Friday, May 20, 2011

वालकेश्वर में 16 इंच की एक पानी की पाइप लाइन फट गई।

वालकेश्वर में 16 इंच की एक पानी की पाइप लाइन फट गई। पाइप लाइन गुरुवार को सुबह वालकेश्वर में तीन बत्ती नाके पर फटी। पाइप लाइन फटने से हजारों लीटर पानी बरबाद हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही बीएमसी के हाइड्रोलिक डिपार्टमेंट के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए। हाइड्रोलिक डिपार्टमेंट के अनुसार पाइप लाइन मरम्मत का काम जारी है। गुरुवार रात तक यह ठीक कर ली जाएगी। पाइप लाइन फटने से राजभवन, वर्षा बंगला, पेडर रोड, मलाबार हिल आदि इलाकों में पानी की सप्लाई शाम के समय प्रभावित रही। हालांकि बीएमसी पहले ही मरोशी-रूपारेल टनल पर चल रहे काम की वजह से चार दिन तक पानी की कटौती कर रही है। इस पर पाइप फटने से इन इलाकों में पानी की समस्या बढ़ गई है।

Monday, May 16, 2011

प्राइवेट सोसायटी के लोग अपने कुओं से पानी बेच सकते हैं

प्राइवेट सोसायटी के लोग अपने कुओं से पानी बेच सकते हैं, क्योंकि बीएमसी ने ऐसा कोई नियम कानून ही नहीं बनाया है जिससे उन पर किसी तरह की पाबंदी लगाई जा सके। पिछले दिनों बीएमसी कमिश्नर ने साफ कर दिया कि निजी सोसायटी अपने कुओं का पानी बेच सकते हैं, उन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। पिछले एक साल से मुंबई भारी पानी की समस्या से जूझ रही है। लोगों को जितने पानी की जरूरत है उतना पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में महानगर की कई प्राइवेट सोसायटियों ने अपने परिसर में ही कुआं खोद दिया जिससे कुछ हद तक उन्हें राहत मिली, मगर कई सोसायटियों ने पानी बेचने का कारोबार शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि पानी खरीदने वाले सोसायटी को एक हजार से 1000-1500 रुपये में प्रति बड़े टैंकर (10 हजार लीटर) देते हैं लेकिन पानी का कारोबार करने वाले माफिया कितने में बेचते हैं इसका सही आंकड़ा कोई बताने के लिए तैयार नहीं है। आमतौर पर पानी का कारोबार करने वाले लोग सोसायटी का पानी होटल व निर्माण कार्य करने वालों को बेचते हैं। पानी का कारोबार करने वालों के बाबत कई सोसायटियों के सदस्यों ने विरोध किया है। बीएमसी का ध्यान भी खींचा है, मगर बीएमसी इस संबंध में कुछ नहीं कर पा रही है क्योंकि प्राइवेट सोसायटियों के पानी बेचने पर किसी तरह का कोई नियम-कानून नहीं है जिससे बीएमसी अधिकारी चाह कर भी उन्हें पानी बेचने से रोक नहीं पाते। गौर करने की बात यह है कि बिना बीएमसी की अनुमति से कोई कुआं या हैंडपंप नहीं लगा सकता। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर जब कुआं खोदने के लिए बीएमसी की अनुमति लेनी पड़ती है तो बीएमसी उसका पानी बेचने पर पाबंदी क्यांे नहीं लगा सकती। म्यूनिसिपल कमिश्नर सुबोध कुमार ने बताया कि सोसायटी को पानी बेचने ने बीएमसी नहीं रोक सकती।

Tuesday, May 10, 2011

साठ हजार रुपये की

छोटे से काम के लिए जिस शख्स को रोज सौ रुपये दिए जाते थे ,वह बाद में साठ हजार रुपये की लूट का कारण बन जाएगा ,इसकी दीपा साटम ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। लेकिनयोगेश गावडे ने ऐसा ही किया। योगेश को चार अन्य आरोपियोंके साथ सीनियर इंस्पेक्टर शिवाजी राव कोलेकर ने सोमवार रातगिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार दीपा साटम मेघवाडी स्थित नाइस मार्केटिंग केदफ्तर में बतौर सहायक काम करती है। इस कंपनी का मूलमालिक कोई कोटियन है , जो दफ्तर बहुत ही कम आता है। इसदफ्तर में दीपा के साथ एक नौकर भी काम करता है , लेकिनसोमवार को वह छुट्टी पर था। इस मार्केटिंग कंपनी का मूल कामकार और ऑटो रिक्शा लोन को किसी फाइनेंस या लोन कंपनी से मंजूर करवाना होता है , जिसके बदले में इस मार्केटिंगकंपनी को हर लोन कंपनी से प्रति कार या ऑटो पांच हजार रुपये मिलते हैं।
योगेश गावडे इस मार्केटिंग कंपनी का स्थायी कर्मचारी नहीं है , लेकिन वह रोज नाइस मार्केटिंग कंपनी कार या ऑटो सेजुड़े दस्तावेज लेने आता था और फिर इन दस्तावेजों को आरटीओ में जाकर जमा कर देता था। बदले में उसे सौ रुपये रोजमिलते थे।
सोमवार को भी वह रोज की तरह देर दोपहर करीब चार बजे वहां आया। कुछ देर बाद वहां तीन और लोग हथियारलेकर आ गए । उन्होंने दीपा से दफ्तर में रखी सारी नकदी ( करीब 50 हजार रुपये ) उन्हें सौंप देने को कहा। साथ ही खुददीपा की सोने की करीब दस हजार रुपये कीमत की अंगूठी उतरवा ली। इसके बाद सारे आरोपी ऑटो में बैठकर भाग गए।
जब अडिशनल सीपी अमिताभ गुप्ता और डीसीपी मुदियार के निर्देश पर मेघवाडी पुलिस ने दीपा से पूछताछ की , तोउसने सबसे ज्यादा शक योगेश गावडे पर जताया। दीपा का तर्क था कि वारदात के बाद वह योगेश से पुलिस स्टेशनचलकर एफआईआर दर्ज कराने को जब कहने लगी , तो वह बहाने बनाने लगा। दीपा के इस तर्क के बाद पुलिस ने योगेशको पूछताछ के लिए जैसे ही उठाया , उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने इसके बाद उन आरोपियों के नामभी बता दिए , जिसे उसने इस अपराध की सुपारी दी थी। पुलिस ने योगेश से मिले सुराग पर फिर नीकेश ठक्कर , भरतठक्कर , दीपक शिंदे और सुरेश राजपूत को गिरफ्तार किया। भरत और नीकेश रिश्ते में बाप - बेटे हैं।
नीकेश और दीपक ने पुलिस को बताया कि उनकी मां पिछले कई दिनों से बीमार चल रही थीं , इसलिए इलाज के लिएरुपये जुगाड़ करने के वास्ते वो लोग इस अपराध को करने के लिए मजबूर हुए।

Sunday, May 1, 2011

1 मई 1960 को महाराष्ट्र राज्य की स्थापना

महाराष्ट्र राज्य की स्थापना की स्वर्ण जयंती समापन की पूर्व संध्या पर शनिवार को मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर दिग्गजों के सत्कार, मराठी फिल्मों का अवॉर्ड फंक्शन संपन्न हुआ। इसमें मराठी फिल्म दिग्गजों के अलावा क्षेत्रीय कलाकारों को भी शामिल किया गया। कार्यक्रम में रंगत लाने के लिए सांस्कृतिक आयोजन हुए। इस उपलक्ष्य में महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिनों के भव्य उत्सव का आयोजन किया है। शनिवार को गेटवे ऑफ इंडिया, रविवार को शिवाजी पार्क और दो मई को गिरगांव चौपाटी में आयोजन होंगे। इसके अलावा विधान भवन, एनसीपी द्वारा हुतात्मा चौक में और बीजेपी द्वारा बांद्रा में भी औपचारिक समारोह होंगे। गत एक मई को स्वर्ण वर्ष के स्वागत में सांस्कृतिक जलसे का आयोजन हुआ था।

1 मई 1960 को महाराष्ट्र राज्य की स्थापना के समय मुख्य आयोजन शिवाजी पार्क पर हुआ था। उसी परंपरा में रविवार एक मई को मुख्य सरकारी आयोजन उसी ऐतिहासिक ग्राउंड पर होना है। दो मई को गिरगांव चौपाटी की रेत पर भव्य रंगारंग कार्यक्रम होगा। इसमें स्टेज के कई शो विशेष तौर पर तैयार किए गए है। पिछले साल की तुलना में एक फर्क ये होगा कि लेज़र शो रद्द कर दिया गया है। समुद्र के भीतर से की गई 30 मिनट की लेज़र पटाखेबाजी में कुछ गड़बडि़यां रह गई थीं।

इन उत्सवी समारोहों का समापन सोमवार 2 मई को गिरगांव चौपाटी के कार्यक्रम के साथ होगा। जानेमाने डिजाइनर नितिन देसाई इसके लिए बने विशाल पंडाल में महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपरा को जीवित करने में जुटे हुए है। इस समारोह में शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का दृश्य भव्य पैमाने पर प्रस्तुत किया जाएगा। महाराष्ट्र के संत कवियों की कृतियों और लावणी जैसी लोककलाओं की भी प्रस्तुति होगी।

मुंबई हाईकोर्ट ने इस आयोजन के लिए गिरगांव चौपाटी के इस्तेमाल की विशेष अनुमति दी है। 150 फीट लंबा मंच बनाने और आयोजन की तारीख बदलकर दो मई करने के अनुरोध को हाईकोर्ट की स्वीकृति मिल गई है।

Monday, April 25, 2011

सुरेश कलमाड़ी को सीबीआई ने पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया

कॉमनवेल्थ गेम्स ऑर्गनाइजिंग कमिटी के पूर्व अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को सीबीआई ने पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। कॉमनवेल्थ गेम्स क्वींस बैटन रिले केस में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में उनको अरेस्ट किया गया। सुरेश कलमाड़ी से सीबीआई ने सोमवार सुबह 10 बजे पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक क्वींस बैटन रिले के आयोजन के लिए जिन दो कंपनियों को ठेका दिया गया था, उसके करोड़ों के पेमेंट के बारे में सीबीआई ने कलमाड़ी से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद कलमाड़ी से आईओसी के चेयरमैन की कुर्सी छिननी भी तय मानी जा रही है। इस पर कोई फैसला आज देर शाम तक हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक आईओसी ने कलमाड़ी को प्रेजिडेंट पद से इस्तीफा देने को कह दिया है। आईओसी ने इंडियन ओलिंपिक असोसिएशन से भी इस मामले में दखल देने को कहा है। सीबीआई का आरोप है कि क्वीन्स बैटन रिले के आयोजन के लिए दो कंपनियों को ठेका दिया गया था। इसमें भारी अनियमितता की गई और इससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ है। सीबीआई इस मामले की छानबीन के दौरान ओसी के कुछ पूर्व अधिकारियों टी. एस. दरबारी और अन्य को गिरफ्तार कर चुकी है। इसी दौरान सीबीआई ने कलमाड़ी व अन्य के दिल्ली और पुणे स्थित ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी में भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए थे। सीबीआई ने दस्तावेजों के पड़ताल के बाद कलमाड़ी को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था। सीबीआई के मुताबिक 29 अक्टूबर, 2009 क्वीन्स बैटन रिले में एएम फिल्म्स और एएम कार ऐड वैन हायर लिमिटेड को नियमों को ताख पर रखकर ठेका दिया गया। इससे सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। तीसरी एफआईआर स्विस कंपनी से हुई 107 करोड़ की डील से संबंधित है। सीबीआई ने कलमाड़ी के अलावा ओसी के सेक्रेटरी जनरल ललित भनोट व अन्य के ठिकानों पर छापेमारी की थी। सूत्रों के मुताबिक गेम्स डील से संबंधित कुछ दस्तावेज गायब हो चुके हैं सीबीआई को अंदेशा है कि कहीं इस दस्तावेज को छुपाया न गया हो।

Sunday, April 24, 2011

बिहार और यूपी के लोगों की मौजूदगी से एतराज

गुड़ तो खाएंगे लेकिन गुलगुले से परहेज करेंगे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) पर यह कहावत पूरी तरह से फिट बैठती है। पार्टी को सूबे में बिहार और यूपी के लोगों की मौजूदगी से एतराज है, लेकिन बात जब भोजपुरी फिल्में बना कर पैसा कमाने की आती है तो इसके नेताओं को लगता है कि इसमें कोई बुराई नहीं है।

एमएनएस के एक नेता की पत्नी भोजपुरी फिल्म बना रही हैं। एमएनएस चित्रपट कर्मचारी सेना के वाइस प्रेजिडेंट सतीश बाविसकर की पत्नी नंदा बविसकर भोजपुरी फिल्म बना रही हैं। इस फिल्म का नाम है ' त्रिदेव ' । फिल्म में भोजपुरी स्टार पवन सिंह और विराज भट्ट होंगे। फिल्म छठ के आसपास रिलीज की जाएगी।

इस बारे में जब सतीश बाविसकर ने स्थानीय टैब्लॉइड से कहा कि पार्टी की विचारधारा और पत्नी के फिल्म निर्माण में कहीं कोई विरोधाभास नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पत्नी कुछ भी गलत नहीं कर रही हैं। वह तो केवल मराठी मानुष को बिजनस के गुर सिखा रही हैं।

पिछले दिनों यूपी और बिहार से राज्य में आने कर नौकरी या बिजनस करने वालों के खिलाफ एमएनएस ने हल्ला बोला था। उन पर राज्य के स्थानीय लोगों के लिए संसाधनों की कमी पैदा करने का आरोप लगाया था। अपने विरोध के तहत भोजपुरी फिल्में दिखाने वाले थियेटर्स तक पर हमला बोला गया था।

लेकिन, अब बाविसकर यह सब याद दिलाने पर तर्क देते हैं, ' जब कोई दुबे, चौबे और मिश्रा मराठी फिल्में बना कर पैसा कमा सकते हैं तो एक मराठी द्वारा भोजपुरी फिल्म बनाने में क्या गलत है? फर्क सिर्फ यह है कि यहां आ कर उत्तर भारतीय पैसा बनाते हैं और अपने गृह-राज्य में भेज देते हैं, जबकि मराठी मानुष वहां पैसा बनाएंगे और यहां लेकर आएंगे।'

छह महीने के भीतर फिल्म रिलीज होने के उम्मीद जताई जा रही है। वैसे यहां बता दें कि 1997 से बविसकर खुद फिल्म निर्माण के क्षेत्र में हैं और एक अन्य भोजपुरी फिल्म 'देवर भाभी' को बनाने में जुटे हुए हैं। इस पर उनका कहना है, ' मैंने पार्टी के सीनियर नेताओं को पत्र लिख कर कहा है कि मराठियों को भोजपुरी फिल्में बनाने का प्रोत्साहन दें ताकि वे वहां पैसा कमाएं और यहां लेकर आएं। जैसे उत्तर भारतीय महाराष्ट्र में आकर पैसा कमा रहे हैं, ठीक वैसे ही मराठियों को भी करना चाहिए।'

इस मसले पर एमएनएस के जनरल सेक्रेटरी शिरीष पारेकर का कहना है कि वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बात करके ही कुछ कॉमेंट कर पाएंगें। पार्टी के वाइस प्रेजिडेंट वागेश सारस्वत का कहना है कि इसमें कोई बुराई नहीं है और यह खालिस बिजनस की बात है।
आपको याद दिला दें 1 जुलाई 2008 को करीब 10 एमएनएस कार्यकर्ताओं ने लोअर पारेल के दीपक टॉकीज में इसलिए तोड़- फोड़ मचा दी थी, क्योंकि वहां भोजपुरी फिल्म 'बनके बिहारी' दिखाई जा रही थी। दोपहर के शो से कुछ ही समय पहले सिनेमा पर अटैक कर दिया गया था। मांग थी कि केवल मराठी फिल्में ही दिखाई जानी चाहिए। इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले इसी साल फरवरी में प्रताप टॉकीज पर एमएनएस कार्यकर्ताओं ने 'सैंया से सोलह श्रृंगार' फिल्म दिखाने पर हमला बोल दिया था।

Thursday, April 14, 2011

अलग - अलग छापों में करीब तीन करोड़ रुपये कीमत का ऑयल जब्त किया

मुंबई पुलिस ने वडाला में दो अलग - अलग छापों में करीब तीन करोड़ रुपये कीमत का ऑयल जब्त किया है। पहली कार्रवाई में सीनियर इंस्पेक्टर राकेश शर्मा , पीरजादे की टीम ने दो दिन पहले वडाला ट्रक टर्मिनल के पास ऑयल से भरे छह टैंकर व एक टैम्पो तो जब्त किया ही है , वहां ऑयल से भरे 200-200 लीटर के 22 ड्रम भी पकड़े। इस मामले में कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार , जब्त टैंकरों में ऑयल कहीं और से भरा गया था और इन टैंकरों को जाना कहीं और था , लेकिन ऑयल की चोरी के वास्ते इन टैंकरों को जान बूझकर वडाला ट्रक टर्मिनल लाया गया। पुलिस ने वडाला में ही एक दूसरे छापे में 12 हजार 200 लीटर मिलावटी तेल जब्त किया। इस मामले में जोसेफ मुत्तु और वीरेंद्र गौतम को गिरफ्तार किया गया। जोसेफ की मां सरोज अक्का को पुलिस ने फरार घोषित किया है।