Friday, June 20, 2014

संगठन का मुखिया बदलने की तैयारी

महाराष्ट्र में कांग्रेस का चेहरा बदलने की कोशिशें जारी हैं। देशभर में जहां कांग्रेस को भारी पराजय का मुंह देखना पड़ा है, उन आठ से दस राज्यों में संगठन का मुखिया बदलने की तैयारी बताई जा रही है। यह परिवर्तन अगले सप्ताह तक होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इस क्रम में महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष पद से माणिकराव ठाकरे को भी हटाए जाने की चर्चा है। उनकी जगह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को महाराष्ट्र में पार्टी प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें कांग्रेस वर्तुलों में चल रही थीं।
दिल्ली में कांग्रेस नेताओं ए.के. एंटनी और अहमद पटेल ने एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की। पवार के निवास स्थान पर घंटे भर चली बातचीत में महाराष्ट्र में नेतृत्व परिवर्तन पर भी बातचीत होने की चर्चा है। इधर, महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री बदलने की भी अफवाहें पिछले कई दिनों से हवा में तैर रही हैं। इस सिलसिले में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का नाम उछाला जा रहा है।

Thursday, June 19, 2014

राज्यपाल पद से हटाए जाने के प्रयासों का विरोध

महाराष्ट्र के राज्यपाल के. शंकरनारायणन केंद्रीय गृह सचिव द्वारा संदेश दिए जाने से संभवत: प्रसन्न नहीं हैं, लेकिन 'उपयुक्त प्राधिकार' द्वारा कहे जाने की स्थिति में वह पद छोड़ने पर विचार कर सकते हैं।
राजभवन सूत्रों ने 82 वर्षीय शंकरनारायणन का हवाला देते हुए कहा, 'अगर कोई उपयुक्त प्राधिकार वाला व्यक्ति मुझे पद छोड़ने के लिए कहता है, तो मैं निश्चित रूप से इस पर विचार करूंगा।' उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने दो दिन पहले शंकरनारायणन से बात की थी।
सूत्रों ने कहा, 'केंद्रीय गृह सचिव ने 'पद छोड़ने के' संदेश के साथ दो दिन पहले राज्यपाल से बातचीत की। राज्यपाल ने कुछ मीडियाकर्मियों से बातचीत की और अपनी प्रतिक्रिया स्पष्ट की।'
शंकरनारायणन 22 जनवरी 2010 से महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। राष्ट्रपति द्वारा पांच साल का नया कार्यकाल प्रदान किए जाने के बाद उन्होंने दूसरी बार सात मई 2012 को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद की शपथ ली थी।
नरेंद्र मोदी सरकार ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में नियुक्त कुछ राज्यपालों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की है। कथित रूप से दबाव दिए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बी. एल. जोशी ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था।
 

Tuesday, June 17, 2014

डीवाईएसपी रैंक के 67 अधिकारियों के ट्रांसफर

राज्य सरकार ने सोमवार को एसीपी और डीवाईएसपी रैंक के 67 अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिए हैं। मुंबई के अलावा पुणे, नागपुर, नवी मुंबई और ठाणे में भी काफी स्थानांतरण हुए हैं।

जिन अधिकारियों को वापस मुंबई में पोस्टिंग मिली है, उनमें संजय कदम, अशोक कामथ, राजन घुले, शशिकांत भंडलकर, प्रशांत बगाडे, संजय रांगणेकर, प्रताप धरमशी के नाम प्रमुख हैं

Wednesday, June 11, 2014

महत्वपूर्ण फाइलें यहां से वहां और वहां से यहां घूमती रहती हैं

सरकार घोषणा पर घोषणा करती है, पर उन घोषणाओं को अमल में नहीं लाती। महत्वपूर्ण फाइलें यहां से वहां और वहां से यहां घूमती रहती हैं, पर काम नहीं होता, फैसले नहीं लिए जाते। इससे राज्य की सामान्य जनता हैरान है कि आखिर सरकार कर क्या रही है? सरकार का चेहरा साफ-सुथरा होने से ही काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को नकारात्मक छोड़ सकारात्मक निर्णय लेंगे होंगे, अन्यथा आने वाले दिन इस सरकार के लिए अच्छे नहीं होंगे। यह खरी-खरी कोई और नहीं, बल्कि सरकार के विधायक ही सरकार को सुना रहे थे। उनका साथ विरोधी पक्ष चटखारे लेकर दे रहा था।
मंगलवार को विधानसभा में पूरक मांगों पर चर्चा की शुरुआत बाबा सिद्दीकी ने की। कांग्रेस के विधायक ने चर्चा शुरू करते हुए अपनी ही सरकार को घेरा। उस वक्त मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण सदन में उपस्थित थे। बाबा ने सवाल उठाया कि सरकार का ऐसे ही कामकाज चलता रहा, तो निश्चित ही आने वाले दिन अच्छे नहीं होंगे। उन्होंने सरकार के निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठाया। पर्यावरण के नाम पर रोकी जा रही योजनाओं, गांवठान, एफएसआई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय नहीं लिए जाने की शिकायत की। बाबा ने मुंबई में महंगे होते घर का प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि मुंबई शहर में घर आम लोगों की पहुंच से बाहर चला गया है। मराठी माणुस को बाहर जाना पड़ रहा है। मराठी माणुस को बचाने की गुहार बाबा ने लगाई।
कांग्रेसी के सहयोगी दल एनसीपी के नेता नवाब मलिक ने भी सरकार को घेरने में कोई कमी नहीं रखी। मलिक ने कहा कि विधान भवन में घोषित की गई योजनाओं को तीन महीने के भीतर अमल में लाना चाहिए, किंतु 20-20 साल बीत जाने के बाद भी प्रशासन निर्णय नहीं लेता। अधिकारी सरकार की घोषणा की गई योजनाओं पर ध्यान ही नहीं देते। मुंबई महानगर में एमएमआरडीए के कई सारे प्रकल्प 10-10 साल से चल रहे हैं, पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। मुंबई मेट्रो-2 का भूमिपूजन किए चार-पांच साल हो गए, पर अब तक काम शुरू नहीं हुआ है। मलिक ने कहा कि सरकार का कामकाज ऐसे ही चलता रहा, तो आने वाले दिन अच्छे नहीं होंगे। इनके अलावा मुंबई के अमीन पटेल सहित राज्य के कई विधायकों ने सरकार को घेरा।
विरोधी पक्ष नेता एकनाथ खडसे ने मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण पर आरोप लगाया कि एक लाख करोड़ रुपये का घोटाला करने वालों को मुख्यमंत्री बचा रहे हैं। पिछले तीन साल में भ्रष्टाचार के 103 मामले मुख्यमंत्री के ध्यान में लाया गया। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी निकाली गई है, जिसके कागजात भी मुख्यमंत्री को दे दिए गए हैं, पर मुख्यमंत्री ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे सिद्ध होता है कि उन भ्रष्टाचारियों के ऊपर मुख्यमंत्री का हाथ है। खडसे ने कहा कि राज्य पर 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। और भी कर्ज लेने पर विभागों को पैसा नहीं मिल रहा है।
खडसे ने एक-एक कर सरकार के घोटाले और भ्रष्टाचार सदन में रखे। खडसे के साथ-साथ बीजेपी के प्रकाश मेहता, सरदार तारासिंह, मंगलप्रभात लोढ़ा के अलावा शिवसेना के सुभाष देसाई, एनसीपी के बाला नांदगांवकर सहित अन्य विधायकों ने भी सरकार की कमजोर नस पर हाथ रखा।

Wednesday, June 4, 2014

वर्ली स्थित कैंपा कोला निवासियों की आखिरी उम्मीद टूट गई

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज करने के बाद वर्ली स्थित कैंपा कोला निवासियों की आखिरी उम्मीद टूट गई। कोर्ट ने निवासियों को अपने फ्लैट्स खाली करने का आदेश दिया और बीएमसी द्वारा होनेवाली तोड़क कार्रवाई को भी कायम रखा है।
बीएमसी प्रशासन ने भी कैंपा कोला कंपाउंड के अवैध फ्लैट्स को तोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। बीएमसी निवासियों को घर खाली करने के लिए नोटिस भेजनेवाली है। अडिशनल म्यूनिसिपल कमिश्नर मोहन अड़तानी ने कहा, 'बीएमसी अधिनियम 488 के तहत निवासियों को फ्लैट्स खाली करने का आदेश दिया जाएगा। हमने निवासियों को घर खाली कर चाभियां सौंपने के लिए चार दिन का समय दिया था, लेकिन किसी ने भी चाभी नहीं दी।'
अड़तानी ने कहा, 'चूंकि कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया, इसलिए अवमानना के बारे में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया।' संभवत: अगले दो दिनों कार्रवाई शुरू कर देगी। इस बीच, तोड़क कार्रवाई के लिए बीएमसी की ओर से निकाले गए टेंडर को चौथी बार किसी ने भी नहीं भरा। अड़तानी ने बताया कि हम पुलिस सुरक्षा के लिए बात करेंगे। बीएमसी की ओर से तैयारी पूरी है और जिस दिन तोड़क कार्रवाई करनी होगी पुलिस को एक दिन पहले जानकारी दी जाएगी।

Friday, May 30, 2014

वोट बैंक उत्तर-भारतीय समाज से दूर - कांग्रेस

उत्तर-भारतीयों को वोट बैंक समझने वाली कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में जबर्दस्त धक्का लगा, फिर भी वह कुछ सीखने के लिए तैयार नहीं है। वह अपने वोट बैंक उत्तर-भारतीय समाज से दूर होती जा रही है। उत्तर-भारतीयों को कांग्रेस ने न तो सत्ता में स्थान दिया और नहीं संगठन में कोई पद। किसी महामंडल की सदस्यता और अध्यक्षता तक नहीं दी। कांग्रेस की इस बेरुखी से उत्तर-भारतीयों की निकटता बीजेपी और एनसीपी से बढ़ती जा रही है। मुंबई महानगर के अलावा नाशिक, पुणे, औरंगाबाद सहित राज्य के अन्य जिलों में उत्तर-भारतीय मतदाताओं का अच्छा-खासा प्रभाव है।
कांग्रेस की सत्ता जब-जब राज्य में आई तब-तब पार्टी ने किसी न किसी उत्तर-भारतीय को मंत्रिमंडल में स्थान दिया है, लेकिन 2004 के बाद किसी भी उत्तर-भारतीय को कांग्रेस ने मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी। कृपाशंकर सिंह के बाद किसी भी उत्तर-भारतीय को कांग्रेस ने कोई मंत्री पद नहीं दिया और न ही महामंडल में स्थान। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के संगठन से भी दूर कर दिया। भांडुप के जयप्रकाश सिंह अंतिम व्यक्ति थे जिन्हें महाराष्ट्र कांग्रेस में जगह मिली थी।
हालांकि, कांग्रेस के पदाधिकारी कहते हैं कि नसीम खान और सतीश चर्तुवेदी को कैबिनेट में लिया गया था, लेकिन चर्तुवेदी ने कभी अपने को उत्तर-भारतीय माना ही नहीं, क्योंकि वे मूलत: नागपुर के थे। वहीं, नसीम खान को पार्टी डबल सिमकार्ड के तौर पर उपयोग करती है। मुस्लिम की बात आती है, तो नसीम खान का नाम आगे करती है, और जब उत्तर-भारतीय का मसला आता है तब भी उन्हीं को आगे करती है।

Tuesday, May 27, 2014

6 सांसदों में से किसी को भी स्थान नहीं मिला



देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को केंद्र के कैबिनेट में हमेशा से ही विशेष स्थान मिलता रहा है, लेकिन मोदी सरकार में लोकसभा चुनाव में मुंबई से चुने गए 6 सांसदों में से किसी को भी स्थान नहीं मिला है। हां, मुंबई को अप्रत्यक्ष जगह जरूर मिली है। महाराष्ट्र को भी अच्छा प्रतिनिधित्व मिला है।