Monday, February 14, 2011

माहिम की दो महीने से लापता चार बहनों की गुत्थी अभी भी नहीं सुलझ रही

माहिम की दो महीने से लापता चार बहनों की गुत्थी अभी भी नहीं सुलझ रही है। तेजस्विनी , लक्ष्मी और गौरी वर्मा व सना शेख नामक इन बच्चियों की उम्र साढ़े तीन साल से 10 साल के बीच है। ये 27 नवंबर , 2010 से लापता हैं। तेजस्विनी , लक्ष्मी और गौरी की मां उज्ज्वला दादर में छबीलदास मार्ग में कंगन बेचने का काम करती है , जबकि सना की मां रेशमा सात रास्ता में एसीटी बूथ में काम करती है। रेशमा और उज्ज्वला दोनों के ही पति उनके साथ नहीं हैं , इसलिए दोनों माहिम में नया नगर इलाके में अपने बच्चों के साथ एक ही घर में रहती थीं। चूंकि बच्चियों में तेजस्विनी उम्र में सबसे बड़ी है , इसलिए उज्ज्वला और रेशमा के काम पर जाने के बाद वही अपनी छोटी बहनों को संभालती थी। पहले तेजस्विनी , 14 सितंबर , 2010 को घर से गायब हुई , लेकिन दो दिन बाद वह वापस घर लौट आई। 20 सितंंबर को वह फिर अपनी दो बहनों लक्ष्मी और गौरी को लेकर घर से गायब हुई। इस बार वह अपनी बहनों के साथ एक हफ्ते बाद सोलापुर में अपनी नानी के यहां मिली। पहले उज्ज्वला ने भगवान कांबले नामक व्यक्ति से शादी की थी , जो सोलापुर में रहते थे। तेजस्विनी उसी की बच्ची है। बाद में उज्ज्वला ने अरविंद वर्मा नामक व्यक्ति से शादी की। लक्ष्मी और गौरी के मूल पिता अरविंद वर्मा हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार सोलापुर में नानी के घर मिलने के बाद तेजस्विनी , लक्ष्मी और गौरी को वापस मुंबई लाया गया। लेकिन 27 नवंबर , 2010 को तेजस्विनी अपने घर से फिर गायब हो गई। इस बार उसके साथ लक्ष्मी और गौरी ही गायब नहीं हुईं , रेशमा की बेटी सना भी लापता हो गई। माहिम पुलिस ने अब इन बहनों को ढूंढने के लिए एक स्पेशल दस्ता बनाया है।

Tuesday, February 8, 2011

हिंदी भाषी कार्यकर्ताओं को तो वह बिल्कुल पसंद नहीं गोपीनाथ मुंडे की पेशकश

एमएनएस से गठबंधन करने की गोपीनाथ मुंडे की पेशकश को बीजेपी ने बहुत गंभीरता से नहीं लिया है। हिंदी भाषी कार्यकर्ताओं को तो वह बिल्कुल पसंद नहीं आया है। एमएनएस के हिंदी विरोधी रुख का उल्लेख करते हुए यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या बीजेपी हाईकमान को मनसे से दोस्ती मंजूर है? सूत्रों ने बताया कि मुंडे ने औरंगाबाद में बयान करने से पहले पार्टी के नेताओं, यहां तक कि अध्यक्ष नितिन गडकरी से भी मश्विरा नहीं किया था। इसलिए जब सार्वजनिक रूप से उन्होंने बयान किया तो सभी हैरत में पड़ गए। महाराष्ट्र बीजेपी के महासचिव विनोद तावडे ने एनबीटी को बताया कि जब तक एमएनएस हिंदी विरोधी रुख नहीं बदलती, तब तक मुझे नहीं लगता कि बीजेपी उससे गठबंधन कर सकेगी। बीजेपी राष्ट्रीय पार्टी है और शिवसेना से उसका गठबंधन हिंदुत्व के आधार पर है। जब वह सिर्फ मराठी के मुद्दे पर लड़ रही थी तब तक बीजेपी का उससे गठबंधन नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक एमएनएस ने ऐसा कोई संकेत नही दिया है कि वह एंटी हिंदी रुख बदल रही है।

Thursday, February 3, 2011

साधारण सभा की बैठकों से अक्सर गायब नगरसेवक

अपनी आवाज बुलंद करने के लिए आप जिन नगरसेवकों को चुनते हैं उनमें कई सारे ऐसे नगरसेवक हैं, जो बीएमसी साधारण सभा की बैठकों से अक्सर गायब रहते हैं जबकि बीएमसी की ओर से उन्हें हर माह मानधन मिलता है। इनकी अनुपस्थित के चलते आप के क्षेत्र की समस्या अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती इसलिए अगली बार जब आप मतदान करे तब इस बात पर निश्चित ही गौर फरमाइए। मुंबईकर अपनी समस्या को बीएमसी कमिश्नर तक पहुंचाने के लिए 227 नगरसेवकांे का चुनाव करते हंै। इन नगरसेवकों का कार्यकाल पांच साल का होता है। एक अप्रैल, 2009 से 31 मार्च 2010 तक बीएमसी की कुल 59 साधारण सभा की बैठकें हुई जिनमें महज दो नगरसेवकों ने सभी 59 बैठकों में हिस्सा लिया जिनमें एक कांग्रेस की प्रेमा विजय सिंह हैं और दूसरे एनसीपी के मंगेश बंसोड ही हैं। मेयर श्रद्धा जाधव, वंदना गवली, पार्वती गोरीवले, मीना देसाई, शांताराम भोसले, रमाकांत रहाटे और विद्या भोईर ने 58 बैठकों में भाग लिया। सबसे ज्यादा बैठकों में भाग लेने वालों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं ज्यादा है, परंतु अनुपस्थित रहने वाले नगरसेवकों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। हर साल की तरह इस साल भी कांगे्रस के नगरसेवकों ने यह रिकॉर्ड कायम रखा है। कांग्रेस के नौ, जबकि शिवसेना, एनसीपी, मनसे, आरपीआई आठवले और समाजवादी पार्टी के एक-एक नगरसेवक साधारण सभा की 50 फीसदी बैठकों में भाग नहीं लिया और ये ऐसे नगरसेवक हैं, जिन्होंने अपने गैरहाजिर होने के कारण भी अपनी पार्टी को बताना उचित नहीं समझा। यह तो छोडि़ए कांग्रेस ने नामांकित नगरसेवक के तौर पर मुलुंड के सुरेश गंगवानी को नियुक्ति किया मगर उनका नाक भी गायब हरने वालों की लिस्ट में शामिल है। अनुपस्थित रहने के कारण पूछने पर नगरसेवक का अपना-अपना तर्क है। कइयों ने अपनी तबियत नासाज होने का कारण बताया तो कई ने पारिवारिक कारण बताया। हालांकि कइयों ने दावा किया उन्होंने छुट्टी की अर्जी दी थी मगर पता नहीं क्यांे उनकी छुट्टी मंजूर की गई। लगातार गैरहाजिर रहने से जा सकता है पद साधारण सभा की बैठकों से लगातार गायब रहने वाले नगरसेवकों का पद रद्द भी हो सकता है। बीएमसी अधिनियम 1888 के तहत बिना किसी सूचना के अगर कोई नगरसेवक लगातार तीन महीने तक गायब रहता है तब उसका नगरसेवक पद रद्द हो सकता है। पिछले साल के कार्यकाल के दौरान कमलेश राय का नगरसेवक पद्द इसी के चलते रद्द कर दिया गया था। दरअसल, राय ने शिवसेना पार्टी से चुनाव लड़ा था, मगर बीच में ही उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया इसलिए ज्यादातर बैठकों से वे अनुपस्थित रहे। हालांकि, अपने गैरहाजिर रहने के कारणों की सूचना उन्होंने शिवसेना पार्टी को दिया था, पर पार्टी ने उनकी छुट्टी मंजूर नहीं की। इसके चलते उनका नगरसेवकी भी रद्द कर दी गई थी। वैसे छुट्टी लेकर कोई भी नगरसेवक लगातार एक साल तक छुट्टी पर रह सकता है मगर उस साल की अंतिम बैठक उस नगरसेवक को उपस्थित रहना जरूरी है। मानधन भी लेते है फिर भी नहीं आते बीएमसी साधारण सभा की बैठक ज्वाइन करने के लिए प्रत्येक नगरसेवक को बीएमसी भत्ता भी देती है। भत्ता लेते हैं मगर बैठक से गायब रहते हैं। प्रति बैठक में शामिल होने के लिए उन्हें 150 रुपये मिलते हैं। इसके अलावा मानधन के तौर पर उन्हें प्रति माह 10 हजार रुपये मिलते हंै। इसके अलावा अपने चुनाव क्षेत्र को डिवेलपमेंट करने के लिए एक साल नगरसेवक को 35 लाख रुपये नगरसेवक फंड के रूप में जबकि विकास निधि के तौर पा एक करोड़ रुपये हर साल मिलते हैं

Tuesday, February 1, 2011

विभिन्न ऑप्शनों पर विचार

मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी विभिन्न ऑप्शनों पर विचार कर रही है। इसमें एक यह है कि प्रदेशाध्यक्ष माणिकराव ठाकरे की विधानपरिषद की सीट से चव्हाण की राज्यसभा की सीट की अदला-बदली की जाए। यानी ठाकरे को राज्यसभा भेजकर उनकी जगह चव्हाण को विधानपरिषद में निर्वाचित किया जाए। राज्य के नेताओं को यही ऑप्शन राजनीतिक दृष्टि से सही और सुविधाजनक लग रहा है। इसलिए कि ठाकरे की टर्म का अभी साढ़े चार साल बचा है। हालांकि मुख्यमंत्री ने अभी तय नहीं किया है कि वे विधानपरिषद से चुनाव चाहते हैं या विधानसभा से! चव्हाण के गृह-क्षेत्र सातारा जिले के खटाव-माण विधानसभा सीट के निर्दलीय सदस्य जयकुमार गोरे ने भी चव्हाण के लिए सीट खाली करने का ऑफर किया है। किंतु वह सीट कांग्रेस-एनसीपी समझौते में एनसीपी कोटे की है। अत: इस बात को लेकर असमंजस है कि वह सीट सुविधाजनक होगी या नहीं। चव्हाण के लिए विधानपरिषद को ही सही माना जा रहा है। आदर्श घोटाले के कारण अशोक चव्हाण को हटाए जाने के बाद गत दिसंबर में पृथ्वीराज मुख्यमंत्री बने। उन्हें छह माह के भीतर दोनों में से किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा। इस बीच विधान परिषद की दो सीटों के लिए उपचुनाव की मंगलवार को घोषणा की गई। शिवसेना के किरण पावसकर द्वारा इस्तीफे और एनसीपी के गुरूनाथ कुलकर्णी के निधन के कारण दो स्थान रिक्त हुए है। यह चुनाव 21 फरवरी को होगा। पावसकर की सीट पर शिवसेना का दावा होगा और कुलकर्णी की सीट पर एनसीपी का ही उम्मीदवार होने की संभावना है। पावसकर चूंकि एनसीपी में गए है। दोनों सीटों पर उसी की उम्मीदवार को खड़े किए जाने के आसार है। मुख्यमंत्री के लिए यदि दो में से एक सीट मांगी गई तो एनसीपी देने को तैयार होगी, पर कांग्रेसी सूत्रों ने बताया कि वह ऐसी मांग करने के मूड में नहीं है। यह भी बताया गया कि माणिकराव ठाकरे को यदि चव्हाण की जगह राज्यसभा की सीट दी गई तो उन्हें प्रदेशाध्यक्ष पद पर कायम रखा जाएगा।


Monday, January 31, 2011

अशोक चव्हाण सहित आदर्श आवासीय घोटाला मामले में नामजद

सीबीआई महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण सहित आदर्श आवासीय घोटाला मामले में नामजद सभी लोगों से नियमों के कथित उल्लंघन में उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ करने के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी में है। सीबीआई की योजना है कि मामले में नामजद सभी लोगों को पूछताछ के लिए जांच एजेंसी के कार्यालय बुलाया जाए। सीबीआई बांबे हाई कोर्ट में मंगलवार को एक हलफनामा भी दाखिल कर सकती है, जिसमें कोर्ट को सूचित किया जाएगा कि इस मामले में 13 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। बंबई उच्च न्यायालय ने घोटाले की जांच धीमी गति से होने के चलते पिछली सुनवाई में सीबीआई की खिंचाई की थी। सीबीआई के सूत्रों ने कहा कि प्राथमिकी में नामजद चव्हाण तथा 12 अन्य को पूछताछ के लिए जल्द ही उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया जायेगा। संपर्क किए जाने पर चव्हाण ने बताया कि वह प्राथमिकी की प्रति मिलने के बाद ही इस बारे में प्रतिक्रिया दे पाएंगे। उन्होंने कहा, 'अभी प्रतिक्रिया व्यक्त करना मेरे लिए उचित नहीं होगा।' सोसायटी में फ्लैट हासिल करने वालों में अपने परिवार के सदस्यों का नाम होने का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री पद से पिछले वर्ष इस्तीफा दे चुके चव्हाण 2001 से 2003 के बीच राजस्व मंत्री थे। इस भूमि के स्वामित्व से जुड़ी फाइलें उन्हीं ने देखी थीं। सूत्रों ने कहा कि चव्हाण ने सोसायटी के 40 फीसदी फ्लैटों का आवंटन असैन्य लोगों को करने की कथित तौर पर सिफारिश की थी। आदर्श सोसायटी के फ्लैट शहीदों की विधवाओं और कारगिल युद्ध के नायकों को दिए जाने थे। सीबीआई ने इस मामले में शुरुआती जांच करने के दो महीने बाद पिछले सप्ताह ही प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में चव्हाण के अलावा सोसायटी के महासचिव आर सी. ठाकुर, सेवानिवृत्त बिग्रेडियर एम एम वांचू, कांग्रेस नेता के.एल. गिडवानी और शहरी विकास विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव रामानंद तिवारी का नाम भी दर्ज है। प्राथमिकी में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल पी.के. रामपाल, मेजर जनरल ए.आर. कुमार और टी.के. कौल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव रह चुके सुभाष लाला, बिग्रेडियर (सेवानिवृत्त) आर.सी. शर्मा, मुंबई के पूर्व कलेक्टर प्रदीप व्यास और शहरी विकास विभाग के पूर्व उप सचिव पी.वी. देशमुख का नाम भी शामिल है। सीबीआई ने महाराष्ट्र और बिहार में ठाकुर , तिवारी , गिडवानी , वांचू और व्यास के परिसरों की रविवार को ही तलाशी ली थी। दक्षिण मुंबई के कोलाबा में स्थित आदर्श सोसायटी के कार्यालय की भी तलाशी ली गई थी।

Monday, January 24, 2011

बालासाहेब ठाकरे का 23 जनवरी को 84वां जन्मदिन


शिवसेना अध्यक्ष बालासाहेब ठाकरे के जन्मदिन के अवसर पर रविवार को 'बिनधास्त बोल', 'विचारांच सोनं' और 'हिंदू हृदय सम्राट' नाम की तीन पुस्तकों पर आधारित एक सीडी का विमोचन किया जाएगा। इस सीडी में बीते बीस सालों के 'बिनधास्त बोल' में छपे उनके इंटरव्यू, 'विचारांच सोनं' में छपे दशहरा और दीवाली पर दिए गए उनके भाषण और प्रमुख लेखकों द्वारा उन पर लिखे लेखों के संकलन वाली पुस्तक 'हिंदू हृदय सम्राट' के कुछ अंश शामिल किए गए हैं। बालासाहेब ठाकरे का 23 जनवरी को 84वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस सीडी का विमोचन 23 जनवरी को बाल ठाकरे और उद्धव ठाकरे के हाथों किया जाएगा। 'हिंदू हृदय सम्राट' में 1989 से जार्ज फर्नांडीस, दत्ताजी साल्वी, अभिनेता अमिताभ बच्चन, प्रसिद्ध पत्रकार खुशवंत सिंह, दिलीप वेंगसरकर आदि द्वारा बाल ठाकरे पर लिखे गए लेखों का समावेश है।

Friday, January 14, 2011

बुधवार से मुंबई में साफ पानी आने लगेगा।

पानी का पीलापन धीर-धीरे कम होने लगा है, मगर कई इलाकों में अब भी पीले पानी की सप्लाई जारी है। बीएमसी जल विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि बुधवार से मुंबई में साफ पानी आने लगेगा। इधर, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (आईआईटी) और यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नॉलजी (यूआईसीटी) की रिपोर्ट नहीं आई है, और जांच अधिकारी, पानी किन करणों से पीला हुआ, इसकी तह तक अभी तक नहीं पहुंच सके हैं। मुंबई शहर विभाग के कई क्षेत्रों और पश्चिमी उपनगर के पूरे इलाके में ही पीला पानी आ रहा है। बीएमसी के जल विभाग ने इसके कई कारण गिनाए, हकीकत क्या है, इसकी गहराई तक बीएमसी के बाबू अभी तक नहीं पहुंच सके हैं। पश्चिमी उपनगर में मालाड पश्चिम के नगरसेवक बलदेवसिंह गुणवंतसिंह मनकू ने बताया कि मालाड पश्चिम में आपूर्ति किए जा रहे पानी के पीलेपन में निश्चित ही कमी आई है, मगर पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। अंधेरी पूर्व जे.वी. नगर के त्रिवेणी बिल्डिंग में रहने वाले डी.पी. सिंह ने बताया कि पीला पानी अभी भी उनके क्षेत्र में सप्लाई किया जा रहा है। हमलोगों की समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। गुरुवार को जल विभाग के अडिशनल कमिश्नर असीम गुप्ता ने बताया कि पानी के रंग में निश्चित ही सुधार आया है और हो सकता है कि शुक्रवार, शनिवार से पानी अपने रंग में आए जाए। पानी साफ कैसे हुआ, इस बाबत उन्होंने बताया कि एक तो अपर वैतरणा से पानी सप्लाई बंद कर दिया, दूसरे पानी में मिलाए जा रहे फिटकरी के पुराने स्टाक की बजाय नए स्टाक का उपयोग शुरू किया। निश्चित तौर से यह नहीं बताया जा सकता कि पानी का रंग क्यों बदला। आईआईटी और यूआईसीटी की रिपोर्ट के बाबत उन्होंने बताया कि दोनों की एजेंसियों पानी की जांच नहीं कर रही है, कारण उन्होंने पानी की जांच बंद कर दी है। गौरतलब है कि आईआईटी और यूआईसीटी का नाम लेकर ही प्रशासन ने नगरसेवकों से छुटकारा पाया था और अब वे एजेंसियां ही पानी की जांच करने से मना कर दिया है। प्रशासन ने तीन दिनों तक नगरसेवकों को गुमराह किया। प्रशासन के इस रवैये को लेकर नगरसेवक खफा है। पूर्वी उपनगर में भी पीले पानी की सप्लाई का दावा करने वाले बीजेपी के नगरसेवक भालचंद्र शिरसाट ने बताया कि पानी के पीलेपन में सुधार जरूर हुआ है मगर पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।