Friday, March 7, 2014

नवी मुंबई और ठाणे क्लस्टर मंजूरी पर मचा घमासान

राज्य सरकार द्वारा सिर्फ ठाणे व नवी मुंबई के लिए मंजूर किए गए क्लस्टर डिवेलपमेंट योजना की मंजूरी मिलते ही इसके समर्थन और विरोध में अभी से ही कई सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सबसे पहले तो यह कि मुख्यमंत्री द्वारा इसकी मंजूरी दिए जाने की घोषणा के बाद से ही इसका श्रेय लेने के लिए लगभग सभी राजनीतिक दलों में होड़ शुरू हो गई है। 
स्थानीय ग्रामीणों का विरोध
 
इस कड़ी में दूसरी बात यह है कि गांवठाण (ठाणे/नवी मुंबई शहर के बीच में आ चुके सैकड़ों साल पुराने सभी गांव) क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों में से अधिकांश ने इस योजना को सिरे से नकारना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि वे अपने बाप-दादा के पुराने घरों को छोड़कर इमारतों के फ्लैट में रहने के लिए किसी भी सूरत में नहीं जाएंगे। इन गांवों में आज भी सैकड़ों (या शायद हजारों) दर्जनों कमरों वाले खासे बड़े घर हैं तथा उनके घर के आगे-पीछे बने कंपाउंड में आज भी खासी खुली जगह बची हुई है।
 

5.50 लाख लोगों को मिलेगा लाभ 
सरकारी आकलन के अनुसार, इस क्लस्टर योजना से ठाणे व नवी मुंबई को मिलाकर करीब 5 लाख 50 हजार लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा। इसमें से नवी मुंबई क्षेत्र के करीब 20 हजार लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने वाला है। इस समय ये सभी नागरिक जर्जर हो चुकी पुरानी इमारतों में अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डाल कर रह रहे हैं। इसके तहत कम से कम 18 मीटर चौड़ी सड़क पर निम्नतम 4000 वर्गमीटर क्षेत्र पर क्लस्टर योजना को लागू किया जाने वाला है।
 
क्लस्टर योजना की खास विशेषताएं
 
* साल 2000 तक बनी सभी अवैध झोपड़ियों को भी विकसित करने की योजना इसमें शामिल है। इसी के साथ साल 2000 तक बने सभी अवैध निर्माणों, 30 साल से अधिक पुरानी उम्र की सभी वैध इमारतें व निर्माण, 30 साल से कम उम्र की सभी जर्जर इमारतें व झोपड़ों का पुनर्निर्माण इस क्लस्टर नागरी पुनर्निर्माण समूह योजना के तहत शामिल किया गया है।
 
* इस नागरी पुनर्निर्माण योजना के लिए 4.00 एफएसआई अथवा पुनर्वसन करने के क्षेत्र के दुगुने क्षेत्र में से जो भी अधिक होगा, उसका एफएसआई लाभ दिया जाने वाला है।
 
*
 निवासी पुनर्वसन हेतु निम्नतम 30 वर्गमीटर व व्यापारिक पुनर्वसन हेतु निम्नतम 16.70 वर्गमीटर क्षेत्र देयहोगा। इसी के साथ निवासी पुनर्वसन हेतु अगर किसी नागरिक का पुराना निवासी क्षेत्र 30 वर्गमीटर से अधिकजितना भी होगा , उतना ही क्षेत्र उन्हें नई विकास योजना में मिलेगा। 
*
 पुनर्वसन से पहले वैध इमारत में रहने वाले निवासी को नई इमारत में जहां मुफ्त में फ्लैट मिलेगा , वहींअवैध इमारतों में रहने वाले निवासी को नई इमारत में बाजार भाव की दर के अनुसार निम्नतम 25 फीसदी दरसे व 100 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र के घर के लिए बाजार भाव से घर मिलेगा। 
*
 पुनर्वसन के बाद के 15 वर्षों तक सभी लाभार्थी को अपने घर के बेचने पर प्रतिबंध रहेगा और अगर किसीकारण से ऐसा कोई करना भी चाहेगा तो अधिमूल्य भरना पडे़गा। 
*
 इस विकास योजना के तहत नए निर्माण हेतु 70 फीसदी भूभाग के मालिक को पूर्वनिर्देशित अवधि में प्रस्तावसादर करना होगा और इसके लिए आधारभूत अधिमूल्य के रुपये भरने के बाद कोऑपरेटिव हाउजिंग सोसायटीकी स्थापना द्वारा निर्माण किया जा सकेगा। तय समय में आवेदन मिलने के बाद स्थानीय मनपा प्रशासन खुलाटेंडर निकालकर डेवलपर ( बिल्डर ) की नियुक्ति करेगा। 
नवी
 मुंबई की स्थिति व क्लस्टर की विशेषताएं 
नवी
 मुंबई क्षेत्र में सिडको ने राज्य सरकार के मार्फत ठाणे जिले के ठाणे शहर तालुका व रायगड जिले के उरण वपनवेल तालुकों में स्थित 95 गांवों की निजी जमीन को अधिग्रहीत करके और उसे संपादित करके नवी मुंबई शहरका विकास किया है। पर इसमें इन सभी 95 गांवों के गांवठाण ( गाव क्षेत्र ) की जमीन का संपादन नहीं कियागया था। इन्हीं 95 गांवों के गांवठाण क्षेत्र ( मूल गांव क्षेत्र ) में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बीते तीन से चार दशकों मेंजैसे - जैसे उनका परिवार बढ़ता गया , उसके अनुसार वे बिना सिडको / मनपा की मंजूरी के करीब 20 हजार कीसंख्या में निर्माण अभी तक किया है। इसी 20 हजार निर्माण को वैध कराने के लिए नवी मुंबई शहरपरियोजनाग्रस्तों ने कई बार आंदोलन भी किए हैं। वैसे ये सभी निर्माण बिना किसी योजना के ' जैसा जहां मिला, वैसा निर्माण किया ' की हालात में बने हैं। इनमें कोई भी नियोजन नहीं है। अब क्लस्टर योजना के तहत इनक्षेत्रों में भी खुली जगह , चौड़ी सड़क , स्कूल , मैदान , गटर , शौचालय आदि की सुविधा मिल सकेगी। 
नवी
 मुंबई क्लस्टर की खास विशेषताएं 
*
 सिडको व नवी मुंबई मनपा के क्षेत्र में मिलेगा लाभ 
*
 निम्नतम 18 मीटर चौड़ी सड़क पर व निम्नतम 4000 वर्गमीटर भूखंड पर समूह विकास के लिए 4.00एफएसआई की सुविधा दी जाएगी। 
*
 नवी मुंबई और सिडको क्षेत्र के सभी परियोजनाग्रस्तों के सभी निर्माण पुनर्वसन के लिए पात्र और ग्राह्य समझेजाएंगे। 
*
 इसके तहत अगर समूह विकास हेतु भूखंड में एक या इससे अधिक इमारत उनकी वर्तमान मजबूती के आधारपर उसे ऐसे ही रखने की सहमति है , तो उसके 125 फीसदी तक के क्षेत्र में बिना उसे तोड़े उसे ऐसे ही रखाजाएगा। 
*
 नवी मुंबई क्षेत्र की 20 हजार इमारतों को मौजूदा स्थिति में वैध घोषित करना संभव नहीं है , इसलिए इनकेपुनर्निर्माण व पुनर्वसन से करीब 20 हजार परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। 
*
 गांवठाण क्षेत्रों का सीमांकन निश्चित कर पुर्निनर्माण योजना बनाई जाएगी। 
एक
 तरफ इस क्लस्टर योजना को लेकर सभी दलों में उत्साह है , तो इसके खिलाफ आवाज भी उठनी शुरू होगई है। ठाणे में जहां शिवसेना क्लस्टर के पक्ष में है ,वहीं नवी मुंबई में कई मुद्दों को लेकर आंशिक रूप से इसकेखिलाफ है। नवी मुंबई के संदर्भ में शिवसेना का कहना है कि यहां के गांवठाण क्षेत्र के स्थानीय ग्रामीणों की समस्याओं को पूरी तरह से सुने बिना और उसे दूर किए बिना क्लस्टर योजना को लागू करना ठीकनहीं होगा। फिलहाल तो नवी मुंबई में क्लस्टर योजना के तहत पहले पायलट प्रोजेक्ट कोपरखैरणे से शुरू करनेकी घोषणा भी कर दी गई है। शेष क्षेत्रों के लिए वहां के स्थानीय नागरिकों के ऊपर यह निर्भर है कि वे इसे किसरूप में स्वीकार करते हैं। 

Wednesday, March 5, 2014

आरक्षित टिकट पर कोई और नाम और गाड़ी पर कुछ और नाम

स्टेशन पर पहुंचने के बाद यात्री सबसे पहले प्लैटफॉर्म पर लगी गाड़ी को उसके नाम से पहचानता है, लेकिन आरक्षित टिकट पर कोई और नाम और गाड़ी पर कुछ और नाम लिखा हों, तो सोचिए कितनी कन्फ्यूजन होगी। सेंट्रल रेलवे पर हजारों यात्रियों को रोजाना इस 'कन्फ्यूजन' से रूबरू होना पड़ता है। 
दरअसल मुंबई से हावड़ा के लिए रोजाना शाम के वक्त एक घंटे के अंतराल में दो ट्रेनें निकलती हैं। ट्रेन क्रमांक 12809 (वाया-नागपुर) शाम 9:25 बजे और ट्रेन क्रमांक 12322 (वाया-इलाहाबाद) रात 9:25 बजे सीएसटी से निकलती है। इन दोनों ट्रेन से जाने वाले यात्रियों के आरक्षित टिकट पर ट्रेन का नाम 'हावड़ा मेल' प्रिंट किया रहता है, जबकि ट्रेन क्रमांक 12809 के सभी कोच पर 'मुंबई मेल' लिखा रहता है।
 
सिर्फ नाम की 'हावड़ा मेल'
 
जिस ट्रेन के नाम को लेकर इतनी कन्फ्यूजन हो रही है, उस ट्रेन क्रमांक 12322 में यात्रा करने वाले पैसेंजर्स की कन्फ्यूजन वेबसाइट पर नाम ढूंढने के साथ ही शुरू हो जाती है। रेलवे की ऑफिशल वेबसाइट पर इस ट्रेन का नाम 'कोलकाता मेल' है, जबकि टिकट पर 'हावड़ा मेल' प्रिंट किया जाता है।
 रेलवे की लापरवाही के शिकार प्रकाश कोठारी को 11 मई, 2013 को उनके आरक्षित टिकट पर ट्रेन के प्रकाशित नाम (हावड़ा मेल) के अनुसार यात्रा करनी थी। प्रकाश निर्धारित समय (8:35) से थोड़ा सा पहले प्लैटफॉर्म पर आ गए थे, लेकिन जिस ट्रेन में उन्हें जाना था उस पर 'मुंबई मेल' नाम देखकर वे ट्रेन में नहीं चढ़े। एक घंटे बाद जिस ट्रेन पर 'हावड़ा मेल' लिखा था उसमें प्रकाश सवार हुए, लेकिन अपनी आरक्षित सीट पर किसी अन्य यात्री से हुई बहस के बाद उन्हें सारा माजरा समझ में आया। किसी अन्य की नजर में प्रकाश बेवकूफ हो सकते हैं, लेकिन इसका मूल कारण रेलवे की लापरवाही ही है। 

Monday, March 3, 2014

रविवार को मुंबई एयरपोर्ट पर इमर्जेंसी लैंडिंग करने

दुबई से आ रही अमीरात एयरलाइन की फ्लाइट को रविवार को मुंबई एयरपोर्ट पर इमर्जेंसी लैंडिंग करने। इस एयरबस ए 330 विमान में 231 यात्री सवार थे। रविवार दोपहर 2.12 बजे फ्लाइट के एयरक्राफ्ट सिस्टम ने तकनीकी खामी के बारे में अलर्ट जारी किया, जिसके बाद पायलट ने मुंबई एयरपोर्ट से फुल इमर्जेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी।
अमीरात एयरवेज की यह फ्लाइट 506 दुबई से सुबह 9:25 बजे मुंबई के लिए रवाना हुई थी। फ्लाइट का मुंबई आगमन 1:55 बजे का था, जिसमें देर होने से इसके कमांडर ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर को संदिग्ध खामियों की सूचना दी। तुरंत हरकत में आए एटीसी ने इसे साधारण लैंडिंग की जगह फुल इमर्जेंसी लैंडिंग सुविधा दी। आनन-फानन में मुख्य रनवे (27-09) पर अग्नि शमन उपकरण और ऐम्बुलेंस तैनात किए गए।
सूत्रों के मुताबिक एयरक्राफ्ट को लैंड होने में कोई दिक्कत नहीं हुई, न ही इसके रनवे पर आने के बाद कोई खामी नजर आई, जिसके चलते दोपहर 2.20 बजे इमर्जेंसी अलर्ट रद किया गया। यात्रियों के सुरक्षित उतरने के बाद प्लेन को आइसोलेशन-वे में ले जाया गया, जहां इंजिनियर्स ने तकनीकी पहलुओं की जांच कर उसे अगले ऑपरेशन के लिए हरी झंडी दे दी।