Friday, March 6, 2015

विराट कोहली को बाकी मैचों के लिए बैन

वर्ल्ड कप में अच्छा प्रदर्शन कर रही भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। वाइस कैप्टन विराट कोहली को बाकी मैचों के लिए बैन कर दिया गया है। बीसीसीआई ने अधिकारिक बयान जारी करके कहा है कि कोहली ने टीम के नियम तोड़े हैं। वह टीम का साथ छोड़कर ऑस्ट्रेलिया में अपनी फ्रेंड के साथ घूम रहे थे। सूत्रों का कहना है कि बॉलिवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा इस वक्त विराट के साथ ही हैं।
टीम के मैनेजर रवि शास्त्री का कहना है कि आज वेस्ट इंडीज के साथ हो रहे मैच में विराट खेलेंगे, लेकिन आगे के मैचों में हमें उनकी कमी खलेगी। टीम के दूसरे लड़के अनुशासन में रहें, इसलिए विराट के खिलाफ लिया गया ऐक्शन बिल्कुल ठीक है। वर्ल्ड कैप के बाकी के मैचों के लिए सुरेश रैना को वाइस कैप्टन बनाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, विराट पिछले दो दिनों से टीम के साथ नहीं थे। हंगामा तब शुरू हुआ जब कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी ने क्रिस गेल से निपटने की रणनीति बनाने के लिए अहम मीटिंग बुलाई। विराट इस मीटिंग में भी नहीं दिखे। धोनी ने इस बात की शिकायत शास्त्री से की। इस बीच ऑस्ट्रेलिया की मीडिया में वे तस्वीरें भी सामने आ गईं जिसमें विराट और अनुष्का साथ में दिख रहे थे। बीसीसीआई ने फौरन ऐक्शन लेते हुए विराट को आगे के मैचों में खेलने से बैन कर दिया।
इससे पहले इंग्लैंड टूर पर भी अनुष्का विराट के साथ थीं। उस समय विराट कोई बड़ा स्कोर नहीं कर पा रहे थे और इसे लेकर उन्हें काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी थी। हालांकि इसके बाद ही वह फॉर्म में वापस आ गए थे। अटकलें लगाई जा रही हैं कि तीन दिन पहले उन्होंने भारत के एक पत्रकार के साथ भी गलत बर्ताव किया। पत्रकार ने विराट से अनुष्का के बारे में कोई सवाल किया था। विराट ने इस पूरे घटनाक्रम के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
विराट पर बैन के मामले में धोनी ने कहा कि हम विराट को मिस करेंगे। हालांकि टीम के सभी बैट्समैन अच्छे फॉर्म में हैं। इस मामले में कुछ पूर्व क्रिकेटर विराट के साथ हैं। सुनील गावस्कर ने कहा कि विराट बेशक किसी के साथ भी घूम सकते हैं, लेकिन उन्हें इस बारे में टीम मैनेजमेंट को बताना चाहिए था। उम्मीद है कि कुछ मैचों पर बैन के बाद बीसीसीआई उन्हें दोबारा खेलने की इजाजत दे देगी। (बुरा ना मानो होली है)

Wednesday, March 4, 2015

आश्चर्य की अनुभूति

किसी की कोई चीज चोरी हो जाए और चोर उसकी कुछ चीज वापस दे दे तो यह सभी के लिए आश्चर्य की ही बात होगी। ठाणे निवासी अखिलेश पांडेय और उनके परिवार को कुछ ऐसे ही आश्चर्य की अनुभूति हुई है।
अखिलेश की पत्नी सोनम पांडेय का 4 जनवरी को इलाहाबाद से मुंबई आने वाली दूरंतो एक्सप्रेस में हैंड बैग चोरी हो गया था। उसमें सवा लाख रुपये का मंगलसूत्र, 8000 का मोबाइल, चांदी का ग्लास, अखिलेश का पर्स, जिसमें साढ़े तीन हजार रुपये सहित ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, कई डेबिट और क्रेडिट कार्ड रखे हुए थे।

अखिलेश ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी लेकिन खोया सामान मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी। कुछ दिन पहले अखिलेश को पोस्ट से एक लिफाफा मिला, जिसमे उनका पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस था। हैंड बैग इगतपुरी में चोरी हुआ था और अखिलेश के घर पहुंचा लिफाफा इगतपुरी पोस्ट ऑफिस से भेजा गया है।
अखिलेश का कहना है कि चोर ने आधी ईमानदारी दिखाई। गहने और नकदी उसने रख लिए और पैन कार्ड एवं ड्राइविंग लाइसेंस भेज दिया। अखिलेश ने इस लिफाफे को इगतपुरी रेलवे पुलिस को सौंप दिया है। इसके आधार पर पुलिस आगे की छानबीन में जुटी है।

Monday, March 2, 2015

टैक्स में और अधिक बढ़ोतरी किए जाने की संभावना

बीएमसी सदन में गुरुवार को बेस्ट परिवहन विभाग की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए 'प्रॉपर्टी टैक्स में ही परिवहन उपकर' नामक नया टैक्स लागू करने की मंजूरी दे दी गई। बीएमसी प्रशासन ने हाल ही में बेस्ट के किराए में बढ़ोतरी करने की मंजूरी दी थी। इसके बाद अब 'प्रॉपर्टी टैक्स' में परिवहन उपकर शामिल करने की मंजूरी दी है। इस तरह बीएमसी ने एक बार फिर से मुंबईकरों की जेब पर डाका डालने की तैयारी कर ली है। अब इस प्रस्ताव को जल्द ही राज्य सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इससे मुंबईकरों पर जल्द ही नए टैक्स परिवहन उपकर का बोझ लादे जाने की संभावना जताई जा रही है।
विरोधी पक्ष नेता देवेंद्र आंबेरकर ने बताया कि जब सदन में मेयर स्नेहल आंबेकर इस प्रस्ताव को मंजूर करने की घोषणा कर रही थीं, तब बाहर एलईडी लाइटों को लेकर जोरदार हंगामा हो रहा था। हंगामे का फायदा उठाकर मेयर ने चुपचाप प्रस्ताव मंजूर कर दिया। सदन में बैठे नगरसेवकों को भी इस प्रस्ताव की मंजूरी का उस वक्त पता नहीं चल पाया। उन्होंने बीएमसी की इस मनमानी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की बात कही।

बता दें कि किसी भी प्रस्ताव को मंजूर करने से पहले सदन में उस पर बड़ी चर्चा की जाती है। परंतु प्रॉपर्टी टैक्स में परिवहन उपकर को शामिल करने के लिए सदन में कोई भी चर्चा नहीं की गई। बीएमसी सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष के साथ-साथ सत्ताधारी बीजेपी को भी इस प्रस्ताव के मंजूर होने की भनक तक नहीं लगी।
बीएमसी सूत्रों के मुताबिक कर्ज के बोझ तले दबी बेस्ट ने परिवहन विभाग की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए बीएमसी द्वारा वसूले जाने वाले 3.25 पर्सेंट क्रूड ऑइल टैक्स में से 0.25 पर्सेंट बेस्ट विभाग को देने की मांग की थी। बेस्ट को इससे 225 करोड़ रुपये का फायदा होगा और प्रॉपर्टी टैक्स में 0.02 पर्सेंट की बढ़ोतरी के साथ बेस्ट को करीब 300 करोड़ रुपये का मुनाफा होगा। हालांकि आने वाले समय में 0.02 पर्सेंट प्रॉपर्टी टैक्स में और अधिक बढ़ोतरी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
बेस्ट परिवहन विभाग के नुकसान को पिछले दो सालों से बेस्ट बिजली ग्राहकों से टीडीएलआर (ट्रांसपोर्ट डिविजन लॉस रिकवरी) के जरिए वसूला जा रहा था। हाल ही में विद्युत नियामक आयोग ने इसे बंद करने का निर्देश दे दिया है, इसलिए साल 2016 में इसे बंद कर दिया जाएगा। परंतु बेस्ट ने टीडीएलआर के विकल्प को तलाशते हुए परिवहन उपकर लागू करने की तैयारी कर ली है।

Friday, February 27, 2015

बीजेपी को छोड़कर महाराष्ट्र का कोई भी राजनीतिक दल रेल बजट से खुश नहीं

बीजेपी को छोड़कर महाराष्ट्र का कोई भी राजनीतिक दल रेल बजट से खुश नहीं है।  इनका कहना है कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु से महाराष्ट्र को रेल बजट में बड़ी उम्मीदें थीं। मोदी की नजर में अच्छा बनने के लिए उन्होंने अपने ही राज्य की जनता की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया। कांग्रेस, एनसीपी जैसे विरोधी दलों से तो बजट का विरोध स्वाभाविक था, लेकिन केंद्र और राज्य दोनों जगह सत्ता में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिव सेना ने भी रेल बजट को निराशाजनक बताया है।
रेल बजट के विरोध में शिव सेना के नेताओं ने कुछ इस तरह दी प्रतिक्रिया...
'यह तो निराश करने वाला बजट है'
यह पूरी तरह से असंतुष्ट करने वाला बजट है। महीने भर पहले ही रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मुलाकात कर उन्हें मुंबई की उपनगरीय रेलों की समस्याओं के संदर्भ में अवगत कराया गया था, परंतु बजट में रेल मंत्री ने उपनगरीय रेल के लिए कोई घोषणा नहीं की है। इस रेल बजट से महाराष्ट्र और मुंबई को कुछ नहीं मिला है। रेल बजट में कई घोषणाएं की गई हैं, लेकिन रेल मंत्री ने यह नहीं बताया कि इन घोषणाओं को पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा? बजट ने हर किसी को अंधेरे में रखा है। प्लैटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाने के लिए 97 करोड़ रुपये की जरूरत है। इस काम को पूरा करने के लिए एक ही बार में धन आवंटित करना चाहिए था। लाइनों के दोहरीकरण और तिहरीकरण की बात कर रहे हैं, लेकिन वे किन लाइनों पर काम करेंगे इस बारे में रेल मंत्री ने सदन में कुछ बताया ही नहीं।
- गजानन कीर्तिकर, शिव सेना सांसद
यह बजट निराशाजनक और अपेक्षाओं को भंग करने वाला है। इस बजट में सिर्फ एक ही बात अच्छी है कि रेल मंत्री ने यात्रियों के लिए सुरक्षा और स्वच्छता को प्राथमिकता दी है।
- विनायक राऊत, शिव सेना सांसद
महाराष्ट्र के ग्रामीण भाग के लिए कोई योजना रेल बजट में नहीं है। इस रेल बजट से महाराष्ट्र के हिस्से में कुछ भी न आने से जनता निराश और नाराज है।
- शिवाजीराव आढलराव पाटील, शिव सेना सांसद
महाराष्ट्र के रहने वाले किसी व्यक्ति को 37 साल बाद रेल मंत्री बनाया गया। इससे राज्य के लोगों को एक उम्मीद बंध गई थी, लेकिन रेल मंत्री ने महाराष्ट्र के लोगों को निराश किया है। मोदी सरकार रेल किराया नहीं बढ़ाने पर अपनी पीठ थपथपा रही है, परंतु किराया तो उन्होंने जून में 14.2 पर्सेंट बढ़ा दिया था। पुणे-नाशिक, वर्धा-यवतमाल-नांदेड, कल्याण-अहमदनगर, मनमाड-इंदौर, बडनेरा-वाशिम, सहित अन्य मार्ग के बारे में रेल बजट में कोई घोषणा न होने से लोग निराश हुए हैं।
- माणिकराव ठाकरे, अध्यक्ष, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस
मोदी सरकार के पहले पूर्ण रेल बजट ने सभी को निराश किया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होने के कारण आस बंधी थी कि यात्री किराए और माल भाड़े में कमी आएगी। इसी सरकार ने आठ महीने पहले पेश किए गए अंतरिम बजट में पेट्रोल-डीजल की कीमतों का हवाला देकर किराए में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की थी। यूपी, बिहार के लोगों को आस थी कि रेल मंत्री नई गाड़ी देंगे और साप्ताहिक गाड़ियों को रोजाना करेंगे पर वहां भी निराशा ही हाथ लगी। इससे साबित हो गया है कि मोदी सरकार सिर्फ जुबानी खर्च करने में माहिर है।
- नसीम खान, पूर्व मंत्री, महाराष्ट्र
बीजेपी सरकार का यह रेल बजट पूर्ण रूप से निराश करने वाला बजट है। रेलवे को सबसे ज्यादा राजस्व महाराष्ट्र से मिलता है। देश भर में रेल से यात्रा करने वाले कुल यात्रियों की तुलना में महाराष्ट्र और मुंबई में ज्यादा रेल यात्री हैं। इसलिए महाराष्ट्र और मुंबई को अधिक सुविधाएं दिए जाने की जरूरत थी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु मुंबई की लोकल रेल की समस्याओं को जानते हैं, इसलिए मुंबई को इस बार पर्याप्त सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन बजट ने इन उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया है। रेल बजट में स्टेशनों और ट्रेनों को कंपनियों का नाम दिए जाने की बात कही गई है, यह फैसला उचित नहीं है। इससे शहरों की अपनी पहचान प्रभावित होगी। दरअसल यह बजट निजी कंपनियों के फायदे का और आम जनता की उपेक्षा का बजट है।
- छगन भुजबल, पूर्व मुख्यमंत्री महाराष्ट्र
समस्याओं का अध्ययन किए बिना ही सिर्फ घोषणाओं के दम पर बीजेपी सरकार चल रही है। चुनाव में अच्छे दिन की घोषणा करने वाली मोदी सरकार ने जनता को बुरे दिन दिखाने की शुरुआत रेल बजट से कर दी है। यह बजट कर्ज के दम पर रेल को चलाने वाला बजट है। रेल मंत्री खुद कोकण के हैं, वहां के लोगों का प्रभु पर भरोसा था, लेकिन उन्होंने भरोसा तोड़ने का काम किया है।
- नवाब मलिक, प्रवक्ता एनसीपी
रेल मंत्री सुरेश प्रभु का बजट भाषण तो उत्तम था, उनसे उम्मीद थी कि वे महाराष्ट्र पर कृपा करेंगे पर उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। कोकण और मुंबई के लोगों को उनसे बड़ी आस थी। कोकण के लोगों को रेलवे की नई सुविधा और साधन मिलेंगे। मुंबईकरों की प्रभु से अपेक्षा थी, भीड़ से उन्हें राहत मिलेगी पर उन्होंने निराश किया।
- बाला नांदगांवकर, एमएनएस नेता
रेल बजट के पक्ष में भी कई नेताओं ने दी प्रतिक्रिया...
'बजट रेलवे को मजबूत भविष्य देने वाला है'
यह रेल बजट देश को विकास की ओर ले जाने के दूरदृष्टिकोण को ध्यान में रखकर पेश किया गया है। बजट में मुंबई और महाराष्ट्र के लिए बहुत कुछ दिया है। एमयूटीपी-3 के अंतर्गत 11,500 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान किया है, राज्य की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। शिवसेना के लोगों ने शायद बजट को ध्यान से पढ़ा और सुना नहीं है। इसलिए वे बजट पर प्रतिकूल टिप्पणी कर रहे हैं।
- देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री महाराष्ट्र
रेल किराया नहीं बढ़ाया और कृषि उत्पादक के लिए अत्याधुनिक कार्गो की व्यवस्था करके रेल मंत्री ने किसानों को दिलासा दी है। सर्वे के बाद आवश्यक नई गाड़ियां शुरू करने की योजना बजट में शामिल की है। रेल को गति देने के लिए विविध प्रकार की आधुनिक तकनीक की बात कही है। मुंबई के लिए एमयूटीपी-3 शुरू करने से लोकल यात्रियों की परेशानियां कम होंगी।
- एकनाथ खडसे, राजस्व मंत्री
इस बजट में स्वच्छता, सुरक्षा और मौजूदा व्यवस्थाओं में सुधार पर जोर दिया गया है। बुजुर्गों को लोअर सीट, महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे, जनरल डिब्बों में मोबाइल चार्जिंग की सुविधा, जानकारी और शिकायतों के लिए मोबाइल एप और हेल्पलाइन नंबर जारी कर रेल मंत्री ने रेल यात्रियों की समस्याओं के समाधान और उनके लिए सुविधाएं जुटाने पर जोर दिया है।
- सुधीर मुनगंटीवार, वित्त मंत्री महाराष्ट्र
पिछले कई सालों से गलत निर्णयों के कारण पटरी से खिसक गई भारतीय रेल का किराया नहीं बढ़ाकर लोगों पर कोई आर्थिक बोझ रेल मंत्री ने नहीं पड़ने दिया है। देश की सामान्य जनता को ध्यान में रखकर रेल मंत्री ने बजट तैयार किया है। यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले इस पर ज्यादा ध्यान दिया है। रेल बजट को किसी भी राज्य को दृष्टि में रखकर नहीं बल्कि देश को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
- रावसाहेब दानवे पाटील, अध्यक्ष महाराष्ट्र बीजेपी
किराया नहीं बढ़ाकर रेल मंत्री ने आम जनता को राहत दी है। नौ मार्गों पर हाई स्पीड ट्रेन चलेगी। दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई मार्ग की गति बढ़ाने का निर्णय बेहतर है। महिला यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से निर्भय निधि व महिला डिब्बों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के फैसले का हम स्वागत करते हैं, परंतु महाराष्ट्र को जैसी आवश्यकता थी वैसा नहीं दिया गया।
- रामदास आठवले, सांसद व आरपीआई नेता
यह एक तारीफ के काबिल रेल बजट है। वर्तमान स्थितियों में इससे बेहतरीन बजट नहीं हो सकता था। बजट में जिस तरह से बिना किराया बढ़ाए यात्री सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। एक तरफ किराए के बोझ से राहत और दूसरी तरफ महिला और बुजुर्ग यात्रियों की सहूलियतों का ध्यान रखा गया है। कुल मिलाकर यह बजट परिपूर्ण रूप से रेल यात्रियों का राहत देने वाला बजट है।
-मनोभव त्रिपाठी, सदस्य, बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी

यह एक सकारात्मक बजट है और लोकलुभावन घोषणाओं से दूर रहने के लिए रेल मंत्री की सराहना की जानी चाहिए। रेल मंत्री ने यात्रियों पर बोझ डालने के बजाए वित्तिय अनुशासन और निजी क्षेत्र की भागीदारी के बल पर रेलवे के लिए संसाधन जुटाने की कोशिश की है। मुंबई के लिए एमयूटीपी -3 की घोषणा कर रेल मंत्री ने मुंबई का ख्याल रखा है।

Wednesday, February 25, 2015

मुंबई का महत्व कम नहीं

संतुलित विकास की अवधारणा को लागू करने के बावजूद देश के राजस्व योगदान में मुंबई का महत्व कम नहीं हुआ है। इस वित्तीय वर्ष में मुंबई से केंद्रीय उत्पाद शुल्क के रूप में 23,247 करोड़ रुपये और सर्विस टैक्स के रूप में 43,184 करोड़ रुपये एकत्र हुए हैं।
यह राजस्व देश के कुल उत्पाद शुल्क का 12 पर्सेंट और सर्विस टैक्स राजस्व के रूप में 1/3 हिस्सा है। यह जानकारी मंगलवार को 'सेंट्रल एक्साइज डे' पर आयोजित एक समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी।

यहां यह भी कहा गया कि मुंबई में पहले से दो सेंट्रल एक्साइज जोन हैं, सर्विस टैक्स का एक नया जोन बनाया गया है जिससे राजस्व में और बढ़ोतरी हो सकेगी।

Monday, February 23, 2015

महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बावजूद कुछ नहीं बदला

बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार पर शिवसेना ने ताजा हमला किया है। शिवसेना ने गोविंद पानसरे की हत्या पर सामना के ताजा संपादकीय में कहा है कि महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बावजूद कुछ नहीं बदला है ।
शिवसेना ने वामपंथी नेता गोविंद पानसरे के हत्यारों को पकड़ने में नाकामी पर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस सरकार का मजाक उड़ाया है। सीएम पर निशाना साधते हुए कहा शिवसेना ने पूछा है, 'नई सरकार के आने के साथ कुछ बदला है क्या? अगर कोई जानता है तो कृपया हमें बताए।' शिवसेना ने टोल टैक्स के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले पानसरे के हत्यारों को पकड़ने में नाकामी पर राज्य सरकार की खिल्ली उड़ाई।
कोल्हापुर में गोली लगने से जख्मी हुए पानसरे की शुक्रवार को मौत हो गई। शिवसेना ने कहा कि यह अंधविश्वास के विरोध में मुहिम छेड़ने वाले नरेंद्र दाभोलकर की हत्या की पुनरावृत्ति है। सामाना के संपादकीय के मुताबिक, 'मुख्यमंत्री और सरकार तो बदल गई है, लेकिन तंत्र वही है। लोग मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, क्योंकि वह राज्य के गृहमंत्री भी हैं।'
शिवसेना ने कहा, 'फडणवीस ने कहा कि यदि पुलिस अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करे तो वो हत्यारों को पकड़ सकती है।' इससे पता चलता है कि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है। शिवसेना की यह ताजा टिप्पणी बताती है कि दोनों दलों के गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

Friday, February 20, 2015

सरकार से नाराज , परंतु सरकार का साथ नहीं छोड़ेंगे

फडणवीस सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार का मामला अधर में लटक गया है। मार्च से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावना कम ही है। इससे नाराज सहयोगी दलों के तेवर बदल गए हैं। अब वे सरकार के खिलाफ बिगुल बजाने की तैयारी में हैं, जिसका नेतृत्व आरपीआई (आठवले) के प्रमुख रामदास आठवले कर रहे हैं। उन्होंने आगामी शनिवार को एमआईजी क्लब में सहयोगी दलों की विशेष बैठक बुलाई है।
बीती 7 फरवरी को बीजेपी सरकार के 100 दिन पूरे हो गए। नागपुर अधिवेशन से ठीक पहले बीजेपी सरकार में शिवसेना ने एंट्री दी। उससे पहले शिवसेना प्रमुख विरोधी दल थी। उस वक्त दोनों की सत्ताधारी दल की ओर से कहा गया था कि नागपुर अधिवेशन खत्म होने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। बीजेपी ने अपने सहयोगी दल राष्ट्रीय समाज पक्ष के अध्यक्ष महादेव जानकर, आरपीआई के रामदास आठवले, शेतकरी संगठन के राजू शेट्टी और शिव संग्राम के विनायक मेटे को आश्वासन दिया था कि उनकी पार्टी के लोगों को भी जल्द ही मंत्रिमंडल में शामिल करेंगे। बजट सत्र 9 मार्च से शुरू हो रहा है।
इस बीच शिवसेना-बीजेपी के बीच मनमुटाव काफी बढ़ गया। दोनों दलों के राज्यमंत्रियों ने एक-दूसरे पर कई तरह के आरोप लगाए। सरकार चलाने के लिए बीजेपी-शिवसेना ने मिलकर समन्वय समिति का गठन किया लेकिन उस समन्वय समिति में घटक दल को कोई स्थान नहीं दिया गया। यही बात सहयोगी दलों को अखर रही है। गुरुवार को आठवले ने बागी रुख दिखाया। समन्वय समिति में स्थान नहीं देने के मामले को सहयोगी दल अपने मान-सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। आठवले का कहना है कि सरकार बनाने में हम सभी सहयोगी दलों का योगदान रहा है, फिर भी सत्ता में हमें कोई स्थान नहीं दिया और न ही समन्वय समिति में रखा गया। आठवले ने बीजेपी को याद दिलाया कि मंत्रिमंडल में शामिल करने का वादा अब तक पूरा नहीं किया है।

मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलने से आठवले भले ही सरकार से नाराज हो, परंतु वे बीजेपी-शिवसेना सरकार का साथ नहीं छोड़ेंगे। उल्टे आठवले को बीजेपी-शिवसेना के बीच जारी विवाद सता रहा है। उन्होंने दोनों ही दलों से अपील की है कि वे अपने आपसी विवाद खत्म करें।