे भारत लाए जाने पर भी आरोपी को सजा देने में प्रत्यर्पण करनेवाले देश के कानून का ध्यान रखना पड़ता है। निर्वासन के मामले अपेक्षाकृत आसान होते हैं। दो देशों के बीच अच्छे संबंधों के आधार पर यह काम त्वरित गति से हो सकता है। साथ ही, मुकदमा चलाकर आरोपी को भारतीय कानून के अनुसार सजा दिलाई जा सकती है।
संभवतः यही कारण रहा होगा कि तीन देशों के संयुक्त ऑपरेशन में भारत ने राजन को ऑस्ट्रेलिया से प्रत्यर्पित करवाने के बजाय इंडोनेशिया से निर्वासित करवाना ज्यादा बेहतर समझा। ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है, जबकि इंडोनेशिया के साथ नहीं है। लेकिन इंडोनेशिया के साथ भारत के राजनयिक संबंध अच्छे हैं।
प्रत्यर्पण के दो मामलों में भारत सरकार पहले गच्चा खा चुकी है। गुलशन कुमार हत्याकांड का आरोपी संगीतकार नदीम इस मामले में अपना नाम आते ही लंदन भाग गया था। इंग्लैंड के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है। लेकिन सितंबर 1999 में लंदन की एक अदालत ने यह मानने से ही इन्कार कर दिया कि नदीम के खिलाफ पहली नजर में कोई मामला बनता भी है।
फिर भारत सरकार इस मामले को वहां के उच्च न्यायालय में ले गई। वहां भी उसे मुंह की खानी पड़ी। 18 मार्च, 2001 को वहां की सर्वोच्च अदालत हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने भी उच्च न्यायालय के फैसले पर मुहर लगाकर नदीम के प्रत्यर्पण पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया।
प्रत्यर्पण का दूसरा चर्चित मामला अबू सलेम का है। उसे पुर्तगाल से प्रत्यर्पित करके लाया गया है। लेकिन इस प्रत्यर्पण के साथ बहुत सी कानूनी बाध्यताएं भी जुड़ गई हैं। इसलिए कई हत्याओं के आरोप में शामिल सलेम को भारतीय कानून के मुताबिक मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता।
सिरदर्द बनेगी छोटा राजन की सुरक्षा
भारत लाए जाने के बाद छोटा राजन की सुरक्षा सरकार के लिए सिरदर्द होगी। छोटा राजन का ज्यादातर आपराधिक रिकॉर्ड मुंबई का है। लिहाजा उसे मुंबई के ही किसी जेल में रखा जाएगा, ताकि करीब 67 मामलों में पूछताछ करके उस पर यहीं मुकदमा चलाया जा सके।
लेकिन वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम मानते हैं कि उसकी सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र सरकार को विशेष बंदोबस्त करना पड़ेगा। सुरक्षा मानकों के हिसाब से यह बंदोबस्त 26/11 के गुनहगार अजमल कसाब के बराबर या उससे भी ज्यादा हो सकता है।
महाराष्ट्र की जेलों में गैंगवार अथवा एक आरोपी द्वारा दूसरे पर हमला करने की घटनाएं अक्सर होती रही हैं। विचाराधीन कैदियों को रखने वाला मुंबई का आर्थर रोड जेल भी इससे अछूता नहीं है। जुलाई 2010 में इसी जेल में अबू सलेम पर दाऊद गिरोह के मुस्तफा दोसा उर्फ मुस्तफा मजनूं ने हमला कर दिया था।

सलेम के ही एक साथी मेहंदी हसन पर भी आर्थर रोड जेल में हमला हो चुका है। नासिक और ठाणे जेल भी गैंगवार से अछूते नहीं हैं। सरकार को अदालती सुनवाई के लिए भी विशेष बंदोबस्त करना पड़ सकता है। ऐसी व्यवस्था कसाब के लिए आर्थर रोड जेल में की गई थी।

Monday, October 26, 2015

अकबरुद्दीन ओवैसी पुणे में भी रैली नहीं कर सकेंगे

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईइएम) नेता अकबरुद्दीन ओवैसी पुणे में भी रैली नहीं कर सकेंगे। ओवैसी की यहां 26 अक्टूबर को रैली होना प्रस्तावित था, लेकिन कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते पुलिस ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी। इससे पहले कल्याण और भिवंडी में भी उन्हें रैली की मंजूरी नहीं मिली थी।
भड़काऊ भाषण देने के कारण अकबरुद्दीन ओवैसी के खिलाफ हाल ही में बिहार चुनाव प्रचार के दौरान मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने इसी को ध्यान में लेते हुए ओवैसी को रैली की अनुमति नहीं दी है। आगामी एक नवंबर को होने वाले कोंढवा उपचुनाव में एआईएमआईएम उम्मीदवार मजहर मणियार के चुनाव के प्रचार के लिए ओवैसी की रैली का आयोजन किया गया था।

पुलिस ने आयोजकों से यह कहते हुए रैली की मंजूरी नहीं दी कि ओवैसी के भाषण से शहर में सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है। रैली की इजाजत नहीं मिलने पर पुणे एआईएमआईएम के नेता अजहर तंबोली ने इसे चुनाव प्रचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया है।

Friday, October 23, 2015

दालों की जमाखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

महाराष्ट्र के ठाणे में पुलिस और राज्य के आपूर्ति विभाग ने दालों की जमाखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। यहां कई गोदामों पर छापा मारकर 125 करोड़ रुपए मूल्य से भी अधिक की दालें बरामद की हैं। ठाणे आयुक्त कार्यालय के जनसंपर्क अधिकारी गजानन कबदुले ने बताया कि एक संयुक्त अभियान में रायगढ़ इलाके में स्थित पांच गोदामों पर छापे मारे गए।
वहां से तूवर, सफेद चना, उड़द और मसूर समेत भारी मात्रा में दालों का भंडार जब्त किया गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इन दालों की कीमत करीब 125 करोड़ रुपए आंकी गई है। उन्होंने बताया कि जो दालें बरामद कर जब्त की गई हैं उनकी सही मात्रा का भी आकलन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि गोदामों को सील करने और उनके मालिकों को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि संयुक्त दल ने चामुंडा गोदाम से 7.75 करोड़ रुपए, लक्ष्मी गोदाम से 45.20 करोड़ रुपए और त्रिमूर्ति गोदाम से 40.94 करोड़ रुपए मूल्य का माल जब्त किया। इसके साथ ही आरपी वेयरहाउस से 25.04 करोड़ रुपए और एसडी वेयरहाउस से 3.55 करोड़ रुपए की दालें जब्त की गईं।

आरोपी गोदाम मालिकों के खिलाफ अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि दो-तीन दिनों में दालों की कीमतें कम होंगी। आयातित दाल बाजार तक पहुंचने लगी है। साथ ही 10 राज्यों में जमाखोरों के खिलाफ छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है।

Tuesday, October 20, 2015

महिलाओं का प्रवेश इस्लाम में 'गंभीर गुनाह'

प्रसिद्ध हाजी अली दरगाह के न्यासियों ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि एक पुरुष संत की दरगाह के बहुत करीब महिलाओं का प्रवेश इस्लाम में 'गंभीर गुनाह' है। महिलाओं के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इससे पहले दरगाह के न्यासियों से अपने उस नियम पर फिर से विचार करने के लिए कहा था, जिसके तहत गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है। आपको बता दें कि इस जगह पर 15वीं सदी के सूफी संत हाजी अली की कब्र बनी है।
जस्टिस वीएम कनाडे की अध्यक्षता वाली पीठ को न्यास ने सोमवार को एक पत्र दिया, जिसमें कहा गया है कि अदालत के आदेश को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में हाल में एक बैठक हुई। इस बैठक में न्यासियों ने फिर से सर्वसम्मति से फैसला किया कि गर्भगृह में महिलाओं को जाने की अनुमति नहीं दी जाए।
पत्र में बताया गया है कि सभी न्यासी इस मुद्दे पर एकमत हैं कि पुरुष मुस्लिम संत की मजार के बहुत निकट महिलाओं का प्रवेश इस्लाम के अनुसार 'गंभीर गुनाह' है और यह संवैधानिक कानून और खासकर संविधान के अनुच्छेद 26 से संचालित होता है जो न्यास को अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन का मौलिक अधिकार देता है। इस मसले पर किसी तीसरे पक्ष का इस तरह का हस्तक्षेप अनुचित है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होनी है।

हाजी अली दरगाह में कुली, फिजा समेत कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। इतना ही नहीं, यहां पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर, बॉलीवुड स्टार संजय दत्त, इमरान हाशमी, तुषार कपूर समेत कई एक्टर्स व एक्ट्रेसेज अकसर आते हैं।