Thursday, December 5, 2013

बीएमसी का दस्ता दल-बल के साथ बीआईटी चाल पहुंचा

ताडवाडी, मझगांव की बीआईटी चाल की चार इमारतों की बिजली और पानी मंगलवार को बीएमसी ने काट दी। कार्रवाई के दौरान स्थानीय निवासियों ने डटकर विरोध किया। उनका समर्थन स्थानीय नेताओं ने भी किया। किंतु बीएमसी और पुलिस के सामने उनकी एक नहीं चली। चार इमारतों में कुल 320 परिवार रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें हटाने का आदेश दिया है। 
मंगलवार को बीएमसी का दस्ता दल-बल के साथ बीआईटी चाल पहुंचा। इसकी भनक जैसे ही लोगों का लगी सभी लोग नीचे आ गए। शिवसेना के नेता व पूर्व नगरसेवक यशवंत जाधव व अन्य लोग भी पहुंच गए। लोग बीएमसी की कार्रवाई का विरोध करने लगे, लेकिन पहले से तैनात पुलिस के सामने विरोधकों की एक न चली। बीएमसी दस्ते ने पानी और बिजली कनेक्टशन काट दिए। 
ताडवाडी में बीआईटी चालें हैं। इनमें बिल्डिंग नंबर 13, 14, 15 और 16 जर्जर हो चुकी हैं। इन बिल्डिंगों को बीएमसी ने रहने के अयोग्य घोषित कर दिया है और सी-1 की श्रेणी में डाल दिया है। इन बिल्डिंगों में रहने वालों को बीएमसी ने ट्रांजिट कैंप और माहुल में घर मुहैया कराए हैं, लेकिन लोग वहां पर जाने के लिए तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि ट्रांजिट कैंप का घर बहुत ही छोटा है जबकि माहुल का मकान बहुत दूर है। 
सभी लोगों को रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है, फिर भी लोग यहां से जाने के लिए तैयार नहीं है। बिल्डिंग खतरनाक हो चुकी और सुप्रीम कोर्ट ने भी इन इमारतों को खाली कराने का आदेश दिया है, इसलिए पहले दौर में इन इमारतों की बिजली और पानी का कनेक्शन काटा है। 

Monday, November 18, 2013

बालासाहेब ठाकरे की पहली पुण्यतिथि पर लोगों का हुजूम

 दिवंगत शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की पहली पुण्यतिथि पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। रविवार की सुबह सात बजे से ही शिवाजी पार्क में बने 'स्मृति स्थल' के दर्शन व श्रद्धांजलि देनेवालों का तांता लग गया।
राजनीति, उद्योग जगत समेत तकरीबन सभी क्षेत्रों से लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए शिवसैनिक 'परत या, परत या बालासाहेब या' के नारे लगाकर अपने 'साहेब' की वंदना की।
बालासाहेब की पहली पुण्यतिथि पर शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पत्नी शर्मिला, बेटे आदित्य और तेजस ठाकरे के साथ पुष्पांजलि अर्पित की। वहीं, महाराष्ट्र के राज्यपाल के. शंकरनारायणन, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, उनकी पुत्री सुप्रिया सुले, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, गोपीनाथ मुंडे ने भी श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा पीडब्लूडी मंत्री छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल, बीजेपी नेता राजीव प्रताप रूडी, विधान परिषद में विपक्ष के नेता विनोद तावडे, वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत और बजाज ग्रुप के राहुल बजाज ने भी आदरांजलि दी।

Wednesday, November 13, 2013

नवी मुंबई - प्रस्तावित इंटरनैशनल एयरपोर्ट के निर्माण

नवी मुंबई के प्रस्तावित इंटरनैशनल एयरपोर्ट के निर्माण की राह में अब तक की सबसे बड़ी बाधा बने 'भू-अधिग्रहण विवाद' के हल हो जाने की खुशी में कई गांवों में दीवाली-सा जश्न है। इसका सबसे बड़ा कारण विदेशों में मिलने वाले आकर्षक पैकेज की तर्ज पर यहां के किसानों व भूमिहीनों को मिला देश का अब तक का सबसे बड़ा पैकेज है। सिडको को उम्मीद है कि अब 2017 तक किसी भी हाल में पहले चरण का निर्माण पूरा कर यहां से पहली उड़ान शुरू हो जाएगी।
नए इंटरनैशनल एयरपोर्ट से विस्थापित होने वाले ग्रामीणों के साथ मुआवजे, पुनर्वसन और अन्य लाभ की मांग को लेकर बीते 10 साल से सिर्फ बातें और बातें ही हो रही थी। एक वक्त ऐसा भी आया कि सभी को लगा कि 305 फीसदी तक महंगा हो चुका यह एयरपोर्ट सपना ही रह जाएगा और इसकी योजना कागजों पर ही सिमट जाएगी।

राज्य सरकार के इस अत्यंत महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट का 2002-03 में शुरुआती बजट करीब 4000 करोड़ रुपये का था। पर 10 सालों में यही बजट चार गुना बढ़कर अब 15000 से 16000 हजार करोड़ रुपये के करीब हो चुका है। अभी यह भी निश्चित नहीं है कि इतने बजट में ही सब काम हो जाएगा।
सितंबर में नीदरलैंड (डच) की 'नीदरलैंड्स एयरपोर्ट कंसल्टटेंट्स' कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक जोयेरी आलमैन ने महाराष्ट्र सरकार को यह सलाह दी थी कि महंगी जमीन के सौदे को देखते हुए जेएनपीटी (उरण) के पास के समुद्र में भराई कर 2500 हेक्टेयर जमीन का निर्माण कर नया इंटरनैशनल एयरपोर्ट बनाया जा सकता है।
परियोजनाग्रस्तों की अव्यवहारिक 35 फीसदी विकसित भूखंड समेत कई अन्य राहत की मांग से परेशान महाराष्ट्र सरकार ने इसे गंभीरता से लिया था। सूत्रों का कहना है कि इस समुद्री विकल्प के चलते ही परियोजनाग्रस्तों पर दबाव बढ़ा और अंततः राज्य सरकार से जो भी प्रस्ताव मिला, उसे मंजूर कर लिया। हालांकि जिस मुआवजे पर सहमति बनी है, वह पूरे देश में बेजोड़ और शानदार ही कही जाएगी।
नए हवाई अड्डे से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां एयरपोर्ट में लगने वाली कुल जमीन: 2268 हेक्टेयर सिडको के कब्जे वाली कुल जमीन: 1572 हेक्टेयर हस्तांतरण के इंतजार में बची सरकारी जमीन: 25 हेक्टेयर अभी तक संपादित जमीन: 1597 हेक्टेयर शेष बची असंपादित जमीन: 671 हेक्टेयर वैमानिक क्षेत्र की मुख्य जमीन: 1160 हेक्टेयर वैमानिक क्षेत्र में आने वाले 10 गावों की असंपादित जमीन: 292 हेक्टेयर प्रॉजेक्ट का शुरुआती मूल बजट: करीब 4000 करोड़ रुपये प्रॉजेक्ट का वर्त्तमान संभावित बजट: 15000 से 16000 करोड़ या इससे अधिक विस्थापित होने वाले गांव: तारघर, कोंबडभुजे, उलवे, गणेशपुरी, वाघिवली वाडा, अप्पर ओवले, कोल्ही, कोपर, चिंचपाडा व वाघिवली 3500 विस्थापित परिवारों के लिए विकल्प: पनवेल के पास दापोली गांव में बनेगा पुष्पक नगर पुष्पक नगर की रचना: 106 हेक्टेयर के विस्तृत भूखंड पर इंटरनैशनल स्टैंडर्ड व सुविधाओं वाला नगर पुष्पक नगर में होंगी ये सुविधाएं: कंक्रीट सड़कें, अत्याधुनिक हॉस्पिटल्स, शैक्षणिक संकुल, तीन व पांच सितारा होटेल्स, वाणिज्यिक व व्यवसायिक संकुल पुष्पक नगर का बजट: 850 करोड़ रुपये एयरपोर्ट की संभावित यात्री उड़ान क्षमता: पूरी तरह से बन जाने के बाद 60 मिलियन (छह करोड़) हवाई यात्री प्रति वर्ष। 

Thursday, November 7, 2013

उद्धव मुंबई में होने वाले सचिन के आखिरी मैच को देखने के लिए खुद मौजूद रहेंगे



'मास्टर ब्लास्टर' क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से वादा ले लिया है। वादा ये है कि उद्धव मुंबई में होने वाले सचिन के आखिरी मैच को देखने के लिए खुद मौजूद रहेंगे। सचिन अपना 200वां और जीवन का अंतिम टेस्ट मैच 14 से 18 नवंबर के बीच मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में खेलेंगे।
शिवसेना सूत्रों के अनुसार, उद्धन ने पहले ही मन बना लिया था कि वे सचिन का अंतिम मैच देखने नहीं आएंगे। मुंबई क्रिकेट असोसिएशन के चुनाव और पार्टी नेता मनोहर जोशी से नाराजगी के चलते क्रिकेट प्रेमी उद्धव ने यह ऐतिहासिक मैच घर पर ही देखने का निर्णय किया था। सचिन और उद्धव पिछले दिनों उद्यमी मुकेश अंबानी की पत्नी नीता के जन्मदिन के उपलक्ष्य में जोधपुर में साथ थे।
बताया जाता है कि यहीं सचिन आगे बढ़कर उद्धव के पास आए और हालचाल जानने की औपचारिकता के बाद अपने अंतिम मैच के बारे में पूछ लिया। सचिन ने सीधे बिना लागलपेट यह पूछ लिया कि क्या आप वानखेडे में मेरा आखिरी मैच देखने आ रहे हैं या नहीं। सूत्रों के अनुसार, सवाल इतना सीधा था कि उद्धव नकार नहीं पाए। सचिन के आग्रह पर उद्धव ने यह वादा किया कि वे मैच देखने के लिए जरूर आएंगे। सचिन ने इसके लिए उद्धव ठाकरे का आभार व्यक्त किया है।

Monday, November 4, 2013

सभी फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के परिवार

 शनिवार को भायखला में एक बड़ा हादसा टल गया। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों को दीवाली से पहले की शाम बेहद उठापटकवाली व खतरनाक रही। भायखला में स्थित फायर ब्रिगेड कमांडिंग सेंटर के पास बने स्टाफ क्वॉर्टर्स को जर्जर पाए जाने के बाद आनन-फानन में खाली करा दिया गया। डाकयॉर्ड रोड बिल्डिंग हादसे के बाद बीएमसी किसी तरह का कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है इसलिए जैसे ही बिल्डिंग के खंभे में मौजूद दरार के अधिक गहरा होने का पता चला निवासियों को बाहर निकाल लिया गया।
ई वॉर्ड के असिस्टेंट म्यूनिसिपल कमिश्नर संजोग कबरे ने बताया, 'दोपहर को एक कर्मचारी ने बिल्डिंग की पहली मंजिल के खंभे में दरार होने की जानकारी दी। इसके बाद बीएमसी के इंजिनियर्स ने वहां पहुंचकर जांच के बाद बिल्डिंग को खाली करा लिया गया।' यहां पांच-पांच मंजिला दो बिल्डिंग हैं, जिनमें कुल 64 परिवार रहते हैं और सभी फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के परिवार हैं। कबरे ने कहा, 'पूर्वी हिस्से की बिल्डिंग में दरार थी इसलिए उसमें रहनेवाले 32 परिवारों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया।' वहीं, दूसरी बिल्डिंग में रहनेवाले बाकी के 32 परिवारों को भी निकाला गया लेकिन बाद में जांच के बाद उन्हें रहने की इजाजत दी गई। कबरे ने बताया, 'बिल्डिंग की जांच के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिटर को जिम्मा सौंपा गया है। फिलहाल, निकाले गए 32 परिवारों को पास ही बनी कमांडिंग सेंटर की खाली बिल्डिंग में अस्थायी तौर पर रखा जाएगा।' फायर ब्रिगेड कंट्रोल रूम को किसी प्रकार की हानि नहीं हुई है। खबर लिखे जाने तक तक ऑडिट का काम चलता रहा।

Sunday, November 3, 2013

शुभकामनायें

आप सभी पाठकों को दीप पर्व की शुभकामनायें 

Thursday, October 31, 2013

समीकरण की नींव हिलती

 नई दिल्ली में 'थर्ड फ्रंट' सम्मेलन का राष्ट्रीय स्तर पर असर चाहे जितना सीमित दिखे, महाराष्ट्र में सत्ता के समीकरण की नींव हिलती नजर आ रही है। इस सम्मेलन में एनसीपी की मौजूदगी कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब हो सकती है। 1999 से दोनों पार्टियां राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर सत्ता में साझेदार हैं। एनसीपी के इस बदले तेवर से कांग्रेस में बेचैनी लाजमी है। इनके अलावा, रिपब्लिकन नेता प्रकाश आंबेडकर की शिरकत ने उसके पास उपलब्ध आगे के विकल्पों पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

आठवले भी नहीं, आंबेडकर भी गए: थर्ड फ्रंट के नाम पर महाराष्ट्र में सीपीआई, सीपीएम, जनता दल(यू), समाजवादी पार्टी और शेतकरी कामगार पार्टी का गठजोड़ होगा, यह तो काफी समय पहले तय हो चुका था। इसमें प्रकाश आंबेडकर का एकाएक शामिल होना कांग्रेस के लिए झटका माना जा रहा है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नाती हैं प्रकाश आंबेडकर। सैंकड़ों धड़ों में बंटे दलित पार्टियों में सिर्फ रामदास आठवले और आंबेडकर के ही घटक ऐसे हैं, जिनके संगठनों का असर राज्यभर में देखा जा सकता है।

शुरुआत से कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ते रहे आठवले कुछ वर्ष पहले इनका साथ छोड़कर विपक्षी शिवसेना-बीजेपी गठबंधन के साथ हो लिए हैं। तब से प्रदेश में कांग्रेस पार्टी लगातार यह संकेत देती रही है कि आंबेडकर उसके साथ आकर आठवले की कमी को पूरा कर देंगे। डेढ़ साल पहले तो महाराष्ट्र कांग्रेस ने बाकायदा यह घोषणा तक कर दी थी कि आंबेडकर जिला परिषद के चुनाव उसके साथ मिलकर लड़ेंगे। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में इसके लिए आयोजित प्रेस सम्मेलन में आंबेडकर पहुंचे ही नहीं।